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खाड़ी देशों में ईरान के स्लीपर सेल: विदेशी नागरिकों में भारतीयों के नाम भी सामने
Iran War Update: खाड़ी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे पर ईरान द्वारा ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों के बढ़ते उपयोग ने अब एक और गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है—आख़िर लक्षित देशों के भीतर से तेहरान की मदद कौन कर रहा है?
Iran War Update
Iran War Update: खाड़ी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे पर ईरान द्वारा ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों के बढ़ते उपयोग ने अब एक और गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है—आख़िर लक्षित देशों के भीतर से तेहरान की मदद कौन कर रहा है? ‘जेरूसलम पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र के सुरक्षा अधिकारियों को इस बात की बढ़ती चिंता है कि खाड़ी देशों के भीतर सक्रिय गुप्त स्लीपर सेल वास्तविक समय की खुफिया जानकारी ईरान को उपलब्ध करा रहे हैं। यह जानकारी ईरानी सेना को अत्यंत सटीकता के साथ महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर हमला करने में मदद कर सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार एक सुविज्ञ सैन्य स्रोत ने बताया कि ईरान से जुड़े संदिग्ध नेटवर्क केवल ईरानी नागरिकों तक सीमित नहीं हैं। इस स्रोत के अनुसार जिन लोगों की जांच की जा रही है उनमें कई देशों के नागरिक शामिल हैं, जिनमें भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के नागरिकों के नाम भी सामने आए हैं।
स्रोत ने यह भी कहा कि इन स्लीपर सेल में अल्जीरिया और ट्यूनीशिया के नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं।
हमले से पहले ही रिकॉर्ड किए गए ड्रोन हमलों के वीडियो
सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि अंदरूनी सहयोग के सबसे महत्वपूर्ण संकेतों में से एक उन वीडियो की टाइमिंग है जो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। X (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर प्रसारित कई वीडियो में मिसाइल या ड्रोन हमलों को टकराने से ठीक पहले रिकॉर्ड किया गया दिखाई देता है। कुछ वीडियो में तो आने वाले प्रोजेक्टाइल को बेहद सटीक कोण से कैद किया गया है।
खाड़ी देशों की खुफिया एजेंसियों के अनुसार इससे यह संकेत मिलता है कि हमले के स्थान और समय की अग्रिम जानकारी पहले से मौजूद थी। जमीन पर किसी समन्वय के बिना इस तरह की सटीकता संभव होना अत्यंत कठिन माना जा रहा है।
इन वीडियो का प्रसार अक्सर हमले के कुछ ही मिनटों के भीतर हो जाता है—कभी-कभी तो सरकारी एजेंसियों द्वारा हमले की आधिकारिक पुष्टि से पहले ही। इससे यह संदेह भी पैदा हुआ है कि कुछ ऑपरेटिव इन हमलों को रिकॉर्ड कर उन्हें प्रचार सामग्री या तेहरान के लिए युद्धक्षेत्र सत्यापन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हों।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से संभावित संबंध
क्षेत्रीय सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि इन नेटवर्कों में से कुछ का संबंध इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से हो सकता है—जो ईरान की एक शक्तिशाली सैन्य इकाई है और विदेशों में अभियानों तथा प्रॉक्सी युद्ध के संचालन के लिए जानी जाती है।
खाड़ी देशों की सरकारें लंबे समय से IRGC पर यह आरोप लगाती रही हैं कि उसने धार्मिक, राजनीतिक और प्रवासी समुदायों के माध्यम से क्षेत्र में गुप्त समर्थन नेटवर्क बनाए हैं। इन नेटवर्कों पर यह भी आरोप है कि वे सैन्य ठिकानों के निर्देशांक जुटाते हैं, वायु रक्षा प्रणाली की गतिविधियों पर नजर रखते हैं और सैन्य रसद के आवागमन की जानकारी एकत्र करते हैं।
बढ़ते खतरे के जवाब में खाड़ी देशों ने निगरानी, साइबर मॉनिटरिंग और आंतरिक सुरक्षा अभियानों को पहले ही तेज कर दिया है।
बदलती युद्ध रणनीति
कथित स्लीपर सेल गतिविधियाँ सैन्य विश्लेषकों के अनुसार ईरान की विकसित होती “हाइब्रिड युद्ध रणनीति” की ओर संकेत करती हैं—जिसमें ड्रोन हमले, साइबर अभियान, प्रचार युद्ध और गुप्त खुफिया नेटवर्क एक साथ काम करते हैं। यदि इन दावों की पुष्टि होती है तो इसका अर्थ होगा कि खाड़ी क्षेत्र में ईरान का मिसाइल अभियान केवल दूर से चलाया गया सैन्य अभियान नहीं है, बल्कि जमीन पर मौजूद “आंखों और कानों” के सहारे संचालित एक समन्वित रणनीति है।


