ट्रंप के 'शांति जाल' में फंसा पाकिस्तान? शहबाज शरीफ के एक फैसले से पूरे देश में मचा बवाल!

Pakistan News: स्विट्जरलैंड के बर्फीले शहर दावोस से ट्रंप ने गाजा के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' का ऐलान क्या किया, पाकिस्तान की सियासत में जैसे जलजला आ गया है। इस बोर्ड में शामिल होने वाले शुरुआती देशों में पाकिस्तान का नाम सबसे ऊपर है।

Prashant Vinay Dixit
Published on: 23 Jan 2026 8:27 PM IST
ट्रंप के शांति जाल में फंसा पाकिस्तान? शहबाज शरीफ के एक फैसले से पूरे देश में मचा बवाल!
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Pakistan News: दुनिया की राजनीति में डोनाल्ड ट्रंप कोई चाल चलते हैं, तो उसकी गूंज सात समंदर पार तक सुनाई देती है। स्विट्जरलैंड के बर्फीले शहर दावोस से ट्रंप ने गाजा के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' का ऐलान क्या किया, पाकिस्तान की सियासत में जैसे जलजला आ गया है। इस बोर्ड में शामिल होने वाले शुरुआती देशों में पाकिस्तान का नाम सबसे ऊपर है। लेकिन क्या यह सिर्फ शांति की कोशिश है या शहबाज शरीफ और जनरल असीम मुनीर ने कोई ऐसी डील कर ली है, जिससे पाकिस्तान के आम नागरिक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं?

गाजा में पाकिस्तानी फौज, इजरायल का साथ

बात सिर्फ एक कमेटी की नहीं है, बल्कि चर्चा तो यहां तक है कि पाकिस्तानी सेना को गाजा में प्रस्तावित 'इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स' (ISF) का हिस्सा बनाया जा सकता है। यह खबर जैसे ही इस्लामाबाद और लाहौर की सड़कों पर पहुंची, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। आरोप लग रहे हैं कि पाकिस्तान की सरकार और सेना फिलिस्तीनियों की पीठ में छुरा घोंपकर अमेरिका और इजरायल के एजेंडे को आगे बढ़ा रही है। सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान वाकई गाजा की मदद करना चाहता है या वह सिर्फ ट्रंप की गुड बुक्स में आने के लिए यह जोखिम मोल ले रहा है?

अपनों के ही निशाने पर शहबाज सरकार

फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के भीतर ही शहबाज शरीफ की घेराबंदी शुरू हो गई है। विपक्षी नेताओं से लेकर विदेश नीति के जानकारों तक हर कोई इसे एक 'आत्मघाती कदम' बता रहा है। इस्लामी संगठनों ने खुलेआम अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बचाव में कहा है कि इस बोर्ड से गाजा में मानवीय मदद और पुनर्निर्माण में तेजी आएगी, लेकिन देश के बुद्धिजीवी दलील को मानने को तैयार नहीं हैं। सीनेट में विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर ने 'नाकाबिल-ए-माफी' गुनाह करार दिया है। इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने भी साफ किया है।

ट्रंप का फरमान, पाकिस्तान की मजबूरी

उसने कहा कि पाकिस्तान को तुरंत इस बोर्ड से बाहर निकलना चाहिए। मशहूर एक्सपर्ट मलीहा लोधी और पत्रकार जाहिद हुसैन ने सरकार की जल्दबाजी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप इस बोर्ड के जरिए अपनी मनमानी नीतियों को अंतरराष्ट्रीय वैधता दिलाना चाहते हैं। क्या पाकिस्तान सिर्फ ट्रंप का चहेता बनने के लिए उनके हर फरमान को सर आंखों पर रखेगा? दरअसल, शहबाज शरीफ और असीम मुनीर लंबे समय से ट्रंप प्रशासन को रिझाने में जुटे हैं। कभी भारत के साथ सीजफायर का श्रेय ट्रंप को देना, तो कभी उनके लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग करना यह सब रणनीति का हिस्सा है।

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Prashant Vinay Dixit is a former Reporter at Newstrack.com.

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