संयुक्त राष्ट्र का किलर? ट्रंप के 20 सूत्रीय फॉर्मूले ने इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में लगाई आग

Peace Board News: चीन और रूस जैसे प्रतिद्वंद्वी ही नहीं, बल्कि फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे करीबी दोस्त भी गायब रहे। सन्नाटे ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह बोर्ड वाकई शांति लाएगा या फिर यह संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं को चुनौती देने का एक नया जरिया है।

Prashant Vinay Dixit
Published on: 23 Jan 2026 6:50 AM IST
संयुक्त राष्ट्र का किलर? ट्रंप के 20 सूत्रीय फॉर्मूले ने इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में लगाई आग
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Peace Board News: पूरी दुनिया की नजरें व्हाइट हाउस की ओर टिकी हैं, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा धमाका किया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। ट्रंप ने गाजा में चल रहे खूनी संघर्ष को हमेशा के लिए खत्म करने का दावा करते हुए गाजा शांति बोर्ड का प्रस्ताव दुनिया के सामने रख दिया है। इसे ट्रंप का बड़ा 'शांति कार्ड' माना जा रहा है। इसे ट्रंप ने महज एक बोर्ड नहीं, वैश्विक संघर्षों को जड़ से मिटाने वाला महा-समाधान बताया है।

ट्रंप का 20 सूत्रीय फॉर्मूला

इससे चीन और रूस जैसे प्रतिद्वंद्वी ही नहीं, बल्कि फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे करीबी दोस्त भी गायब रहे। सन्नाटे ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह बोर्ड वाकई शांति लाएगा या फिर यह संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं को चुनौती देने का एक नया जरिया है। गाजा पीस बोर्ड को ट्रंप प्रशासन ने एक रणनीतिक निगरानी निकाय के रूप में पेश किया है। यह बोर्ड ट्रंप की 20 सूत्रीय योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद गाजा को मलबे से निकालकर विकास के रास्ते पर ले जाना है।

वैध शासन बहाल करेगा

बोर्ड के घोषणापत्र में साफ लिखा है कि यह एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय संगठन होगा जो संघर्ष वाले क्षेत्रों में वैध शासन बहाल करेगा। ट्रंप का मानना है कि पुरानी संस्थाएं फेल हो चुकी हैं, इसलिए अब 'कॉमन सेंस' और साहसिक फैसलों की जरूरत है। इस बोर्ड की ताकत का अंदाजा इसके सदस्यों से लगाया जा सकता है। इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से लेकर ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा तक शामिल हैं।

दोस्ती या सिद्धांतों पर?

जानकारों का मानना है कि यह बोर्ड सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र के समानांतर एक नई वैश्विक व्यवस्था खड़ा करने की कोशिश हो सकती है। इस पूरे घटनाक्रम में भारत की भूमिका सबसे रहस्यमयी और महत्वपूर्ण बनी हुई है। ट्रंप ने पीएम मोदी को भी न्योता भेजा था, लेकिन भारत ने फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की नीति अपनाई है। इस वक्त नई दिल्ली के गलियारों में मंथन का दौर जारी है। सरकारी सूत्रों की मानें तो भारत किसी भी ऐसे दबाव में नहीं आना चाहता जो भविष्य में टिक न पाएं।

दुनिया दो गुटों में बंटी

भारत का रुख हमेशा से साफ रहा है तुरंत सीजफायर और दो-राष्ट्र समाधान। भारत चाहता है कि इजरायल और फलस्तीन दोनों अपनी सीमाओं में सुरक्षित रहें। हालांकि पाकिस्तान, यूएई और सऊदी अरब जैसे देश इस बोर्ड में शामिल हो चुके हैं, भारत अभी भी इसके हर पहलू को तौल रहा है। ट्रंप के दांव ने दुनिया को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक तरफ अर्जेंटीना, मिस्र, जॉर्डन और पाकिस्तान जैसे देश बोर्ड का हिस्सा बन चुके हैं। नॉर्वे, स्वीडन और फ्रांस जैसे देश हैं जिन्होंने इससे दूरी बना ली है।

भारत का जवाब नहीं

वहीं रूस, इटली और सिंगापुर जैसे देशों ने भारत की तरह ही अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। इस पहल को ट्रंप ने दुनिया के लिए एक अनोखी सौगात कहा है, लेकिन बिना प्रमुख शक्तियों के समर्थन के 'शांति बोर्ड' कितना प्रभावी होगा, यह कहना मुश्किल है। 'ट्रंप कार्ड' गाजा की तस्वीर बदलेगा या महज एक राजनीतिक स्टंट बनकर रह जाएगा, इसका फैसला आने वाले वक्त में भारत जैसे देशों के रुख से तय होगा।

Prashant Vinay Dixit
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Prashant Vinay Dixit

Prashant Vinay Dixit is a former Reporter at Newstrack.com.

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