छठ पूजा में सूपा चुनने में भूलकर भी न करें ये गलती! जानें बांस और पीतल में से कौन सा होता है सबसे शुभ

Chhath Puja 2025: छठ महापर्व सूर्य उपासना का पवित्र पर्व है, जिसमें श्रद्धालु उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख की कामना करते हैं।

Akriti Pandey
Published on: 26 Oct 2025 10:55 AM IST (Updated on: 26 Oct 2025 10:56 AM IST)
Chhath Puja 2025
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Chhath Puja 2025

Chhath Puja 2025: छठ महापर्व भारत के बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल के तराई क्षेत्रों में अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है। यह पर्व सूर्य देवता और छठी मैया की आराधना को समर्पित है। इस पर्व की विशेषता यह है कि इसमें उगते और अस्ताचलगामी सूर्य दोनों को अर्घ्य दिया जाता है, जो जीवन के संतुलन, ऊर्जा और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।

छठ महापर्व की परंपरा और उपवास

छठ पर्व चार दिनों तक चलता है और इसकी शुरुआत “नहाय-खाय” से होती है। इस दिन व्रति (उपवासी) शुद्ध आहार ग्रहण करते हैं और घर में पवित्रता बनाए रखते हैं। दूसरे दिन “खरना” मनाया जाता है, जिसमें पूरे दिन उपवास रखकर शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर सूर्य देव को अर्पित किया जाता है। इसके बाद व्रति 36 घंटे का निर्जला उपवास रखते हैं। तीसरे दिन सूर्यास्त के समय “अस्ताचलगामी सूर्य” को अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन “उदीयमान सूर्य” को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाता है।

सूपा का धार्मिक महत्व

छठ पूजा में “सूपा” का विशेष स्थान है। सूपा का उपयोग अर्घ्य देने और पूजा सामग्री रखने के लिए किया जाता है। यह न केवल एक पूजन सामग्री है, बल्कि श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक भी है। परंपरागत रूप से सूपा दो प्रकार के होते हैं -बांस के सूपा और पीतल के सूपा।

बांस का सूपा शुद्धता और आयु का प्रतीक

बांस को भारतीय संस्कृति में पवित्र और शुभ माना गया है। यह दीर्घायु, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक है। छठ पूजा में बांस के सूपा का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से शुद्ध होता है। मान्यता है कि बांस के सूपा से सूर्य देव को अर्घ्य देने से संतान की आयु लंबी होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

पीतल का सूपा समृद्धि और भक्ति का प्रतीक

पीतल का सूपा भी पूजा में महत्वपूर्ण माना जाता है। पीतल का सुनहरा रंग सूर्य देव के तेज और ऊर्जा का प्रतीक है। माना जाता है कि पीतल के सूपा में रखे गए फल और प्रसाद को सूर्य देव को अर्पित करने से घर में सुख, सौभाग्य और धन की वृद्धि होती है। यह सूपा भक्ति, श्रद्धा और समृद्धि का द्योतक है।

कौन सा सूपा अधिक शुभ है?

दोनों ही प्रकार के सूपे शुभ माने जाते हैं। बांस का सूपा शुद्धता और स्थिरता का प्रतीक है, जबकि पीतल का सूपा समृद्धि और श्रद्धा का। परंपरागत रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बांस का सूपा अधिक प्रचलित है, वहीं शहरी परिवारों में पीतल के सूपा का प्रयोग बढ़ा है। दोनों ही का उपयोग सूर्य देव की पूजा में समान रूप से शुभ फलदायी माना गया है।

छठ महापर्व की उत्पत्ति और इतिहास

छठ महापर्व का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। माना जाता है कि दानवीर कर्ण सूर्य देव के परम भक्त थे, जिन्होंने जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया था। इसी परंपरा से छठ पूजा की शुरुआत मानी जाती है। लोककथाओं में यह भी वर्णित है कि भगवान राम और माता सीता ने लंका विजय के बाद अयोध्या लौटकर सूर्य देव की पूजा की थी।

छठ का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व

छठ केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि का पर्व भी है। 36 घंटे का निर्जला उपवास आत्मसंयम, अनुशासन और शुद्धता का प्रतीक है। इस दौरान व्रति न केवल शारीरिक शुद्धता बनाए रखते हैं, बल्कि मन, वचन और कर्म से भी पवित्र रहते हैं।सूर्य देव की उपासना के माध्यम से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की जाती है। यह पर्व मानव और प्रकृति के गहरे संबंध का संदेश देता है कि जब हम प्रकृति का आदर करते हैं, तो जीवन में प्रकाश, संतुलन और सौभाग्य अपने आप बढ़ते हैं।

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Akriti Pandey is a Education & job Desk Content Writer at Newstrack.com.

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