पितृ दोष कितनी पीढ़ियों तक रहता है? झेलनी पड़ती हैं ये समस्याएं, इस तरह करें उपाय

Pitru Dosha: पितृ दोष से जूझ रहे लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि आखिर कितनी पीढ़ी तक पितृ दोष रहता है।

Shishumanjali kharwar
Published on: 6 Sept 2025 4:46 PM IST (Updated on: 6 Sept 2025 7:49 PM IST)
Pitru Paksha 2025
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Pitru Dosha: पितृ पक्ष की शुरूआत सात सिंतबर (रविवार) से हो रही है और समापन 21 सितंबर को होगा। पितृ पक्ष के दौरान तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। पितृ पक्ष के दौरान तर्पण और पिंडदान करने से पितरों की कृपा बनी रहती है। कई लोग पितृ दोष को खत्म करने के लिए भी पिंडदान करते हैं। लेकिन पितृ दोष से जूझ रहे लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि आखिर कितनी पीढ़ी तक पितृ दोष रहता है। इसके साथ ही कितनी पीढ़ियों तक पितरों का श्राद्ध करना चाहिए।

कितनी पीढ़ियों तक रहता है पितृ दोष

हिंदू धर्म मान्यताओं के अनुसार पितृ दोष का असर एक, दो, तीन नहीं बल्कि सात पीढ़ियों तक रहता है। दरअसल पितृ दोष एक तरह का ऋण माना जाता है जोकि कर्मों से जुड़ा हुआ होता है। अगर कोई यह ऋण नहीं चुका पाता है तो फिर उसकी आने वाली पीढ़ी को यह पितृ दोष लगता है। पितृ ऋण कई तरह के होते हैं जिनमें पितृ ऋण, स्वयं का ऋण, मातृ ऋण, पत्नी ऋण, पूर्वजों का ऋण, पुत्री ऋण, जालिमाना ऋण और संबंधी का ऋण शामिल है। इन सभी ऋणों के परिणाम भी अलग-अलग होता है।

पितृ दोष के चलते परिवार में होती हैं ये दिक्कतें

किसी भी व्यक्ति के कर्मों के आधार पर पितृ दोष लगता है और यह दोष केवल उसे ही नहीं बल्कि कई पीढ़ियों तक प्रभावित करता है। पितृ दोष के चलते परिवार में अक्सर लड़ाई-झगड़े होते रहते हैं और क्लेश का माहौल रहता है। दोष के चलते जातक को संतान की हानि होती है। यही नहीं संतान प्राप्ति में बाधा, विवाह में देरी, सुख-संपन्नता में कमी, पैसा की बरकत न होने जैसी दिक्कतें सामने आती हैं। इसके साथ ही जिस घर में पाप कर्म होते हैं। उनसे भी पितृ नाराज हो जाते है। पितृदोष के कारण जातक को सम्मान और पद हानि भी उठानी पड़ती है।

पितृ दोष दूर करने के उपाय

पितृ दोष को दूर करने के लिए पितृ पक्ष के दौरान तर्पण और पिंडदान करना चाहिए। हर जातक को तीन पीढ़ियों तक पितरों का श्राद्ध करना चाहिए। जिनमें पिता, दादा और परदादा शामिल होते हैं। पितृ पक्ष के दौरान पितरों को तर्पण, दान, ब्राह्मण भोज कराने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।

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Shishumanjali kharwar

मीडिया क्षेत्र में 12 साल से ज्यादा कार्य करने का अनुभव। इस दौरान विभिन्न अखबारों में उप संपादक और एक न्यूज पोर्टल में कंटेंट राइटर के पद पर कार्य किया। वर्तमान में प्रतिष्ठित न्यूज पोर्टल ‘न्यूजट्रैक’ में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं।

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