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ना तेजस्वी ना नीतीश...बिहार में CM की रेस में कौन आगे? ताजा सर्वे ने बढ़ाई NDA की टेंशन
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले आए ताजा सर्वे में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। जेवीसी पोल के मुताबिक तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे हैं, जबकि नीतीश कुमार पीछे रह गए हैं। एनडीए को सीटों में बढ़त, लेकिन महागठबंधन भी टक्कर में।
Bihar election survey 2025: बिहार विधानसभा चुनाव का घमासान अब निर्णायक मोड़ पर आ चुका है। हर बीतते दिन के साथ सियासी तपिश बढ़ती जा रही है, और इसी माहौल में आए ताजा ओपिनियन पोल के नतीजे ने बिहार की राजनीति में जबरदस्त हलचल मचा दी है। ये सर्वे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सीएम कैंडिडेट तेजस्वी यादव के लिए किसी 'गुड न्यूज़' से कम नहीं हैं। जारी हुए जेवीसी पोल के नतीजों के अनुसार, तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे पसंदीदा नेता बनकर उभरे हैं और उन्होंने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी, एनडीए के नेता और मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, को पीछे छोड़ दिया है। इस सर्वे में युवा तुर्कों चिराग पासवान और प्रशांत किशोर ने भी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है, जिससे बिहार की चुनावी तस्वीर अब त्रिकोणीय संघर्ष की ओर इशारा कर रही है।
सीएम पद की कुर्सी पर 'तेजस्वी' की धमक: आंकड़ों का गणित
टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, जेवीसी पोल द्वारा 23 से 30 अक्टूबर के बीच किए गए इस सर्वे में 32,657 लोगों से सीधे इंटरव्यू और फोन के जरिए उनकी राय ली गई। इन नतीजों में सबसे बड़ा उलटफेर मुख्यमंत्री की पसंद को लेकर दिखा:
तेजस्वी यादव (आरजेडी, महागठबंधन): उन्हें सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में 33 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया है।
नीतीश कुमार (जेडीयू, एनडीए): मौजूदा मुख्यमंत्री को 29 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला है, जिससे वह दूसरे स्थान पर खिसक गए हैं।
इस सर्वे में सिर्फ दो प्रमुख चेहरे ही नहीं, बल्कि कई अन्य नेताओं ने भी अपनी जगह बनाई है। पहली बार बिहार के चुनावी मैदान में उतरी जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर और लोजपा (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान दोनों ही 10-10 प्रतिशत अंक हासिल करके संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर हैं। वहीं, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को भी इस सर्वे में 9 प्रतिशत लोगों ने अपना पसंदीदा सीएम कैंडिडेट माना है। 5 प्रतिशत लोगों का मानना है कि महागठबंधन से कोई अन्य और 4 प्रतिशत का मानना है कि भाजपा से कोई और सीएम बन सकता है। ये आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि बिहार का वोटर अब सिर्फ दो ध्रुवों तक सीमित नहीं है।
सीटों के महासंग्राम में 'नीतीश का एनडीए' आगे: बहुमत से दूर महागठबंधन
सीएम पद के लिए तेजस्वी को बढ़त मिलने के बावजूद, जेवीसी के इस ओपिनियन पोल में सीटों के महासंग्राम में एनडीए को थोड़ी बढ़त मिलती हुई दिखाई गई है। सर्वे के अनुसार, एनडीए को 120 से 140 सीटें मिलने का अनुमान है, जो बहुमत के जादुई आंकड़े (122) के काफी करीब है। वहीं, तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन को 93 से 112 सीटों पर सिमटते हुए दिखाया गया है, जिसका मतलब है कि वे बहुमत के आंकड़े से कुछ दूर रह सकते हैं। इस सर्वे ने यह भी स्पष्ट किया है कि एनडीए के भीतर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। भाजपा को 70 से 81 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि जेडीयू 42 से 48 सीटें ला सकती है। चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास), जो 29 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, उसे भी 5 से 7 सीटें मिलने का अनुमान है।
महागठबंधन का प्रदर्शन: आरजेडी मजबूत, कांग्रेस कमजोर
महागठबंधन खेमे की बात करें तो सीटों के लिहाज से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का प्रदर्शन मजबूत दिख रहा है। 143 सीटों पर लड़ रही आरजेडी 69 से 78 सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है। यह आंकड़ा उन्हें महागठबंधन में सबसे बड़े दल के रूप में स्थापित करेगा। हालांकि, महागठबंधन की सहयोगी कांग्रेस पार्टी के लिए यह सर्वे अच्छी खबर नहीं लाया है। अनुमान है कि कांग्रेस का प्रदर्शन पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में और खराब रह सकता है। उसे केवल 9 से 17 सीटें मिलने का ही अनुमान है।
यह ओपिनियन पोल स्पष्ट करता है कि बिहार में सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) का सामना कर रहे नीतीश कुमार भले ही सीएम पद की रेस में पिछड़े हों, लेकिन सीटों के समीकरण में एनडीए अब भी एक मजबूत स्थिति में है। वहीं, तेजस्वी यादव की लोकप्रियता उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए शीर्ष पर रखती है, लेकिन उनकी पार्टी को गठबंधन के सहयोगियों से उतना मजबूत समर्थन नहीं मिल रहा है। बिहार की जनता ने इस बार एक त्रिशंकु विधानसभा के संकेत दिए हैं, जहां चिराग पासवान और प्रशांत किशोर जैसे युवा खिलाड़ी किंग मेकर की भूमिका में आ सकते हैं।


