क्या हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस सस्ता होने से मिडिल क्लास को राहत मिलेगी?

GST 2025 में हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर टैक्स छूट की चर्चा, जानिए मिडिल क्लास पर असर।

Sonal Girhepunje
Published on: 3 Sept 2025 5:24 PM IST
क्या हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस सस्ता होने से मिडिल क्लास को राहत मिलेगी?
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GST Meeting 2025: जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक आज, यानी 3 सितंबर 2025 से शुरू हो गई है। यह बैठक दो दिन चलेगी। इसमें मुख्य रूप से जीवन और हेल्थ इंश्योरेंस (Life & Health Insurance) पर जीएसटी से पूरी छूट देने पर चर्चा हो रही है। इसका मतलब है कि अगर यह फैसला पास हो गया, तो लोग बीमा खरीदते समय टैक्स नहीं देंगे। इससे बीमा प्रीमियम सस्ता हो सकता है। खासकर मिडिल क्लास परिवारों के लिए यह बड़ी राहत की खबर है। सरकार चाहती है कि यह छूट सीधे लोगों तक पहुंचे और सभी पॉलिसीधारक इसका फायदा उठा सकें।

जीएसटी छूट का मतलब क्या है?

अगर जीवन और हेल्थ इंश्योरेंस पर GST नहीं लगेगा, तो पॉलिसी लेने वाले को टैक्स नहीं देना पड़ेगा। इसका मतलब है कि बीमा प्रीमियम थोड़ा सस्ता हो सकता है। बिहार के उपमुख्यमंत्री और जीओएम के नेता सम्राट चौधरी ने कहा है कि पैनल सभी व्यक्तिगत जीवन और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम को GST से छूट देने के लिए सहमत है।

क्या कंपनियां वाकई छूट का फायदा देंगी?

केंद्र सरकार चाहती है कि यह छूट सीधे पॉलिसीधारकों तक पहुंचे। लेकिन कुछ राज्यों का कहना है कि यह तभी सही तरीके से काम करेगा जब बीमा कंपनियां सच में ग्राहक को सस्ता प्रीमियम दें। कुछ कंपनियां सिर्फ टैक्स की बचत अपने पास रख सकती हैं और ग्राहक वही पुराने प्रीमियम चुकाते रह सकते हैं।

एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?

दिनकर शर्मा (जोतवानी एसोसिएट्स) कहते हैं कि पहली नजर में यह छूट हमें फायदा देती लगती है क्योंकि प्रीमियम सस्ता दिखता है। लेकिन असल में कंपनियां जो पहले GST दे चुकी हैं, वह पैसा वापस नहीं ले सकती। इससे उनकी लागत बढ़ जाती है।

सीए मंदार तेलंग (बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसाइटी) कहते हैं कि पहले भी हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर कुछ छूट रहती आई है। यह छूट सिर्फ उस हिस्से पर टैक्स नहीं लगाने के लिए है जो जोखिम (risk) के लिए है। बचत या निवेश वाले हिस्से पर टैक्स अभी भी देना पड़ता है।

छूट होने के बावजूद कीमतें कम क्यों नहीं हो सकती?

सबसे बड़ी समस्या इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) न मिलना है। अगर कंपनियां ITC का लाभ नहीं ले पातीं, तो जो खर्च उन्होंने टेक्नॉलॉजी, कंसल्टिंग, या बिजली-पानी जैसी सेवाओं पर किया है, उसे वह वसूल नहीं कर सकतीं। दिनकर शर्मा के अनुसार, ऐसी स्थिति में कंपनियां यह खर्च ग्राहकों से वसूलने पर मजबूर हो सकती हैं। इसका सीधा असर यह होगा कि टैक्स में छूट का असली फायदा उपभोक्ता तक नहीं पहुंचेगा या बहुत कम ही रहेगा।

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Sonal Girhepunje is a Former Senior Writer at Newstrack.com.

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