Income Tax Rule: कंटेंट क्रिएटर्स, इंफ्लुएंसर्स के लिए इनकम टैक्स की नई कैटेगरी, रिटर्न भरने का तरीका बदला

Income Tax Rule: टैक्स रिटर्न भरने से पहले अपना एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (एआईएस) और फॉर्म 26एएस को जरूर चेक करें क्योंकि इसमें टीडीएस और कमाई से संबंधित समस्त जानकारियां होती हैं।

Newstrack Network
Published on: 28 July 2025 11:50 AM IST
Income Tax Rule: कंटेंट क्रिएटर्स, इंफ्लुएंसर्स के लिए इनकम टैक्स की नई कैटेगरी, रिटर्न भरने का तरीका बदला
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Income Tax Rule

Income Tax Rule: अगर आप एक कंटेंट क्रिएटर हैं, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हैं या गिग वर्कर हैं, तो आपको इनकम टैक्स के दायरे में अलग से लाने के लिए विभाग ने एक बड़ा बदलाव किया है। इस कैटेगरी के लोगों के लिए आयकर रिटर्न फॉर्म में एक खास प्रावधान किया गया है जिसकी वजह ऐसे लोगों को रिटर्न भरने में सहूलियत देना और उनकी कमाई पर नज़र रखना है। पिछले साल तक, कंटेंट क्रिएटर्स, इंफ्लुएंसर्स, गिग वर्कर्स की कमाई पर टैक्स के लिए अलग से कोई कैटेगरी नहीं थी।

क्या बदलाव किया गया है, जानते हैं इसके बारे में :

- इनकम टैक्स विभाग ने ये बदलाव वित्त वर्ष 2024-25 (एसेसमेंट ईयर 2025-26) के लिए किया है।

- सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को रिटर्न फॉर्म में अपने 'पेशे' की कैटेगरी में एक खास कोड - '16021,' भरना होगा।

ये कोड प्रोमोशन, एंडोर्समेंट, या डिजिटल कंटेंट क्रिएशन से हुई कमाई पर लागू होता है।

- ये बदलाव आईटीआर -3 और आईटीआर - 4 (सुगम) दोनों फार्मों में उपलब्ध है।

इन्फ्लुएंसर्स को अपनी कमाई के लेवल के हिसाब से आईटीआर-3 या आईटीआर-4 के बीच चयन करना चाहिए।

- आईटीआर-3 फॉर्म उन लोगों के लिए है, जिनकी कमाई सालाना 50 लाख से ज्यादा और कई स्रोतों से भी होती है।

- आईटीआर-4 फॉर्म उन लोगों के लिए है जिनकी कमाई सालाना 50 लाख रुपए तक है और जो प्रीज़म्पटिव टैक्स स्कीम का ऑप्शन चुनते हैं।

- प्रीज़म्पटिव टैक्स में अपनी अनुमानित कमाई का एक हिस्सा टैक्स के रूप में देना होता है। इसमें डिटेल में बहीखाता रखने की जरूरत नहीं पड़ती है।

- ध्यान रखें कि टैक्स रिटर्न भरने से पहले अपना एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (एआईएस) और फॉर्म 26एएस को जरूर चेक करें क्योंकि इसमें टीडीएस और कमाई से संबंधित समस्त जानकारियां होती हैं।

- जिनको नहीं पता उन्हें बता दें कि गिग वर्कर वो हैं जो कई तरह के काम फ्रीलांस की तरह करते हैं। जैसे कैब चलाने वाले, ऑनलाइन डिलीवरी, होम सर्विसेज देने वाले वगैरह।

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