Lenskart IPO 2025: निवेश से पहले जानिए, क्या ये IPO वाकई भरोसेमंद है?

लेन्सकार्ट सॉल्यूशंस लिमिटेड भारत की सबसे तेजी से बढ़ती चश्मा बनाने और बेचने वाली कंपनी है। इसने अपने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों तक आसानी से पहुंच बनाई है। अब कंपनी ₹7,278 करोड़ के अपने आईपीओ के ज़रिए और आगे बढ़ना चाहती है, नए स्टोर्स खोलने, टेक्नोलॉजी सुधारने और कारोबार बढ़ाने के लिए। इसी वजह से निवेशकों की नज़रें इस आईपीओ पर टिकी हुई हैं।

Sonal Girhepunje
Published on: 28 Oct 2025 10:05 AM IST
Lenskart IPO 2025: निवेश से पहले जानिए, क्या ये IPO वाकई भरोसेमंद है?
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Lenskart IPO GMP: भारत में इस समय जिस आईपीओ की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है Lenskart Solutions Limited (लेन्सकार्ट) का आईपीओ। लेन्सकार्ट एक जानी-मानी भारतीय चश्मा कंपनी है, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से अपने ग्राहकों को सेवाएं देती है। यह आईपीओ सिर्फ एक निवेश का मौका नहीं है, बल्कि यह बताता है कि कैसे एक भारतीय कंपनी अब वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना रही है। हम आसान भाषा में समझेंगे कि लेन्सकार्ट आईपीओ 2025 क्या है, इसका इश्यू साइज कितना है, प्राइस बैंड, GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम), लिस्टिंग तिथि और कंपनी का बिजनेस मॉडल क्या है। साथ ही यह भी जानेंगे कि निवेशकों के लिए यह आईपीओ कितना फायदेमंद साबित हो सकता है।

लेन्सकार्ट सॉल्यूशंस लिमिटेड

लेन्सकार्ट एक आधुनिक और टेक्नोलॉजी-आधारित आईवियर कंपनी है, जो चश्मे, कॉन्टैक्ट लेंस और सनग्लास जैसी प्रोडक्ट्स बनाती और बेचती है। कंपनी डिजाइन से लेकर निर्माण और खुदरा बिक्री तक का सारा काम खुद करती है। इससे उसे लागत पर नियंत्रण रखने और ग्राहकों को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद किफायती दामों पर देने में मदद मिलती है। भारत में लेन्सकार्ट को organised eyewear बाजार की अग्रणी कंपनियों में गिना जाता है और यह तेजी से बढ़ते रिटेल सेगमेंट में अपनी मजबूत पकड़ बना चुकी है।

आईपीओ की पूरी जानकारी

कंपनी लगभग ₹7,278.02 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है, जिसमें से ₹2,150 करोड़ फ्रेश इशू और ₹5,128.02 करोड़ ओएफएस (ऑफर फॉर सेल) के रूप में होंगे। प्रत्येक शेयर की कीमत ₹382 से ₹402 के बीच तय की गई है। एक लॉट में 37 शेयर होंगे, यानी ऊपरी बैंड पर न्यूनतम निवेश लगभग ₹14,874 का होगा। आवेदन की प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 4 नवंबर 2025 तक चलेगी। वहीं, अनुमान है कि कंपनी के शेयर 10 नवंबर 2025 को BSE और NSE पर लिस्ट होंगे। पात्र कर्मचारियों को प्रति शेयर ₹19 की विशेष छूट दी जाएगी। इन आँकड़ों के अनुसार, कंपनी का कुल मूल्यांकन लगभग ₹70,000 करोड़ तक पहुंचता है।

ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP)

आईपीओ खुलने से पहले ग्रे मार्केट में कंपनी के अनलिस्टेड शेयरों की खरीद-बिक्री शुरू हो जाती है। यह बाजार निवेशकों की शुरुआती रुचि और संभावित लिस्टिंग प्राइस का अंदाजा देता है। लेन्सकार्ट आईपीओ के मामले में, ग्रे मार्केट में इसका प्रीमियम लगभग ₹108 प्रति शेयर चल रहा है। यह अनुमान बताता है कि निवेशकों को लगभग 27% का संभावित लिस्टिंग गेन मिल सकता है। हालांकि ध्यान रखें, ग्रे मार्केट प्रीमियम सिर्फ एक संकेत होता है, असली लिस्टिंग प्राइस बाजार की मांग, निवेशक भावना और लिस्टिंग के दिन की स्थिति पर निर्भर करती है।

लेन्सकार्ट जुटाए गए पैसों से क्या करने वाली है?

लेन्सकार्ट आईपीओ से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल अपने विस्तार और तकनीकी विकास के लिए करने जा रही है। कंपनी इस फंड से नए कंपनी-स्वामित्व वाले स्टोर्स (CoCo मॉडल) खोलने की योजना बना रही है, जिससे ब्रांड की पहुंच और मजबूत होगी। इसके साथ ही, यह रकम किराया, लीज और अन्य संचालन से जुड़े खर्चों को पूरा करने में भी काम आएगी। कंपनी टेक्नोलॉजी अपग्रेड और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करके अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को और बेहतर बनाना चाहती है। इसके अलावा, ब्रांड मार्केटिंग, प्रचार गतिविधियों और संभावित अधिग्रहणों पर भी फोकस रहेगा। लेन्सकार्ट इस आईपीओ फंड का उपयोग अपने रिटेल नेटवर्क, तकनीकी क्षमता और ब्रांड सशक्तीकरण को बढ़ाने के लिए करेगी।

निवेश से पहले जानें ये अहम बातें

पॉजिटिव पहलुएँ

लेन्सकार्ट ने वित्त वर्ष 2025 में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का राजस्व और लाभ दोनों बढ़े हैं, जिससे यह भारतीय आईवियर बाजार की भरोसेमंद ब्रांड बन गई है। भारत में अभी भी बहुत बड़ा असंयोजित चश्मा बाजार है, जहाँ लेन्सकार्ट के पास तेजी से बढ़ने का बड़ा मौका है। कंपनी अपने ब्रांड की पहचान, बढ़ते ग्राहक वर्ग और बेहतर सेवाओं के दम पर इस बाजार में मजबूत स्थिति बना रही है। लेन्सकार्ट का ओम्नी-चैनल मॉडल यानी ऑनलाइन वेबसाइट, मोबाइल ऐप और ऑफलाइन स्टोर्स का मिश्रण, इसे हर तरह के ग्राहकों तक पहुँचने में मदद करता है। यही मॉडल कंपनी की तेजी से ग्रोथ का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।

जोखिम-कारक पहलुएँ

लेन्सकार्ट के सामने कुछ जोखिम और चुनौतियाँ भी हैं, जिन पर निवेशकों को ध्यान देना चाहिए। कंपनी का कच्चे माल का बड़ा हिस्सा चीन से आयात किया जाता है, जिससे सप्लाई चेन पर निर्भरता बढ़ जाती है और किसी भी वैश्विक व्यवधान की स्थिति में जोखिम बन सकता है। इसके अलावा, कंपनी का तेजी से विस्तार होने के कारण खर्चों में वृद्धि और मार्जिन पर दबाव आने की संभावना भी रहती है। बाजार में अब कई ऑनलाइन और ऑफलाइन आईवियर कंपनियाँ सक्रिय हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। साथ ही, लेन्सकार्ट आईपीओ का मूल्यांकन काफी ऊँचा माना जा रहा है। इसलिए निवेशकों को यह देखना होगा कि आने वाले समय में कंपनी की ग्रोथ इस ऊँचे मूल्यांकन को सही साबित कर पाती है या नहीं।

डिस्क्लेमर

GMP बदलता रहता है, इसलिए निवेश करने से पहले अपडेटेड GMP और अन्य डेटा देखें। यह केवल जानकारी देने के उद्देश्य से है। निवेश से पहले अपनी रिसर्च करें या वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।

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Sonal Girhepunje is a Former Senior Writer at Newstrack.com.

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