Public Sector Banks का दबदबा, 43% मार्केट शेयर के साथ Private Banks को पीछे छोड़ा

Public Sector Banks : वित्त वर्ष 2025 में पब्लिक सेक्टर बैंकों का होम लोन बाजार में हिस्सा बढ़कर 43% हो गया है, जो FY22 में 34% था।

Sonal Girhepunje
Published on: 12 July 2025 3:37 PM IST
Public Sector Banks
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Public Sector Banks (Image Credit-Social Media)

Public Sector Banks: भारत में होम लोन सेक्टर में बीते कुछ वर्षों में जबरदस्त बदलाव आया है। एक समय पर जहां प्राइवेट बैंक इस क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे, वहीं अब सरकारी बैंकों ने मजबूती से अपनी पकड़ बना ली है। वित्त वर्ष 2025 में पब्लिक सेक्टर बैंकों का होम लोन बाजार में हिस्सा बढ़कर 43% हो गया है, जो FY22 में 34% था। यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि उपभोक्ता व्यवहार और वित्तीय नीतियों के प्रभाव का भी संकेत है। किफायती ब्याज दरों और सरकारी योजनाओं के चलते लोग एक बार फिर सरकारी बैंकों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

सरकारी बैंकों की वापसी: आंकड़े जो कहानी कह रहे हैं

जून 2025 की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष में सरकारी बैंकों की कर्ज़ वृद्धि ने प्राइवेट बैंकों को पीछे छोड़ दिया है। बीते एक दशक में पहली बार PSU बैंकों ने यह बढ़त बनाई है। होम लोन जैसे खुदरा ऋण इस ग्रोथ का मुख्य कारण रहे हैं।

CRIF हाईमार्क की एक रिपोर्ट बताती है कि पिछले चार वर्षों में सरकारी बैंकों ने होम लोन के बाजार में लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। FY25 में PSBs की हिस्सेदारी 43% तक पहुंच गई, जबकि FY22 में यह केवल 34% थी। वहीं, प्राइवेट बैंकों की हिस्सेदारी गिरकर 29.8% रह गई, जो पहले 42.6% थी।

विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकारी योजनाओं और सस्ते ब्याज दरों ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं ने मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लिए घर खरीदना आसान बना दिया है, और सरकारी बैंक इन योजनाओं के प्रमुख माध्यम बने हैं।

HDFC का सफर और बाजार का बदलता परिदृश्य

एक समय था जब होम लोन क्षेत्र में HDFC जैसी संस्थाओं का दबदबा था। 1970 के दशक से ही HDFC ने भारत में होम ओनरशिप को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाई। दो साल पहले HDFC का अपने ही द्वारा स्थापित बैंक में विलय हुआ, जिससे होम लोन क्षेत्र में बड़ा पुनर्गठन हुआ।

हालांकि प्राइवेट बैंकों ने नई सदी में तेज़ी से इस क्षेत्र में प्रवेश किया, विशेष रूप से जब सेवा क्षेत्र में वेतन में वृद्धि और महानगरों में आवास निर्माण तेज़ हुआ। लेकिन इन सबके बावजूद, अब सरकारी बैंक एक बार फिर से लीडर बनकर उभरे हैं।

प्राइवेट बैंकों की गिरती पकड़

जहां सरकारी बैंक तेजी से आगे बढ़े हैं, वहीं प्राइवेट बैंकों की बाजार हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई है। FY22 में प्राइवेट बैंकों की हिस्सेदारी 42.6% थी, जो अब गिरकर 29.8% रह गई है। यह गिरावट बताती है कि लोग अब दोबारा सरकारी बैंकों की ओर रुख कर रहे हैं।

कारण स्पष्ट हैं - सरकारी बैंकों द्वारा दी जा रही कम ब्याज दरें, पारदर्शिता, और सरकार द्वारा समर्थित योजनाएं आम लोगों को आकर्षित कर रही हैं। साथ ही, रियल एस्टेट क्षेत्र में नए निर्माण और मांग में तेजी ने सरकारी बैंकों को आगे बढ़ने का मौका दिया।

निष्कर्ष: होम लोन का नया अध्याय

भारत में होम लोन बाजार अब एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। सरकारी बैंक न सिर्फ फिर से प्रासंगिक हो गए हैं, बल्कि अब उन्होंने अपना स्थान भी मजबूत कर लिया है। इस क्षेत्र में उनका 43% मार्केट शेयर यह दर्शाता है कि जनता की प्राथमिकता में बदलाव आया है।

जहां पहले लोग प्राइवेट बैंकों की ओर ज्यादा आकर्षित होते थे, अब वे सरकारी बैंकों को एक भरोसेमंद विकल्प मान रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह बदलाव और भी गहराई से देखने को मिल सकता है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत में आर्थिक और सामाजिक सोच में हो रहे बदलाव का संकेत है।

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Sonal Girhepunje

Sonal Girhepunje is a Former Senior Writer at Newstrack.com.

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