सिख समुदाय के खिलाफ टिप्पणी का मामला, इलाहाबाद हाई कोर्ट में राहुल गांधी की याचिका पर आदेश सुरक्षित

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की पुनरीक्षण याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया है।

Shivam Shrivastava
Published on: 3 Sept 2025 6:30 PM IST
सिख समुदाय के खिलाफ टिप्पणी का मामला, इलाहाबाद हाई कोर्ट में राहुल गांधी की याचिका पर आदेश सुरक्षित
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अर्जी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई बुधवार को चल रही है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ कर रही है। पिछले सोमवार को सुनवाई शुरू होने के बाद एक पीठ ने सुनवाई को स्थगित करते हुए 3 सितंबर की तारीख लगा दी गई थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका में कथित तौर पर सिखों पर टिप्पणी करने के मामले में वाराणसी के नागेश्वर मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए वाराणसी के एमपी-एमएलए कोर्ट में अर्जी दी है। जिसे सुनवाई के लिए कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इसके खिलाफ राहुल गांधी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राहुल गांधी ने आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दाखिल की है।

आपको बता दें कि यह मामला सितंबर 2024 का है। राहुल गांधी ने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर कहा था कि भारत में सिखों के लिए माहौल अच्छा नहीं है, क्या सिख पगड़ी पहन सकते हैं, कड़ा रख सकते हैं और गुरुद्वारे जा सकते हैं? उनके इस बयान को भड़काऊ और समाज में विभाजनकारी बताते हुए जमकर विरोध हुआ था।

सफलता न मिलने पर उन्होंने अदालत का रुख किया

वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा ने इस बयान के खिलाफ सारनाथ थाने में FIR दर्ज कराने का प्रयास किया लेकिन सफलता न मिलने पर उन्होंने अदालत का रुख किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट (द्वितीय) ने 28 नवंबर 2024 को यह कहते हुए वाद खारिज कर दिया कि मामला अमेरिका में दिए गए भाषण से जुड़ा हुआ है और यह उनके क्षेत्राधिकार से बाहर है। इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका दाखिल की जिसे 21 जुलाई 2025 को विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) की अदालत ने स्वीकार कर लिया।

बता दें कि अब इस फैसले के खिलाफ राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की है। दलील यह दी गई है कि वाराणसी अदालत का आदेश गलत, अवैध और अधिकार क्षेत्र से बाहर है। लिहाजा जब तक यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है तब वाराणसी अदालत के आदेश पर रोक लगाई जाए।

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Shivam Shrivastava

शिवम उत्तर प्रदेश के एक युवा और उभरते पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 4 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। वे राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और हाइपरलोकल खबरों की गहरी समझ रखते हैं और समसामयिक मुद्दों पर सटीक व प्रभावशाली रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी विशेष रुचि डाटा-ड्रिवन पत्रकारिता और विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग में है, जिससे उनकी खबरें अधिक तथ्यात्मक और विश्वसनीय बनती हैं। वे जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप को भी समझते हैं। लेखन और रिसर्च में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक सक्षम और जिम्मेदार पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।

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