भारत के आगे झुकी दुनिया, ट्रंप टैरिफ भी नहीं रोक सका रफ्तार, G-20 में भारत ने रच दिया इतिहास

मूडीज़ की नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा अगले दो वर्षों तक भारत रहेगा G-20 देशों में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था। ट्रंप टैरिफ भी नहीं रोक सका भारत की रफ्तार, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और घरेलू मांग ने बढ़ाई ताकत।

Harsh Srivastava
Published on: 13 Nov 2025 5:04 PM IST
भारत के आगे झुकी दुनिया, ट्रंप टैरिफ भी नहीं रोक सका रफ्तार, G-20 में भारत ने रच दिया इतिहास
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India fastest growing G20 economy: वैश्विक अर्थव्यवस्था भले ही कई तरह की चुनौतियों और मंदी की आशंकाओं से जूझ रही हो, लेकिन भारत की कहानी पूरी तरह से अलग है। दुनिया की प्रतिष्ठित क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज़ ने अपनी नई 'ग्लोबल मैक्रो आउटलुक 2026-27' रिपोर्ट जारी करके एक बड़ा ऐलान किया है। यह रिपोर्ट भारत के लिए एक तरह से उत्सव का कारण है, क्योंकि मूडीज़ ने साफ कर दिया है कि अगले दो वर्षों तक भारत G-20 देशों के समूह में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। एजेंसी के मुताबिक, भारत की विकास दर 6.5% रहने का दमदार अनुमान है, जो दुनिया के लिए एक बड़ी सीख है। यह गति इतनी मज़बूत है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ का तूफान भी भारत की इस रफ्तार को रोकने में कामयाब नहीं हो पाया है। मूडीज़ की इस भविष्यवाणी के पीछे कुछ ठोस कारण हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती को दर्शाते हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर और घरेलू मांग

मूडीज़ के विश्लेषण के अनुसार, भारत की यह मजबूती बेबुनियाद नहीं है। देश में हो रहा मज़बूत इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश एक प्रमुख चालक है, जिसने रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा दिया है। इसके साथ ही, बाजारों में ग्राहकों की अच्छी-खासी मांग (कंज्यूमर डिमांड) बनी हुई है। देश की बड़ी आबादी की यह मांग, बाहरी झटकों के सामने अर्थव्यवस्था को एक मजबूत आधार प्रदान करती है।

निर्यात में विविधीकरण की ताकत

रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण पहलू पर प्रकाश डाला गया है: भारतीय निर्यातकों की समझदारी। जब अमेरिका ने कुछ भारतीय उत्पादों पर 50% तक भारी टैरिफ लगाया, तब भारत के निर्यातकों ने समझदारी दिखाते हुए केवल अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत नए बाजार ढूंढ निकाले। भले ही अमेरिका को होने वाला निर्यात (शिपमेंट्स) 11.9% गिरा, लेकिन भारत का कुल निर्यात सितंबर में इसके बावजूद 6.75% बढ़ गया। इसका स्पष्ट मतलब है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब किसी एक देश या बाज़ार पर पहले जैसी निर्भर नहीं है—यह इसकी लचीलापन और विविधीकरण की सफलता है।

RBI की सधी हुई मौद्रिक नीति

इस तरक्की में देश की आंतरिक नीतियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं। मूडीज़ ने कहा है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति सधी हुई है। RBI ने महंगाई को काबू में रखा है, जिसने विकास के लिए एक स्थिर और अच्छा माहौल बनाया है। महंगाई नियंत्रण में रहने के कारण ही RBI ने अक्टूबर में भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया, जिससे बाजार में ग्रोथ के लिए अनुकूल माहौल बना रहा। इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से लगातार पूंजी का प्रवाह (कैपिटल इनफ्लो) होने से विदेशी निवेशकों का भारत पर भरोसा मजबूत हुआ है। यह पूंजी प्रवाह किसी भी बाहरी झटके को सहने में देश की मदद करता है और बाज़ार में नकदी (लिक्विडिटी) को बनाए रखता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि घरेलू मांग मज़बूत होते हुए भी, प्राइवेट सेक्टर अभी भी बड़े पैमाने पर नए निवेश करने से थोड़ा झिझक रहा है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था का धीमा हाल

जहां भारत 6.5% की रफ्तार से दौड़ रहा है, वहीं बाकी दुनिया की रफ़्तार सुस्त रहने का अनुमान है। मूडीज़ का अनुमान है कि 2026-27 में ग्लोबल GDP ग्रोथ लगभग 2.5% के आसपास रहेगी।

उभरते बाजार: भारत जैसे उभरते बाजार 4% की मजबूत रफ्तार दिखाएंगे।

विकसित देश (Advanced Economies): ये देश केवल 1.5% की धीमी गति से बढ़ेंगे।

चीन की गति धीमी

चीन के लिए मूडीज़ का अनुमान है कि वह 2025 में 5% की ग्रोथ पा सकता है, लेकिन यह मुख्य रूप से सरकारी मदद और निर्यात पर आधारित है। देश के अंदर मांग कमजोर है और निवेश घट रहा है। मूडीज़ का अनुमान है कि 2027 तक चीन की ग्रोथ धीमी होकर 4.2% रह जाएगी, जो भारत की निरंतर बढ़त को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। भारत की यह रफ्तार बताती है कि यह अब वैश्विक चुनौतियों से अप्रभावित रहने वाली एक ताकतवर अर्थव्यवस्था बन चुकी है।

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Hi! I am Harsh Srivastava, currently working as a Content Writer and News Coordinator at Newstrack. I oversee content planning, coordination, and contribute with in-depth articles and news features, especially focusing on politics and crime. I started my journey in journalism in 2023 and have worked with leading publications such as Hindustan, Times of India, and India News, gaining experience across cities including Varanasi, Delhi and Lucknow. My work revolves around curating timely news, in- depth research, and delivering engaging content to keep readers informed and connected.

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