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IPS Y पूरन केस की अब सुलझेगी गुत्थी, दिग्गज अधिकारीयों की SIT टीम ने संभाली कमान, IG पुष्पेंद्र करेंगे लीड
हरियाणा में आईपीएस वाई पूरन कुमार की कथित आत्महत्या मामले में SIT का गठन किया गया है। IG पुष्पेंद्र कुमार की अगुवाई में टीम 14 वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR की निष्पक्ष और गहन जांच करेगी।
IPS Y Puran case update: हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की कथित खुदकुशी मामले ने हरियाणा पुलिस और प्रशासन में जबरदस्त भूचाल ला दिया है। इस संवेदनशील मामले की निष्पक्ष और त्वरित जाँच के लिए चंडीगढ़ पुलिस ने आनन-फानन में एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन कर दिया है। चंडीगढ़ के आईजी पुष्पेंद्र कुमार को इस SIT का प्रमुख नियुक्त किया गया है, जिसकी टीम में कुल 6 सदस्य होंगे। इससे पहले, दिवंगत आईपीएस अधिकारी के सुसाइड नोट के आधार पर हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) शत्रुजीत कपूर और रोहतक के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नरेंद्र बिजारणिया सहित 14 वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ गुरुवार देर रात प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। यह पहली बार है जब हरियाणा में DGP सहित इतने बड़े अधिकारियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
निष्पक्ष जांच की मांग पर त्वरित कार्रवाई
चंडीगढ़ पुलिस ने यह त्वरित कदम तब उठाया, जब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के प्रतिनिधियों ने चंडीगढ़ पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में पदस्थापित रेजिडेंट कमिश्नर डी. सुरेश की अगुवाई में इन प्रतिनिधियों ने चंडीगढ़ पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मिलकर मामले की निष्पक्ष और एक निश्चित समय सीमा के अंदर जाँच की पुरजोर मांग की। इस प्रतिनिधिमंडल के मुलाकात के कुछ ही घंटों बाद चंडीगढ़ पुलिस ने तुरंत SIT गठन का ऐलान कर दिया, जो प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है। डीजीपी सागर प्रीत हुड्डा ने प्रतिनिधिमंडल को निष्पक्ष जाँच और एसआईटी के तत्काल गठन का आश्वासन दिया था।
SIT टीम में कौन-कौन शामिल?
डीजीपी सागर प्रीत हुड्डा द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, चंडीगढ़ के सेक्टर 11 (पश्चिम) पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज FIR संख्या 156/2025 की जाँच के लिए यह SIT बनाई गई है।
आईजी पुष्पेंद्र कुमार (SIT प्रमुख)
एसएसपी (यूटी) कंवरदीप कौर, एसपी (सिटी) केएम प्रियंका, डीएसपी (यातायात) चरणजीत सिंह विर्क, एसडीपीओ (दक्षिण) गुरजीत कौर और इंस्पेक्टर जयवीर सिंह राणा (एसएचओ, पीएस -11)। ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल टीम को साक्ष्य संकलन, गवाहों की जाँच, विशेषज्ञों की राय और कानूनी सलाह सहित सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए त्वरित, निष्पक्ष और गहन जाँच करने के निर्देश दिए गए हैं।
उत्पीड़न और असंतोष का सुसाइड नोट
2001 बैच के आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार ने मंगलवार को कथित तौर पर चंडीगढ़ स्थित अपने घर में आत्महत्या कर ली थी। चंडीगढ़ पुलिस ने आईपीएस अफसर की सुसाइड नोट के आधार पर सेक्टर-11 थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 3(5) और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम की धारा 3 (1) (आर) के तहत प्राथमिकी क्रमांक 156 दर्ज की है। सुसाइड नोट में नौकरी के तनाव, मानसिक उत्पीड़न और असंतोष का भी जिक्र किया गया है। इसमें कई वरिष्ठ अधिकारियों पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पूरन कुमार के परिजनों ने शुरुआत में 15 अधिकारियों पर आरोप लगाए थे, जिनमें मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी का नाम भी शामिल था, लेकिन पुलिस ने सुसाइड नोट में उल्लिखित 14 अधिकारियों के नाम ही प्राथमिकी में शामिल किए हैं। यह घटना दर्शाती है कि पुलिस और प्रशासनिक सेवाओं के शीर्ष पदों पर भी मानसिक दबाव, उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव का साया किस हद तक मौजूद है, जिसकी निष्पक्ष जाँच के लिए अब पुलिस पर भारी दबाव है।


