स्मृति शेष: प्रमिला ताई मेढे – मातृशक्ति ही राष्ट्र शक्ति

Pramila Tai Medhe: श्रद्धेय प्रमिला ताई मेढे जी इस संगठन की चतुर्थ प्रमुख संचालिका रहीं, जिन्होंने मातृशक्ति को जागरूक, सशक्त और संगठित करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।

Archana Tiwari
Published on: 1 Aug 2025 1:33 PM IST (Updated on: 4 Aug 2025 3:35 PM IST)
Pramila Tai Medhe
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Pramila Tai Medhe

Pramila Tai Medhe: स्त्री ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। इसी ध्येयवाक्य के साथ लगभग 90 वर्षों से कार्यरत राष्ट्र सेविका समिति भारत की महिलाओं के सर्वांगीण विकास हेतु निरंतर समर्पित है। श्रद्धेय प्रमिला ताई मेढे जी इस संगठन की चतुर्थ प्रमुख संचालिका रहीं, जिन्होंने मातृशक्ति को जागरूक, सशक्त और संगठित करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।

राष्ट्र सेवा में समर्पित जीवन

जिस प्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्र सेवा हेतु पुरुषों के व्यक्तित्व निर्माण में लगा है, उसी प्रकार राष्ट्र सेविका समिति स्त्रियों के लिए एक प्रेरणादायी मंच बन चुकी है। इसके माध्यम से देशभर की महिलाओं को नई दिशा और ऊर्जा प्राप्त हो रही है। समिति के कार्यों से स्त्रियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक चेतना का विस्तार हुआ है।

अंतिम विदाई

गुरुवार, 31 जुलाई को प्रातः 9:05 बजे, नागपुर स्थित देवी अहिल्या मंदिर में वृद्धावस्था के कारण ताई जी का देहावसान हुआ। 97 वर्षीय प्रमिला ताई का जीवन देशभक्ति, मातृत्व, साधना, तत्परता और राष्ट्रनिष्ठा का अनुपम उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।

विविध भूमिकाओं में उत्कृष्ट योगदान

ताई जी ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण पदों का निर्वहन किया:

केंद्र कार्यालय प्रमुख

अखिल भारतीय प्रमुख कार्यवाहिका

विश्व विभाग प्रमुख

सह प्रमुख संचालिका (2003–2006)

प्रमुख संचालिका (2006–2012)

उन्होंने भारत ही नहीं, श्रीलंका, केन्या, यूके, अमेरिका आदि देशों में भी प्रवास कर सेविकाओं के लिए कार्य किया। न्यू जर्सी द्वारा उन्हें मानद नागरिकता से सम्मानित किया गया। वर्ष 2020 में SNDT विश्वविद्यालय ने उन्हें D.Litt. की मानद उपाधि प्रदान की।

विशेष उपलब्धियाँ

मौसीजी की जन्मशताब्दी वर्ष (2003–04) के अवसर पर उन्होंने 28,000 किलोमीटर का प्रवास किया और 108 स्थानों पर चित्र प्रदर्शनी आयोजित की।

सरस्वती सदन, केन्या में सेविकाओं के कार्यालय का उद्घाटन उनके करकमलों से हुआ।

“वयं विश्वशान्त्यै चिरं यत्नशीलाः” नामक पुस्तक में उन्होंने अपने विदेश प्रवास के अनुभव साझा किए।

नेतृत्व की शैली

ताई जी का कार्यशैली में अद्भुत संयोजन था – अनुशासन, सादगी, परिश्रम और सतर्कता। उनके जीवन का हर कार्य अत्यंत व्यवस्थित होता – चाहे साड़ी पहनना हो या भाषण देना। सोशल मीडिया के माध्यम से वे सदैव अद्यतन रहतीं और हर पीढ़ी से संवाद करती थीं।

उनकी स्मरण शक्ति अत्यंत तीव्र थी। संस्कृत श्लोकों, गीतों, भाषणों के उदाहरण उनके बौद्धिक व्याख्यानों में सहजता से आते। वे शिक्षाविद, संगठनकर्ता और प्रेरक वक्ता थीं।

युवा पीढ़ी के लिए आदर्श

ताई जी का जीवन युवाओं के लिए एक जीवंत पाठशाला था। वे हमेशा पूछतीं – “क्या नया पढ़ा?”, “क्या नया लिखा?”, “अनुभव साझा किया?” उनकी संवाद शैली, नेतृत्व क्षमता और आत्मीयता लोगों को जोड़ती और प्रेरित करती।

उनके लिए उपयुक्त पंक्तियाँ:

“चले निरंतर चिंतन मंथन,

चले निरंतर अथक प्रयास,

भारत मां की सेवा में हो,

अपने जीवन का हर श्वास,

मन में परम विजय विश्वास!”

समापन श्रद्धांजलि

प्रमिला ताई मेढे जी के महाप्रयाण पर हम उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनका जीवन स्त्री सशक्तिकरण, सेवा और राष्ट्र प्रेम का सशक्त प्रतीक है।

लेखिका परिचय

डॉ. अर्चना तिवारी – प्रख्यात शिक्षाविद्, विचारक एवं राष्ट्र सेविका समिति से दीर्घकालीन रूप से जुड़ी हुई हैं।

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