Dussehra Special 2025: विजयादशमी, आध्यात्मिक एवं दार्शनिक पक्ष

Dussehra 2025 Special Story: विजयादशमी केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह जीवन और साधना की गहराई से जुड़ा हुआ पर्व है। इसका गूढ़ महत्व हमें आंतरिक और बाह्य विजय की शिक्षा देता है।

Dr. A K Panday
Published on: 1 Oct 2025 6:15 PM IST
Dussehra Special 2025: विजयादशमी, आध्यात्मिक एवं दार्शनिक पक्ष
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Dussehra 2025 Special Story: विजयादशमी केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह जीवन और साधना की गहराई से जुड़ा हुआ पर्व है। इसका गूढ़ महत्व हमें आंतरिक और बाह्य विजय की शिक्षा देता है।

१. आध्यात्मिक पक्ष

आत्मिक विजय का प्रतीक :- रावण, महिषासुर आदि राक्षस बाहरी प्रतीक हैं, परंतु वास्तव में वे काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और ईर्ष्या जैसे आंतरिक विकारों का द्योतक हैं। विजयादशमी का संदेश है कि जब मनुष्य साधना, संयम और सत्कर्म से इन विकारों पर विजय पा लेता है, तभी वास्तविक दशहरा मनता है।

दुर्गा पूजा का फल : नवरात्रि के नौ दिनों में आत्मा को साधना और शुद्धि की प्रक्रिया से गुज़ारा जाता है, और दशमी तिथि पर साधक को आंतरिक शक्ति और विजय का अनुभव होता है।

शक्ति और भक्ति का समन्वय :- यह पर्व बताता है कि आध्यात्मिक जीवन में भक्ति (श्रद्धा) और शक्ति (साहस व संकल्प) का संतुलन आवश्यक है।

२. दार्शनिक पक्ष

धर्म और अधर्म का संघर्ष :- जीवन निरंतर संघर्ष का नाम है—सत्य और असत्य, ज्ञान और अज्ञान, विवेक और अविवेक। विजयादशमी इस संघर्ष में सत्य और धर्म की अंतिम विजय का दर्शन कराती है।

कर्म और पुरुषार्थ का संदेश : भगवान राम ने भी केवल भाग्य या प्रार्थना से विजय नहीं पाई, बल्कि प्रयास, संगठन, पराक्रम और नीति से रावण का पराभव किया। यह दर्शाता है कि मनुष्य अपने कर्म और पुरुषार्थ से ही विजय प्राप्त कर सकता है।

सार्वभौमिक सन्देश : यह पर्व केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि दार्शनिक रूप से भी यह सिद्ध करता है कि जो शक्तियाँ समाज, संस्कृति और जीवन को बाधित करती हैं, उनका नाश निश्चित है और सतत् प्रगति मानव जीवन का स्वभाव है।

इस प्रकार विजयादशमी हमें यह स्मरण कराती है कि बाहरी उत्सव से भी बढ़कर यह आत्म-विजय, आत्म-संयम और धर्मनिष्ठ जीवन की ओर अग्रसर होने का अवसर है।

आप सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं ।

शुभम् भवतु ।

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