‘वनतारा’ में माधुरी: क्या अब सिर्फ प्राइवेट ज़ू ही बचे हैं पुनर्वास के लिए?

Madhuri in Vantara: माधुरी जो 36 वर्षीय मादा हथिनी है उसे कोल्हापुर के नंदनी जैन मठ से जबरन गुजरात के ‘वनतारा’ में स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया है।

Newstrack Network
Published on: 6 Aug 2025 8:03 PM IST
Madhuri in Vantara
X

Madhuri in Vantara (Image Credit-Social Media)

Madhuri in Vantara: हाथी कोई मशीन नहीं है जिसे पुनर्वास के नाम पर पैक करके कहीं से कहीं भेज दिया जाए और फिर से इस्तेमाल किया जाए। लेकिन ठीक यही हुआ कोल्हापुर के नंदिनी गाँव की 36 वर्षीय मंदिर हथिनी ‘माधुरी’ के साथ। एक ऐसी हथिनी जिसने कोल्हापुर में जैन मुनियों के मठ में तीन दशक से ज़्यादा समय बिताया। अदालतों में दायर एक याचिका से शुरू हुआ यह मामला अब एक राष्ट्रीय विवाद में तब्दील हो गया है, कोल्हापुर और कई अन्य जगहों पर हजारों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है, पैदल मार्च निकाला है, रिलायंस के बहिष्कार का ऐलान हो रहा है। ऐसे इस विवाद ने कई गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं कि भारत में मंदिर के हाथियों का भाग्य में कौन तय करता है?

माधुरी का रीलोकेशन- सही या गलत?

मामला तब शुरू हुआ जब बॉम्बे उच्च न्यायालय ने जुलाई 2025 में, माधुरी को कोल्हापुर के नंदनी जैन मठ से जबरन गुजरात के ‘वनतारा’ में स्थानांतरित करने का आदेश दिया। वनतारा एक पशु बचाव केंद्र है जिसे अंबानी परिवार द्वारा फंडिंग और ऑपरेट किया जाता है।

अदालत ने माधुरी को वनतारा इस आधार पर ट्रान्सफर करने का आदेश दिया कि एक समिति ने दावा किया था कि उस हथिनी का स्वास्थ्य गिर रहा है और उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ रही है। लेकिन लोकल लोग इस बात से इनकार करते हैं और उनका सवाल है कि न चिकित्सा इमरजेंसी जैसी स्थिति थी और न हथिनी के साथ दुर्व्यवहार जैसी बात थी और किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले स्थानीय प्रतिनिधित्व के साथ एक स्वतंत्र विशेषज्ञ पैनल क्यों नहीं बनाया गया? जैन मठ के ट्रस्टी आचार्य सुरेंद्रकीर्ति महाराज का साफ़ कहना है कि "यह हथिनी एक कानूनी आदेश की आड़ में हमसे चुराई गई थी। वह कोई केस फाइल नहीं है। वह एक जीवित प्राणी है जिसने हमारे साथ रहने का फैसला किया है।"

ये कोई पहला मामला नहीं

सच्चाई ये है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी हाथी को संदिग्ध बहाने से रीलोकेट किया गया हो। 2024 में राजस्थान के आमेर किले से हाथियों को वनतारा ले जाया गया था। इस साल की शुरुआत में, अरुणाचल प्रदेश के लकड़ी काटने वाले शिविरों से 20 हाथियों को रीलोकेट किया गया था। पशु अधिकार संगठनों का आरोप है कि सैकड़ों विदेशी प्रजाति के पशुओं को जामनगर स्थित वनतारा के 3,500 एकड़ के निजी परिसर में चुपचाप पहुँचाया गया है। आलोचकों का कहना है कि वनतारा एक धनाढ्य पार्क है, एक गेट से घिरा हुआ ऐसा आश्रयस्थल जो चिड़ियाघर का रूप लिए हुए है, जहाँ की सार्वजनिक जाँच दुष्कर है, और कानूनी खामियों के चलते जो दुर्लभ जानवरों से भरा हुआ है।

पशुओं के रीलोकेशन में एक पैटर्न देखा गया है – एनजीओ ने पशु दुर्व्यवहार का दावा करते हुए याचिका डाली, सरकारी अधिकारियों की समिति दूर से या किसी तीसरी पार्टी के जरिये उस पशु के स्वास्थ्य की समीक्षा करती है। अदालत रीलोकेशन का आदेश देती है और अक्सर सिर्फ एक ही जगह भेजने का – वनतारा में। ऐसे में सवाल उठते हैं कि क्या कोई और जगह नहीं है? किसी निजी चिड़ियाघर को ही बार-बार उपयुक्त क्यों माना जाता है? और सबसे महत्वपूर्ण बात ये कि पशुओं को मौके पर ही इलाज देने के बजाय बेहोशी की हालत में हज़ारों किलोमीटर दूर क्यों ले जाया जाता है?

गुस्से में लोग

माधुरी को इस तरह हटाये जाने से कोल्हापुर के लोगों में भारी आक्रोश है। 30,000 से ज़्यादा लोगों ने माधुरी की तस्वीरें लिए एक साइलेंट मार्च निकाला। हाथियों की मूर्तियों को गाँवों में घुमाया गया। ज़िले भर में बंद रखा गया। स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ़ एक हथिनी के लिए विरोध नहीं बल्कि एक सार्वजानिक शोक है। लोगों का कहना है कि माधुरी कोई चिड़ियाघर का जानवर नहीं थी। वह पवित्र अनुष्ठानों का हिस्सा थी। लोगों ने जियो और रिलायंस के बहिष्कार का ऐलान किया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पशु कल्याण के लिए काम करने वाला एनजीओ ‘पेटा’ बहुत पहले से माधुरी हथिनी के पीछे पड़ा था जब हर कोशिश के बाद उन्हें पता चला कि हम अपना हाथी नहीं भेजेंगे, तो उन्होंने बंदी और जंगली हाथियों के कल्याण और प्रबंधन के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) में शिकायत दर्ज कराई। इस उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) की स्थापना त्रिपुरा उच्च न्यायालय द्वारा की गई थी और बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे हाथियों के स्थानांतरण, पुनर्वास और समग्र कल्याण से संबंधित मुद्दों के समाधान क्ले लिए सम्पूर्ण भारत में अधिकार क्षेत्र प्रदान कर दिया था।

दिलचस्प बात यह है कि एचपीसी को पहले भी अन्य स्थानीय विकल्पों पर विचार किए बिना वनतारा में ही हाथियों के स्थानांतरण को अधिकृत करने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा है। मई 2024 में, वन्यजीव कार्यकर्ता रोहित चौधरी ने पूर्वोत्तर भारत से वनतारा तक हाथियों को लेजाने की अनुमति देने में एचपीसी की पारदर्शिता की कमी पर चिंता व्यक्त की थी। 5 मई, 2024 को, प्रतिमा नाम की एक घायल और प्रताड़ित हथिनी और उसके बछड़े को जामनगर जाते समय राज्य वन विभाग ने असम में हिरासत में ले लिया था। चौधरी ने सवाल किया था कि "एचपीसी ने उपचार के वैकल्पिक, स्थानीय विकल्पों पर विचार क्यों नहीं किया, चौधरी ने सवाल उठाया था कि “एचपीसी ने उपचार के लिए वैकल्पिक, स्थानीय विकल्पों पर विचार क्यों नहीं किया। चौधरी ने सवाल उठाया था कि एक अत्यधिक अस्वस्थ हथिनी, जो अभी भी अपने बच्चे को दूध पिला रही है, उसे भीषण गर्मी के मौसम में 3,000 किलोमीटर की कठिन यात्रा में क्यों भेजा गया?

अब लीपापोती

बहरहाल, अब जनता के आक्रोश को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार जगी है और कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार की अर्जी दी जायेगी ताकि माधुरी को वापस मठ में पहुंचाया जा सके। जनता के दबाव के बाद अब वनतारा ने कोल्हापुर में एक सैटेलाइट पुनर्वास केंद्र बनाने की पेशकश की है। ये भी कहा है कि कोर्ट जैसा कहेगा उसके अनुसार माधुरी को सकुशल वापस पहुंचा दिया जाएगा। लेकिन सवाल ये है कि अगर माधुरी की भलाई की चिंता हमेशा से थी तो पहले इस विकल्प पर विचार क्यों नहीं किया गया?

1 / 9
Your Score0/ 9
Newstrack Network
ABOUT THE AUTHOR

Newstrack Network

Newstrack is one of the most Trusted and Popular news portal of India. Remain updated and aware, only on Newstrack

Next Story