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‘योगी का खौफ’ बना कानून की ताकत! जेल के डर से रेप आरोपी ने पकड़ लिया पीड़िता का हाथ, बुलाया काजी....
UP Rape Case: अमरोहा में दुष्कर्म आरोपी ने जेल के डर से प्रेमिका से तुरंत निकाह किया, पंचायत में दोनों परिवारों ने सहमति दी।
UP Rape Case
UP Rape Case: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के डिडौली कोतवाली क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, दुष्कर्म के आरोपी प्रेमी ने जेल जाने के डर से पीड़ित युवती के साथ निकाह कर लिया। पंचायत में दोनों परिवारों की सहमति मिलने के बाद काजी बुलाकर उसी समय प्रेमी जोड़े का निकाह कराया गया। इसके बाद पीड़िता को ससुराल विदा किया गया। इस कदम के साथ ही पीड़िता ने आगे की कानूनी कार्रवाई से भी इनकार कर दिया।आरोपी ने जेल के डर से प्रेमिका
मामले का खुलासा और आरोप
मामला तब शुरू हुआ जब युवती ने शनिवार को अपने प्रेमी पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया। युवती ने यह भी दावा किया कि वह ढाई महीने की गर्भवती है। घटना तीन महीने पहले हुई थी, जब परिवार के लोग चेहलुम का जुलूस देखने गए थे और घर में 19 वर्षीय युवती अकेली थी। इसी दौरान गांव मूंढा इम्मा निवासी सानिब घर में घुस आया और शादी का झांसा देकर युवती के साथ दुष्कर्म किया।
गर्भावस्था के बाद खुला राज
दो महीने बाद युवती की तबीयत अचानक खराब हुई। पेट में दर्द की शिकायत पर परिजन उसे अस्पताल लेकर गए, जहां अल्ट्रासाउंड में ढाई महीने की गर्भावस्था की पुष्टि हुई। इसके बाद युवती ने अपने परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। पीड़िता के पिता और भाई ने आरोपी के घर जाकर शादी की बात रखी, लेकिन परिवार ने साफ इंकार किया और दोनों को बेइज्जत किया। इसके साथ ही पुलिस कार्रवाई पर जान से मारने की धमकी भी दी गई।
पुलिस की कार्रवाई और पंचायत निर्णय
पीड़िता ने कोतवाली में तहरीर देकर मामले में कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने सानिब, शाकिर, फिरोज और हसीबा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। आरोपी सानिब को गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही थी। इसी बीच रविवार को गांव में पंचायत का आयोजन किया गया और दोनों का निकाह करा दिया गया।
कानूनी कार्रवाई जारी
प्रभारी निरीक्षक हरीश वर्धन सिंह ने बताया कि दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली युवती ने आरोपी प्रेमी के साथ निकाह कर लिया है। पीड़िता के बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। इस घटना ने यह दिखाया कि समाज में पंचायतों के माध्यम से विवादों को सुलझाने की प्रथा आज भी प्रचलित है, हालांकि कानूनी सुरक्षा और न्याय की प्रक्रिया को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


