Baghpat News: खंडवारी टीले पर धातु गलन भट्टी के मिले प्रमाण, नया इतिहास लिखने की तैयारी

Baghpat News: बागपत के सिसाना गांव स्थित खंडवारी टीले पर धातु गलन भट्टी के मिले प्रमाण, इतिहासकारों ने महाभारत और प्री-महाभारत काल की सभ्यता से जोड़ा।

Paras Jain
Published on: 30 Oct 2025 9:54 PM IST
Evidence of metal smelting furnace found on Khandwari hill, preparing to write a new history
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खंडवारी टीले पर धातु गलन भट्टी के मिले प्रमाण, नया इतिहास लिखने की तैयारी (Photo- Newstrack)

Baghpat News: बागपत । खंडवारी टीला अपने अंदर इतिहास के वह गहरे राज छिपाए हुए हैं जिनसे इस क्षेत्र का नया इतिहास लिखा जाएगा। इतिहासकार दावा कर रहे हैं कि इस टीले पर बहु संस्कृति और सभ्यता का वास रहा है। महाभारत ही नहीं बल्कि प्री महाभारत काल के पुरावशेष भी इस टीले से प्राप्त हुए हैं जिस कारण इतिहासकार, शोधार्थी व पुराविद उत्साहित नजर आ रहे हैं।


दरअसल, बागपत के सिसाना गांव स्थित खंड़वारी में प्राचीन दीवार निकलने के बाद इतिहासकारों, पुराविदों में हलचल तेज हो चली है। पहले शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक डॉ अमित राय जैन यहां पहुँचे। उन्होंने यहां का जायजा लेते हुए साक्ष्य भी जुटाए और एक रिपोर्ट तैयार कर एएसआई के महानिदेशक को भी भेजी। इसके अगले ही रोज भारतीय पुरातत्व विभाग (एएसआई) की तीन सदस्य अधिकारियों की टीम टीले पातं पहुंच गई। दीवार में मिली ईंटों की नापतौल की गई।

वहां मौजूद मिट्टी और ईंटों के सैंपल लिए गए। इतिहासकार टीले से मिले साक्ष्यों को लेकर जितने अधिक उत्साहित नजर आ रहे हैं, उतना ही वे मजबूत दावा भी कर रहे हैं। इतिहासकार डॉ अमित राय जैन का कहना है कि यहां एक दो नहीं बल्कि बहु संस्कृति, सभ्यता का वास रहा है। महाभारतकाल, कुषाणकाल, मौर्यकाल के अलावा यहां प्री महाभारतकाल की संस्कृति मौजूद रही हैं। इस टीले पर मानव सभ्यता के प्रमाण पुष्ट हैं।

डॉ अमित राय जैन ने बताया कि महाभारत काल की जो पॉटरी यहां से मिली है वह बेहद खास है। इस काल की पॉटरी (मिट्टी के बर्तन) की मुख्य विशेषताएँ पेंटेड ग्रे वेयर (पीजीडब्ल्यू) है जो चित्रित ग्रे वेयर संस्कृति से संबंधित हैं। ये बर्तन अपनी विशिष्ट ग्रे (धूसर) रंगत और चिकनी सतह के लिए जाने जाते हैं, जिन पर अक्सर रेखाओं के पैटर्न या सरल ज्यामितीय डिज़ाइन बनाए जाते थे। पीजीडब्ल्यू पॉटरी के अलावा यहां से ओसीपी यानी ओकर कलर्ड पॉटरी) पॉटरी मिली हैं।


ये बर्तन आमतौर पर मिट्टी के बने होते थे और उन पर आकर्षक रेखाचित्र बने होते थे, जो इस काल की धातु निर्माण तकनीक (विशेषकर लोहे की) के साथ-साथ उसकी कलात्मक और तकनीकी विकास को भी दर्शाते हैं। प्री महाभारतकाल की सभ्यता के प्रमाण मिलना बेहद महत्वपूर्ण हैं।

धातु गलन भट्टी के मिल रहे प्रमाण

खंडवारी टीले पर एक और विशेष प्रमाण मिले हैं और हैं मेल्ट (पिंघला हुआ) धातु। इतिहासकार डॉ अमित राय जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि टीले पर धातु गलन भट्टी के पुष्ट प्रमाण मिल रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि यहां धातु गलन भट्टी मौजूद रही होगी। इस भट्टी के अलावा यहां से मेटल मेल्टिंग टूल बनाने के साक्ष्य मिल रहे हैं। यहां धातु के टुकड़े गलाकर टूल्स बनाये जाने का भी उस समय के लोग किया करते होंगे।


टीले की ऊपरी सतह से नीचे की ओर मेल्ट धातु की बड़ी परत साफ तौर दिखाई दे रही हैं। इन्होंने कहा कि एएसआई द्वारा यहां प्रारंभिक तौर पर ट्रायल ट्रेंच लगाया जाना चाहिए, हो सकता है यहां पर अस्त्र, शस्त्र व अन्य टूल्स भी प्राप्त हो। ऐसा हुआ तो यह इस क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि होगी और नया इतिहास लिखने को मजबूर करेगी।

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