Balrampur News: बलरामपुर की काशीराम कॉलोनियों में अवैध कब्ज़े और सत्यापन में लापरवाही, पात्र लोग अब भी वंचित

Balrampur News: बलरामपुर के उतरौला क्षेत्र की काशीराम कॉलोनियों में बड़े पैमाने पर अवैध कब्ज़े और सत्यापन की अनदेखी सामने आई है। पात्र लोग आज भी आवास से वंचित हैं, जबकि बाहरी लोग मकानों पर कब्ज़ा जमाए बैठे हैं।

Pawan Tiwari
Published on: 25 Aug 2025 2:53 PM IST
Balrampur News: बलरामपुर की काशीराम कॉलोनियों में अवैध कब्ज़े और सत्यापन में लापरवाही, पात्र लोग अब भी वंचित
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Balrampur News: बलरामपुर जनपद के उतरौला नगर पालिका क्षेत्र में काशीराम आवास योजना के तहत बनाई गई कॉलोनियां अब सवालों के घेरे में हैं। गरीब और जरूरतमंदों को मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना का लाभ वास्तविक पात्रों तक नहीं पहुंच पाया। स्थिति यह है कि बड़ी संख्या में मकानों पर अवैध कब्ज़ा हो चुका है और मनमाना आवंटन किया गया है।नगर क्षेत्र में दो स्थानों पर काशीराम कॉलोनियां बनाई गई थीं— पहली गांधीनगर मोहल्ले में सब्ज़ी मंडी के पास, और दूसरी आर्य नगर मोहल्ले में भारतीय विद्यालय इंटर कॉलेज के पीछे।

सूत्रों के अनुसार, यहां कई ऐसे लोग रह रहे हैं जिनके नाम पर आवास स्वीकृत ही नहीं हुए थे। असली लाभार्थियों के मकान या तो दूसरों के कब्जे में हैं या किराए पर दे दिए गए हैं। कुछ मामलों में लाभार्थी अन्य शहरों या गांवों में रहते हैं, जबकि मकानों पर बाहरी लोग डटे हुए हैं।नगर पालिका प्रशासन का दावा है कि समय-समय पर निरीक्षण और जांच की जाती है, लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वर्षों से न तो कोई ठोस सत्यापन हुआ है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाई है। नतीजा यह है कि असली और नकली लाभार्थियों की पहचान तक नहीं हो सकी है।

लोगों का कहना है कि कॉलोनियों में आए दिन झगड़े-फसाद होते रहते हैं। सूत्रों के अनुसार, यहां अवैध तरीके से कई संदिग्ध गतिविधियां भी संचालित हो रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो ये कॉलोनियां अपराध का गढ़ बन सकती हैं, जिसका असर पूरे नगर की शांति व्यवस्था पर पड़ेगा।

पात्र लाभार्थियों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण वे अब तक आवास सुविधा से वंचित हैं, जबकि गैरकानूनी ढंग से रहने वाले लोग बिना रोक-टोक मकानों पर कब्ज़ा जमाए हुए हैं।सबसे बड़ा सवाल नगर पालिका प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। यदि नियमित जांच और सत्यापन होता, तो हालात इतने गंभीर न होते। अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागता है और अवैध कब्जों व गड़बड़ियों पर नकेल कसने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

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