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Banda News: गंडक-गंगा लिंक परियोजना पर भी फोकस, रामकेश निषाद बोले- संभावनाओं पर हो रहा अध्ययन
Banda News: यह बात उत्तर प्रदेश के जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद ने न्यूजट्रैक से बातचीत में कही। उन्होंने कहा, नदी जोड़ो परियोजना का उद्देश्य बाढ़ और पानी की कमी की समस्या से निजात पाना है।
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Banda News: केन-बेतवा लिंक परियोजना का कार्य प्रगति पर है। इस बहुउद्देशीय परियोजना से बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर जिले लाभान्वित होंगे। सिंचाई सुविधा बहाल होगी और भरपूर पेयजल मुहैया होगा। जबकि राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण गंडक-गंगा लिंक परियोजना की संभावना का अध्ययन कर रहा है। परियोजना में छह बांधों का निर्माण नेपाल में होना प्रस्तावित है। इससे पूर्वांचल के आठ जिले लाभान्वित होंगे। वैसे, उत्तर प्रदेश में आजादी के बाद से ही कई नदियों पर अंतर्वेसिन जल प्रवाह के जरिए सिंचाई व पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
यूपी में कई नदियों पर अंतर्वेसिन जल प्रवाह से हो रही सिंचाई और पेयजल आपूर्ति
यह बात उत्तर प्रदेश के जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद ने न्यूजट्रैक से बातचीत में कही। उन्होंने कहा, नदी जोड़ो परियोजना का उद्देश्य बाढ़ और पानी की कमी की समस्या से निजात पाना है। उत्तर प्रदेश में कई नदियों पर अंतर्वेसिन जल प्रवाह से सिंचाई और पेयजल आपूर्ति हो रही है। उत्तराखंड में हरिद्वार स्थित भीमगौड़ा बैराज से गंगा का पानी ऊपरी गंगा कैनाल के जरिए हिंडन नदी में जाता है। गाजियाबाद होकर यमुना में मिलने वाली हिंडन की जल प्रवाह निरंतरता के लिए 1800 क्यूसेक डाले गए जल का उपयोग यमुना के ओखला बैराज से निकली आगरा नहर में होता है। कृषकों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होती है। कोट व हरनौल स्केप से गंगा का 150 क्यूसेक पानी भी यमुना में प्रवाहित किया जाता है।
हिंडन के जरिए गंगा का यमुना में और खो नदी के जरिए गंगा में जा रहा रामगंगा का पानी
जलशक्ति राज्यमंत्री निषाद ने बताया, इसी तरह उत्तराखंड से निकली रामगंगा नदी विनाव, गगास, मंदाल तथा सोना नदियों को समाहित करते हुए 158 किमी पर्वत मालाओं से गुजर कर 300 किमी मैदान में बहने के बाद हरेवली बैराज से एक फीडर के जरिए खो नदी में मिलती है। खो बैराज से 72 किमी लंबे 5100 क्यूसेक चैनल के जरिए पानी गढ़मुक्तेश्वर के पास गंगा में पहुंचता है। नरौरा बैराज से निचली गंगा नहर प्रणाली में जाता है। इससे किसानों को सिंचाई जल के साथ पेयजल भी उपलब्ध होता है।
घाघरा, सरयू, राप्ती, बाणगंगा और रोहिन के जोड़ से 14 लाख हेक्टेयर सिंचन क्षमता का सृजन
निषाद ने बताया, पूर्वांचल में घाघरा, सरयू, राप्ती, बानगंगा और रोहिन नदी को जोड़ते हुए 9 जिलों बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संत कबीरनगर, महाराजगंज और गोरखपुर में 14.04 लाख हेक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित की गई है। सरयू नहर परियोजना से किसान खेतों कि सिंचाई कर रहे हैं। मध्य प्रदेश बाण सागर बांध का पानी नहरों से उत्तर प्रदेश के अदवा, मेजा और जरगों डैम पहुंचता है। मिर्जापुर और प्रयागराज के कृषकों को सिंचाई के लिए पानी मिलता है। उन्होंने बताया, शारदा सहायक परियोजना से घाघरा का पानी शारदा नदी में प्रवाहित होता है।
गंडक-गंगा लिंक परियोजना के तहत पड़ोसी देश नेपाल में छह बांधों का निर्माण प्रस्तावित
इसके अतिरिक्त प्रदेश में राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण गंडक गंगा लिंक परियोजना की संभावना पर अध्ययन कर रहा है। यह परियोजना भारत एवं नेपाल के मध्य निर्मित होनी है।गंडक के जल को गंगा में प्रवाहित किया जाएगा। परियोजना में छह बांधों का निर्माण नेपाल में होना प्रस्तावित है। परियोजना से उत्तर प्रदेश के बाराबंकी, आजमगढ़, बलिया, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, बस्ती और सिद्धार्थनगर आदि जिले लाभान्वित होंगे।
नदी जोड़ो परियोजना से जल संसाधनों के संरक्षण समेत गरीबी में कमी लाना भी मकसद
निषाद ने कहा, नदी जोड़ो परियोजना के अनेक लाभ हैं। जल संसाधनों के संरक्षण के साथ ही फसल उत्पादकता में सुधार, स्वास्थ्य लाभ, जल मार्गों का उपयोग और ग़रीबी में कमी लाने का मकसद सधता है। यह सिविल इंजीनियरिंग परियोजना है और इसका उद्देश्य बाढ़ या पानी की समस्या समाप्त करना है।


