फर्जी डिग्री केस में डिप्टी सीएम केशव मौर्य को सुप्रीम राहत, याचिका हुई खारिज

KP Maurya News: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की फर्जी डिग्री के आरोप वाली याचिका खारिज की। हाईकोर्ट पहले ही याचिका खारिज कर चुका है।

Shivam Shrivastava
Published on: 1 Aug 2025 6:00 PM IST (Updated on: 1 Aug 2025 6:19 PM IST)
Keshav Prasad Maurya Daily Routine
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Keshav Prasad Maurya Daily Routine (Image Credit-Social Media)

KP Maurya News: उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ फर्जी शैक्षणिक डिग्री के आधार पर चुनाव लड़ने के आरोप में दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह याचिका दिवाकर नाथ त्रिपाठी नामक याचिकाकर्ता ने दायर की थी।

जस्टिस सुधांशु धुलिया और जस्टिस अरविंद कुमार वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई के बाद साफ कर दिया कि मामले में हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट भी इस याचिका को खारिज कर चुका है। हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता ने मौर्य की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाते हुए एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने 23 मई को सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रखा था, जिसे बाद में खारिज कर दिया गया।

आरटीआई एक्टिविस्ट ने दाखिल की थी याचिका

आरटीआई एक्टिविस्ट दिवाकर नाथ त्रिपाठी द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को सुप्रीम कोर्ट के बाद हाईकोर्ट ने भी खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज स्थित हिंदी साहित्य सम्मेलन की फर्जी डिग्री के आधार पर पेट्रोल पंप हासिल किया और चुनाव लड़ा। उन्होंने इसे गंभीर अपराध बताते हुए एफआईआर दर्ज कर जांच की मांग की थी।

इस मामले में यूपी सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने दलील दी कि याची ने निचली अदालत में झूठा हलफनामा दाखिल किया है और आरोप संज्ञेय अपराध की श्रेणी में नहीं आता।

इससे पहले दिवाकर त्रिपाठी की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देरी के कारण खारिज कर दी थी, क्योंकि उन्होंने 318 दिन की देरी से अपील दायर की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को याचिका के गुण-दोष के आधार पर सुनवाई का निर्देश दिया था। इसपर हाईकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार सिंह ने 7 जुलाई को याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता ने पहले 156(3) के तहत जिला न्यायालय में याचिका दाखिल की थी जिसे अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट ने खारिज कर दिया था।

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Shivam Shrivastava

शिवम उत्तर प्रदेश के एक युवा और उभरते पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 4 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। वे राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और हाइपरलोकल खबरों की गहरी समझ रखते हैं और समसामयिक मुद्दों पर सटीक व प्रभावशाली रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी विशेष रुचि डाटा-ड्रिवन पत्रकारिता और विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग में है, जिससे उनकी खबरें अधिक तथ्यात्मक और विश्वसनीय बनती हैं। वे जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप को भी समझते हैं। लेखन और रिसर्च में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक सक्षम और जिम्मेदार पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।

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