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बुलंदशहर: अंबकेश्वर महादेव मंदिर में पांडवों ने की थी पातालिय शिवलिंग की पूजा, मिली थी महाभारत में विजय
बुलंदशहर के अंबकेश्वर महादेव मंदिर में पांडवों ने की थी पूजा, भगवान शिव ने दिया था आशीर्वाद, जिससे मिली महाभारत में विजय। आज भी लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं।
अंबकेश्वर महादेव मंदिर में पांडवों ने की थी पातालिय शिवलिंग की पूजा, मिली थी महाभारत में विजय (Photo- Newstrack)
Bulandshahr News: बुलंदशहर जिले के कस्बा अहार में गंगा तट पर स्थित प्राचीन पातालिय अंबकेश्वर महादेव मंदिर महाभारत कालीन इतिहास को जीवंत बनाता है। मंदिर के पुजारी विक्रम गिरी के अनुसार, यहां पांडवों ने भगवान शिव का आवाह्न कर पातालिय शिवलिंग की पूजा-अर्चना की थी। इस पूजन से प्रसन्न होकर भगवान महादेव ने उन्हें कौरवों से युद्ध में विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद दिया था।
महाभारत काल से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत
कहा जाता है कि लगभग 5,622 वर्ष पूर्व, पांडवों ने यहां गंगा के किनारे तप किया था। उनके द्वारा पूजा करने के पश्चात धरती की कोख से स्वतः शिवलिंग प्रकट हुआ। इसी स्थल को अब अंबकेश्वर महादेव मंदिर के रूप में जाना जाता है। पांडवों ने यहां खिरनी के वृक्ष भी लगाए थे, जो आज भी मंदिर परिसर में मौजूद हैं और हर वैशाख माह में फल देते हैं।
गोरक्षनाथ द्वारा सिद्ध किया गया स्थल
इतिहासकारों और स्थानीय जनों के अनुसार, कलियुग में भगवान शिव के अवतार माने जाने वाले बाबा गोरक्षनाथ ने भी यहां तप किया था। उन्होंने मंदिर परिसर में धूना लगाकर पूजा-अर्चना की थी। यह स्थल आज "सिद्धेश्वर स्थल" के नाम से प्रसिद्ध है, जहां हर पूर्णिमा को विशाल मेला आयोजित होता है।
शिवरात्रि पर लगता है आस्था का मेला
फाल्गुन और श्रावण मास की महाशिवरात्रि पर मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ता है। गंगोत्री, हरिद्वार, ऋषिकेश आदि तीर्थ स्थलों से श्रद्धालु जल लेकर पदयात्रा करते हुए मंदिर पहुंचते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। मंदिर में प्रतिदिन सुबह 4 बजे और शाम 7:20 बजे आरती होती है।
आज भी पूरी होती हैं श्रद्धालुओं की मन्नतें
माना जाता है कि जो भी श्रद्धालु यहां सच्चे मन से जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। यही वजह है कि देशभर से लाखों भक्त यहां आकर मत्था टेकते हैं।


