Chandauli News: नौजवानों का भविष्य दांव पर: नौगढ़ में स्कूल विलय के खिलाफ ग्रामीणों का अनोखा मोर्चा

Chandauli News: गांव के लोगों का मानना है कि इस कदम से उनके बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे न केवल उनकी सुरक्षा को खतरा होगा, बल्कि स्कूल जाने की प्रेरणा भी कम हो जाएगी।

Sunil Kumar
Published on: 16 Aug 2025 5:43 PM IST
Chandauli News: नौजवानों का भविष्य दांव पर: नौगढ़ में स्कूल विलय के खिलाफ ग्रामीणों का अनोखा मोर्चा
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नौजवानों का भविष्य दांव पर:नौगढ़ में स्कूल विलय के खिलाफ ग्रामीणों का अनोखा मोर्चा  (photo: social media )

Chandauli News: चंदौली जिले के सबसे पिछड़े और दुर्गम क्षेत्रों में से एक, नौगढ़ तहसील का पड़रिया गांव, आज एक अभूतपूर्व संघर्ष का गवाह बन रहा है। जहां एक ओर सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्कूलों के विलय (मर्जर) का प्रस्ताव ला रही है, वहीं पड़रिया के ग्रामीण अपने बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर खड़े हो गए हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक स्कूल का मुद्दा नहीं, बल्कि गांव की पहचान, बच्चों की शिक्षा का अधिकार और एक उज्ज्वल भविष्य की लड़ाई है।

यह मामला पड़रिया के प्राथमिक विद्यालय से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर पास के किसी दूसरे स्कूल में मिलाया जा रहा है। इस खबर ने पूरे गांव में आक्रोश और बेचैनी भर दी है। गांव के लोगों का मानना है कि इस कदम से उनके बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे न केवल उनकी सुरक्षा को खतरा होगा, बल्कि स्कूल जाने की प्रेरणा भी कम हो जाएगी।

गांव के नेताओं का अभूतपूर्व नेतृत्व

इस विरोध प्रदर्शन की कमान गांव के प्रधान प्रतिनिधि प्रेम के हाथ में है, जिन्होंने कई दर्जन ग्रामीणों को साथ लेकर इस 'स्कूल बचाओ' आंदोलन की शुरुआत की है। उनके साथ समाज के कई प्रमुख चेहरे भी शामिल हो गए हैं, जो इस लड़ाई को एक मजबूत आधार दे रहे हैं। इनमें समाजवादी पार्टी के चकिया विधानसभा अध्यक्ष प्रभु नारायण यादव, प्रमुख समाजसेवी और पूर्व शासकीय अधिवक्ता रामजियावन सिंह, और समाजवादी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव विवेक यदुवंशी,भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष उपेन्द्र कुमार जैसे लोग शामिल हैं। इनके अलावा, मन्नू प्रजापति, बल्लू यादव और राजमनी जैसे स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं।

इन सभी का एक ही मत है: शिक्षा का अधिकार किसी भी कीमत पर छीना नहीं जा सकता। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक यह फैसला वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। यह आंदोलन सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि पूरे गांव के दृढ़ संकल्प और एकता की कहानी है, जो अपने बच्चों की शिक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

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