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Etah News: बिना मान्यता के चल रहे दो निजी विद्यालय और एक मदरसा बंद, बीईओ ने की सख्त कार्रवाई
Etah News: जलेसर क्षेत्र में बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ी कार्रवाई करते हुए बिना मान्यता के संचालित हो रहे दो निजी विद्यालयों और एक मदरसे को बंद करा दिया है।
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Etah News: एटा जनपद के थाना जलेसर क्षेत्र में बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ी कार्रवाई करते हुए बिना मान्यता के संचालित हो रहे दो निजी विद्यालयों और एक मदरसे को बंद करा दिया है। यह कार्रवाई बीएसए दिनेश कुमार के निर्देश पर खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) अनिल कुमार द्वारा की गई है, जिससे शिक्षा क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
बीईओ अनिल कुमार ने बताया कि विकास क्षेत्र अवागढ़ के ग्राम हादीदादपुर में "लिटिल फ्लावर स्कूल" नामक एक निजी विद्यालय वर्षों से बिना मान्यता के संचालित हो रहा था। निरीक्षण के दौरान विद्यालय में शिक्षक अमित कुमार और कई बच्चे मौजूद थे। जब विद्यालय से मान्यता से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, तो प्रधानाचार्य कोई प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर सके। जिस पर विद्यालय को तत्काल बंद करने के निर्देश दिए गए और चेतावनी दी गई कि अगली बार संचालन करते पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसी प्रकार, ग्राम नोहखास में भी एक अन्य निजी विद्यालय निरीक्षण में पकड़ा गया। विद्यालय प्रधानाचार्य अंबरीष सिंह निवासी पिपरिया द्वारा किसी अन्य विद्यालय "आरकेपीएस नगला उम्मीद, जलेसर" के कागजात दिखाए गए, जो कि इस विद्यालय की मान्यता साबित नहीं करते थे। इस पर बीईओ ने प्रधानाचार्य को फटकार लगाते हुए विद्यालय को तत्काल बंद कराया।
निरीक्षण के दौरान नोहखास गांव में एक मदरसा भी बिना मान्यता के संचालित पाया गया, जिसमें एक मौलाना 8-10 बच्चों को कुरान पढ़ा रहे थे। मदरसे को भी मौके पर बंद कराया गया तथा दोबारा संचालन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि जनपद में बिना मान्यता के चल रहे विद्यालय और मदरसे परिषदीय विद्यालयों की छात्र संख्या में गिरावट का कारण बन रहे हैं। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को ऐसे गैरकानूनी शिक्षण संस्थानों को तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग बिना मान्यता संचालित सभी विद्यालयों और मदरसों के खिलाफ कठोर कदम उठाएगा ताकि शिक्षा के मानकों को बनाए रखा जा सके और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ न हो।


