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Fatehpur News: बाढ़ राहत शिविर में बारिश बनी मुसीबत: चारे का संकट, लोगों में नाराज़गी, पानी का जलस्तर जस का तस
Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में गंगा की बाढ़ से लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। बारिश के बाद चारे की भारी किल्लत हो गई है, जिससे मवेशियों और लोगों दोनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की बिंदकी तहसील स्थित गंगा कटरी के गांवों में बाढ़ से उत्पन्न संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। गंगा नदी का जलस्तर अब भी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है, जिससे ग्रामीणों का पलायन लगातार जारी है। आशापुर और अभयपुर के मजरे मल्हू का डेरा, जाड़े का पुरवा, बेनीखेड़ा, सदनहाँ और बिंदकी फॉर्म जैसे गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
इन गांवों के लोग अब महुआ घाटी में बनाए गए बाढ़ राहत शिविर में शरण लिए हुए हैं। फिलहाल इस शिविर में 86 परिवारों के 500 से अधिक लोग रह रहे हैं। वहीं, कानपुर के डोमनपुर में संचालित खांगल बाबा बाढ़ राहत शिविर में भी बेरीनारी और बड़ाखेड़ा के लोग रह रहे हैं।
बारिश ने और बढ़ाई मुश्किलें
शुक्रवार और शनिवार की रात हुई मूसलधार बारिश ने राहत शिविर में रह रहे लोगों की समस्याएं और बढ़ा दी हैं। भीगने के कारण मवेशियों का भूसा और चारा खराब हो गया है। खेतों में पहले ही फसलें डूब चुकी हैं, ऐसे में चारे की भारी किल्लत हो गई है। प्रशासन की ओर से जो भूसा उपलब्ध कराया जा रहा है, वह जरूरत से बहुत कम बताया जा रहा है।
चूल्हे भी हुए ठंडे
बारिश के कारण लकड़ियाँ भीग गईं, जिससे शिविर में रह रहे कई परिवार खाना नहीं बना पा रहे हैं। जाड़े का पुरवा और बिंदकी फॉर्म से आए कई लोग जैसे सुनील, राजवती, खुशबू, योगेंद्र पाल और दयाराम ने बताया कि उनका चूल्हा अब ठंडा पड़ गया है और खाने की समस्या गंभीर हो गई है।बिंदकी के तहसीलदार अचलेश सिंह ने बताया कि अब तक 50 कुंतल से अधिक भूसा वितरित किया जा चुका है और प्रत्येक पशुपालक को 40 से 45 किलो भूसा दिया जा रहा है। उनका दावा है कि किसी भी मवेशी पालक को भूसे की कमी नहीं हो रही।
नेताओं का दौरा, अफसरों को निर्देश
शुक्रवार को दोपहर के बाद भारी बारिश के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति और जहानाबाद विधायक राजेंद्र सिंह पटेल ने महुआ घाटी राहत शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को जरूरी इंतजाम पुख्ता करने के निर्देश दिए।
पशुपालन विभाग की मौजूदगी
शिविर में अब तक 230 पशुओं का पंजीकरण किया गया है। पशुपालन विभाग की टीम द्वारा पशुओं को कृमिनाशक दवाएं वितरित की जा रही हैं। विभाग के डॉक्टर संतोष शर्मा ने बताया कि जानवरों की निगरानी की जा रही है। हालांकि कुछ पशुपालकों ने शिकायत की है कि बकरी पालन कर रहे लोगों की बकरियों को कुत्ते दौड़ा रहे हैं।शिविर में ग्राम प्रधान रामदास निषाद और ओमनारायण कश्यप भी लगातार मौजूद हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।राहत शिविर में हालात सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। प्रशासन के दावे और ज़मीनी हकीकत में फर्क दिख रहा है। बाढ़ पीड़ितों को राहत देने के लिए और ठोस कदम उठाने की जरूरत है।


