Hapur News: बरसात में शिवभक्ति का उत्सव: सबली महादेव मंदिर में कांवड़ियों ने किया जलाभिषेक

Hapur News: हरिद्वार से पैदल गंगाजल लेकर पहुंचे कांवड़ियों ने भीगते हुए जयकारों के बीच 'बोल बम' के उद्घोष के साथ भोलेनाथ का अभिषेक किया।

Avnish Pal
Published on: 23 July 2025 1:18 PM IST
Hapur News: बरसात में शिवभक्ति का उत्सव: सबली महादेव मंदिर में कांवड़ियों ने किया जलाभिषेक
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Hapur News: सावन मास की बरसात के बीच शिवभक्ति का उत्सव पूरे चरम पर पहुंच गया। बुधवार को मूसलाधार बारिश के बावजूद हापुड़ के प्रसिद्ध सबली स्थित प्राचीन महादेव मंदिर, छपकोली के ऐतिहासिक शिवधाम और नगर के चंडी मंदिर सहित शहर के अन्य शिवालयों में लाखों श्रद्धालुओं ने गंगाजल से जलाभिषेक कर भगवान शिव के प्रति अपनी अगाध आस्था प्रकट की।

बोल बम' के उद्घोष से गूंजे मंदिर

हरिद्वार से पैदल गंगाजल लेकर पहुंचे कांवड़ियों ने भीगते हुए जयकारों के बीच 'बोल बम' के उद्घोष के साथ भोलेनाथ का अभिषेक किया। गंगाजल से भरे कलश कंधे पर और आंखों में भक्ति की चमक लिए श्रद्धालु मंदिर की लंबी कतारों में घंटों खड़े रहे। जल, कीचड़ और फिसलन के बावजूद शिवभक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था।

मंदिरों में देखने को मिला जनसैलाब

बारिश के बीच मंदिर परिसर में घंटियों की गूंज, मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं की आवाज़ों से माहौल पूरी तरह शिवमय हो गया। भक्त बेलपत्र, धतूरा, पुष्प और फल अर्पित कर भोलेनाथ की पूजा-अर्चना में लीन दिखे। ठंडी और सुहावनी बरसात ने वातावरण को और भी आध्यात्मिक बना दिया।

प्रशासन ने भी निभाई जिम्मेदारी:

बारिश को देखते हुए प्रशासन की ओर से विशेष प्रबंध किए गए थे। जिलाधिकारी अभिषेक पांडे और पुलिस अधीक्षक ने स्वयं मंदिर पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। कीचड़ से बचाव के लिए मार्गों पर बिछावन डाला गया, सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग, CCTV निगरानी, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और जल वितरण की व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा बलों की भी तैनाती की गई।

सेवा भाव से जुड़ा समाज:

मंदिर प्रबंधन समिति और स्थानीय समाजसेवियों ने चाय, बिस्किट व वर्षा से बचने के लिए तंबुओं की समुचित व्यवस्था की। इन सभी प्रयासों के बीच सबसे बड़ा दृश्य था—कांवड़ियों की अथाह श्रद्धा, जो बरसात की बूंदों से एक क्षण को भी कम नहीं हुई।यह दिन साबित करता है कि सच्ची भक्ति न तो बारिश से रुकती है, न ही कठिनाइयों से। सबली महादेव मंदिर में हुआ यह आयोजन केवल धार्मिक श्रद्धा का नहीं, सामूहिक आस्था, समर्पण और सेवा भाव का भी प्रतीक बन गया।

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