Lucknow: दिवाली में कारीगरों का जलवा! बना रहे ऐसी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां जिसे देखकर बोलेंगे 'वाह'

Lucknow News: राजधानी लखनऊ के हुसैनगंज, अमीनाबाद, चौक और आलमबाग जैसे इलाकों में मिट्टी और प्लास्टर से बनी रंग-बिरंगी प्रतिमाएं ग्राहकों का ध्यान खींच रही हैं।

Ashutosh Tripathi
Published on: 14 Oct 2025 12:43 PM IST
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Lucknow News: दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाओं की सजावट में कारीगर पूरी तन्मयता से जुटे हैं। राजधानी लखनऊ के हुसैनगंज, अमीनाबाद, चौक और आलमबाग जैसे इलाकों में मिट्टी और प्लास्टर से बनी रंग-बिरंगी प्रतिमाएं ग्राहकों का ध्यान खींच रही हैं।


कारीगरों का कहना है कि इस बार पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी से बनी प्रतिमाओं की मांग ज्यादा है।


लोग अब प्लास्टर ऑफ पेरिस की जगह पारंपरिक मिट्टी की मूर्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके अलावा, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के चलते देसी रंगों और कुशल हस्तशिल्प से सजी प्रतिमाएं भी खूब पसंद की जा रही हैं।


कारीगर दिन-रात मेहनत कर लक्ष्मी-गणेश की ऐसी सुंदर प्रतिमाएं बना रहे हैं, जिनसे घर-घर में समृद्धि और सौभाग्य की प्रतीक दिवाली का उल्लास झलके। कुछ कारीगरों ने बताया कि मूर्तियों की कीमत आकार और सजावट के अनुसार 200 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक है।


दुकानदारों का कहना है कि इस बार ऑनलाइन ऑर्डर्स के साथ-साथ ऑफलाइन बिक्री में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। चारों ओर दीपोत्सव की तैयारियों के बीच कारीगरों की यह मेहनत दिवाली के असली भाव श्रम, श्रद्धा और सौंदर्य को दर्शा रही है।

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आशुतोष त्रिपाठी जन्म 17 अप्रैल 1988 एक भारतीय फोटोग्राफर और फोटो जर्नलिस्ट हैं। पत्रकारिता जीवन की शुरुआत बतौर रिपोर्टर वॉइस ऑफ़ मूवमेंट में हुई, इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। आशुतोष त्रिपाठी ने 2007 में एमिटी विश्वविद्यालय से मास्टर इन जर्नलिस्म एंड मास कम्युनिकेशन का कोर्स किया। 2010 में वौइस् ऑफ मूवमेंट अखबार में बतौर रिपोर्टर तीन साल काम किया। इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। 2014 में एक फोटोग्राफर बने और एक साल बाद दैनिक भास्कर उत्तर प्रदेश में सीनियर फोटोजर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत रहे। 2016 से लगातार newstrack.com में चीफ फोटोजर्नलिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। 2015 में एक इनके द्वारा की गयी एक बुजुर्ग टाइपिस्ट की स्टोरी ने पूरी दुनिया ख्याति प्राप्त की। 2016 में इन्हें पत्रकारिता जगत में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए नारद पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था । 2017 में फोटोग्राफी क्लब ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फोटोग्राफी कम्पटीशन में इन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया । 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित कुंभ फोटोग्राफी प्रतियोगिता में इन्होंने तृतीय पुरुस्कार मिला था ।।

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