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KGMU विशेषज्ञ की खास सलाह: दीपावली पर सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त पर्व मनाने की अपील
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख, डॉ. सूर्यकान्त ने दीपावली के दौरान सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त उत्सव मनाने की अपील की है।
Lucknow News: Photo-Social Media
Lucknow Today News: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख, डॉ. सूर्यकान्त ने दीपावली के दौरान सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त उत्सव मनाने की अपील की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दीपावली का पर्व दीपों की रोशनी और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है, जिसे पटाखों की आवाज और धुएं से नहीं, बल्कि शांति और सौहार्द से मनाना चाहिए।
डॉ. सूर्यकान्त ने दीपावली के ऐतिहासिक महत्व को भी रेखांकित किया। उनका कहना था कि इस दिन की पृष्ठभूमि श्रीराम की अयोध्या वापसी से जुड़ी हुई है, जब अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। लेकिन, समय के साथ दीपावली का रूप बदल चुका है। अब यह केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि आर्थिक और मनोरंजन की परंपराओं से भी जुड़ गया है, जिसमें पटाखों की अत्यधिक ध्वनि और प्रदूषण मुख्य समस्या बन चुके हैं।
आतिशबाजी से बढ़ता प्रदूषण और स्वास्थ्य पर प्रभाव
डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि आतिशबाजी के धुएं में कई खतरनाक रसायन जैसे कैडमियम, बेरियम, डाइऑक्सिन, और स्ट्रॉन्शियम शामिल होते हैं, जो श्वसन तंत्र, हृदय, आंखों और त्वचा पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप वायु प्रदूषण का स्तर 200% तक बढ़ सकता है, जिससे स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।
स्वास्थ्य जोखिम और विशेष सावधानियां
डॉ. सूर्यकान्त ने खासतौर पर अस्थमा, सीओपीडी और अन्य श्वसन रोगों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए दीपावली के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की। उनका कहना था कि इस दौरान वायु प्रदूषण और धूल की अधिकता से सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे मरीजों को घर के अंदर रहकर तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए और मास्क पहनने की सलाह दी गई। यदि लक्षण बढ़ जाएं तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
हृदय रोग और उच्च रक्तचाप के मरीजों को चेतावनी
दीपावली के दौरान उच्च रक्तचाप और हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों को भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। डॉ. सूर्यकान्त के अनुसार, पटाखों की तेज आवाज और वायु प्रदूषण इन मरीजों के लिए खतरे का कारण बन सकते हैं। खासकर जिन व्यक्तियों को हाल ही में एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी हुई है, उन्हें पटाखों से पूरी तरह बचना चाहिए।
आंखों और त्वचा की सुरक्षा पर भी ध्यान दें
डॉ. सूर्यकान्त ने दीपावली के दौरान आंखों और त्वचा की सुरक्षा पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि पटाखों के दौरान आंखों में चोट लग सकती है, जिससे आंखों को रगड़ने की बजाय तुरंत पानी से धोना चाहिए। इसके अलावा, सिंथेटिक कपड़ों की बजाय सूती और मोटे कपड़े पहनने की सलाह दी गई। उन्होंने बच्चों को पटाखों से दूर रखने की अपील की और बताया कि अगर त्वचा जल जाए तो ठंडे पानी से धोकर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
प्रदूषण कम करने के लिए वैकल्पिक उपाय
डॉ. सूर्यकान्त ने पर्यावरण को कम नुकसान पहुँचाने वाले विकल्पों की सिफारिश की। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक आतिशबाजी और कम्प्रेस्ड एयर तकनीक से बनी आतिशबाजी के इस्तेमाल की सलाह दी, जो प्रदूषण और शोर दोनों को कम करती हैं। साथ ही, चीन निर्मित पटाखों से बचने की चेतावनी दी, क्योंकि वे अधिक विषैले होते हैं।
कुलपति की शुभकामनाएं
इस जागरूकता अभियान के लिए केजीएमयू कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने डॉ. सूर्यकान्त और डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर एंड क्लाइमेट एक्शन को शुभकामनाएं दीं। अंत में, डॉ. सूर्यकान्त ने कहा कि दीपावली का असली संदेश है अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी खुशी किसी दूसरे के स्वास्थ्य या पर्यावरण के लिए खतरा न बने।


