Meerut News: जुटे बुद्धिजीवी, हरित प्रदेश आंदोलन को गति देने की रणनीति तय

Meerut News: बैठक में उपस्थित सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान से आग्रह किया गया कि वे केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी से मुलाकात का समय तय करें।

Sushil Kumar
Published on: 16 Aug 2025 9:23 PM IST
Intellectuals gathered on Bagpat Road, plan to give momentum to Green Pradesh Movement
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बागपत रोड पर जुटे बुद्धिजीवी, हरित प्रदेश आंदोलन को गति देने की रणनीति तय (Photo- Newstrack)

Meerut News: मेरठ, 16 अगस्त। उत्तर प्रदेश के मेरठ में बागपत रोड स्थित सुरेंद्र प्रताप भवन शनिवार को हरित प्रदेश निर्माण समिति की चर्चा का केंद्र बना रहा। समिति के अराजनीतिक अध्यक्ष मनीष प्रताप की अध्यक्षता और बदर महमूद के संचालन में हुई इस बैठक में वकीलों, शिक्षकों, डॉक्टरों और समाजसेवियों की अच्छी-खासी मौजूदगी रही। सुबह 11 बजे शुरू हुई बैठक में चौ. यशपाल सिंह, डॉ. कर्मेंद्र सिंह, अंकित चौधरी, जगत सिंह एडवोकेट, शक्तिराज एडवोकेट, सुरेंद्र शर्मा (एलएलबी), पूर्व पार्षद राकेश रस्तोगी और कोमल सिंह जैसे नाम प्रमुख रहे।

बैठक का सबसे अहम पहलू तब सामने आया जब उपस्थित सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान से आग्रह किया गया कि वे केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी से मुलाकात का समय तय करें। समिति का मानना है कि संसद भवन जाकर मंत्री को ज्ञापन सौंपना आंदोलन के लिए बड़ा कदम साबित होगा। इससे न केवल आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी बल्कि केंद्रीय सहयोग भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

चर्चा के दौरान यह भी तय किया गया कि आंदोलन की मजबूती के लिए अलग-अलग ग्रुप बनाए जाएंगे। इन ग्रुपों में वकील, डॉक्टर, शिक्षक और अन्य बुद्धिजीवी वर्ग को शामिल कर विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का काम होगा। समिति के पदाधिकारियों का कहना था कि आंदोलन केवल नारे और बैठकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे सामाजिक, बौद्धिक और राजनीतिक स्तर पर समानांतर गति देने की जरूरत है।

बैठक के अंत में अध्यक्ष मनीष प्रताप ने सभी उपस्थित लोगों का आभार जताते हुए भरोसा दिलाया कि आगामी कार्यवाही के संबंध में जल्द ही जानकारी साझा की जाएगी। उनका कहना था, “हरित प्रदेश केवल एक मांग नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत सामाजिक व राजनीतिक संकल्प है।”

स्थानीय जानकारों का मानना है कि रविवार की यह बैठक आंदोलन के अगले चरण की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय स्तर पर समिति को कितना सहयोग मिलता है और आंदोलन किस रूप में आगे बढ़ता है।

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