Pilibhit News: दशकों बाद बंटवारे के विस्थापितों को मिलेगा मालिकाना हक, योगी के फैसले से खुशी

Pilibhit News: भारत आए विस्थापित परिवारों को आखिरकार अपना मालिकाना हक मिलने की उम्मीद जागी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया निर्देश के बाद, पीलीभीत जनपद के हजारों विस्थापित परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

Pranjal maurya
Published on: 28 July 2025 6:03 PM IST (Updated on: 28 July 2025 6:20 PM IST)
Pilibhit News: दशकों बाद बंटवारे के विस्थापितों को मिलेगा मालिकाना हक, योगी के फैसले से खुशी
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Pilibhit Bengali refugees

Pilibhit News: बांग्लादेश (पूर्वी पाकिस्तान) के विभाजन के बाद भारत आए विस्थापित परिवारों को आखिरकार अपना मालिकाना हक मिलने की उम्मीद जागी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया निर्देश के बाद, पीलीभीत जनपद के हजारों विस्थापित परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

1964 से 1971 के बीच पूर्वी पाकिस्तान से आए इन परिवारों को शारदा सागर डैम के किनारे और शारदा नदी की तलहटी में बसाया गया था। उस समय सरकार ने उन्हें खेती की जमीन, रहने के लिए स्थान, और खेती उपकरण तो दिए, लेकिन मालिकाना हक नहीं दिया। इससे ये परिवार दशकों से भारत में रहकर भी न तो सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सके, न ही कानूनी रूप से भूमि के स्वामी बन पाए।

मुख्यमंत्री के नए निर्देश के अनुसार अब इन परिवारों को जमीन पर कानूनी अधिकार (मालिकाना हक) दिया जाएगा। इससे वे लोन ले सकेंगे, सरकारी योजनाओं में भाग ले सकेंगे और असल मायने में भारतीय नागरिक जैसा जीवन जी सकेंगे।

इस निर्णय के बाद कलीनगर, पूरनपुर, अमरिया और पीलीभीत सदर तहसीलों के ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की है। ग्राम रमनगरा के ग्रामीणों ने बताया कि अब उन्हें जमीन का मालिकाना हक मिलेगा, जो दशकों से सिर्फ सपना था। जिला बंगाली प्रधान संघ के अध्यक्ष शंकर राय ने कहा कि यह पूरे बंगाली समाज का मुद्दा है, सिर्फ 1400 परिवारों तक सीमित नहीं।

पीलीभीत के जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के अनुसार, प्रशासन ने 2196 परिवारों की सूची तैयार की है, जिसमें 1466 परिवारों को पहले चरण में मालिकाना अधिकार देने का प्रस्ताव भेजा गया है। बाकी 657 परिवारों की भूमि वन विभाग या नदी कटाव प्रभावित क्षेत्र में आती है, जिनका सर्वे चल रहा है।

बावजूद इसके, कुछ समस्याएं अब भी बनी हुई हैं — जैसे कि दस्तावेजों का अभाव, नदी में बह गए कागज़, और मालिकाना हक से वंचित लोग जो बाद में आकर बसे। प्रशासन इन्हें भी ध्यान में रखते हुए विस्तृत सर्वे और सत्यापन कर रहा है।

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