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Samabhal News: संभल बनेगा भारत का नया तीर्थगृह, कल्कि नगरी के 92 प्राचीन तीर्थों की हुई पुनर्खोज
Sambhal News: संभल जिला अब एक नए आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होने जा रहा है। हाल ही में जिले में 92 प्राचीन तीर्थ स्थलों की पुनर्खोज की गई है, जिससे सनातन आस्था से जुड़ी चेतना एक बार फिर जागृत हुई है।
Sambhal spiritual tourism
Sambhal News: प्राचीन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कल्कि अवतार की जन्मभूमि माने जाने वाला संभल जिला अब एक नए आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होने जा रहा है। हाल ही में जिले में 92 प्राचीन तीर्थ स्थलों की पुनर्खोज की गई है, जिससे सनातन आस्था से जुड़ी चेतना एक बार फिर जागृत हुई है।इन तीर्थ स्थलों में वायु महाकूप और यमदाग्नि कूप विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं, जो सैकड़ों वर्षों से लुप्त थे। विशेषज्ञों के अनुसार, वायु महाकूप 16वीं सदी की एक ऐतिहासिक संरचना है और इसका उपयोग दमा जैसे श्वास रोगों के उपचार में लाभकारी माना जाता है।
यह स्थल एक विवादित धार्मिक स्थान से मात्र 200 मीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व और भी बढ़ जाता है।संभल के जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने बताया कि इन स्थलों को विकसित करने के लिए 250 करोड़ रुपये की महायोजना तैयार की गई है। इस योजना के अंतर्गत 68 जल तीर्थ और 19 महाकूपों को आध्यात्मिक एवं औषधीय महत्व के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।अब तक प्रशासन द्वारा 8 लुप्त तीर्थ स्थलों की पुनर्खोज की जा चुकी है, जबकि शेष तीर्थ स्थलों की खोज जारी है।
सभी स्थलों पर एक समान भव्य प्रवेशद्वार बनाए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं को एक संगठित और दिव्य अनुभव मिल सके।डॉ. पेंसिया ने बताया कि इस योजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) शासन को सौंप दी गई है और कार्य इसी वर्ष प्रारंभ कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा,"संभल को कल्कि अवतार की नगरी के रूप में एक नई पहचान दी जाएगी। यह स्थान शीघ्र ही सनातन भारत का आध्यात्मिक द्वार बनेगा।"संभल सदर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत यह त्रिवेणी संगम—आध्यात्मिकता, इतिहास और पर्यटन—को एक साथ समेटेगा, जो आने वाले समय में देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करेगा।


