Shamli News: शामली में नवरात्रि अष्टमी पर हुआ कन्या पूजन, भक्तों ने माँ दुर्गा का किया आह्वान

Shamli News: शामली में श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाई गई अष्टमी, कन्या पूजन में उमड़ा भक्तों का उत्साह, घर-घर गूंजे "जय माता दी" के स्वर।

Pankaj Prajapati
Published on: 30 Sept 2025 9:03 AM IST
Shamli News: शामली में नवरात्रि अष्टमी पर हुआ कन्या पूजन, भक्तों ने माँ दुर्गा का किया आह्वान
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Shamli News: उत्तर प्रदेश के शामली जिले में हर पर्व गहरी आस्था और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। ऐसा ही एक प्रमुख पर्व है शारदीय नवरात्रि, जिसमें भक्तगण नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और व्रत करते हैं। इस पर्व का अष्टमी और नवमी तिथि पर विशेष महत्व होता है।इस अवसर पर विशेष रूप से कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है। जनपद शामली में भी अष्टमी के दिन श्रद्धा और उत्साह के साथ कन्या पूजन संपन्न हुआ। मान्यता है कि इस दिन माँ दुर्गा स्वयं कन्याओं के रूप में घर-घर आशीर्वाद देने आती हैं।

परंपरा के अनुसार, महिलाएँ नवरात्रि के आठ दिनों तक व्रत रखती हैं और अष्टमी के दिन व्रत का समापन कन्या पूजन द्वारा करती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और कन्याओं की पूजा करने से माँ दुर्गा सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं।पूजन विधि की शुरुआत कन्याओं के चरण धोने से होती है। फिर उन्हें चुनरी ओढ़ाई जाती है, माथे पर तिलक लगाया जाता है और फूलों से आरती की जाती है। यह भाव प्रकट करता है कि हर कन्या में देवी का स्वरूप समाया हुआ है।इसके बाद कन्याओं को हलवा, पूरी और चने का भोग परोसा जाता है। बच्चों के मासूम चेहरे जब प्रसाद का आनंद लेते हैं, तो पूरे वातावरण में भक्ति और संतोष की अनुभूति होती है।

पूजन के उपरांत कन्याओं को उपहार, दक्षिणा और माता की चुनरी देकर आदरपूर्वक विदा किया जाता है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नारी सम्मान का प्रतीक भी है।

नवरात्रि और कन्या पूजन की यह परंपरा समाज को यह संदेश देती है कि नारी का सम्मान और उसकी पूजा हमारे सांस्कृतिक मूल्यों का अभिन्न अंग है। यह पर्व स्त्री शक्ति की उपासना और उसके महत्व की याद दिलाता है।अष्टमी के दिन भक्तजन माँ दुर्गा से शक्ति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं। वे प्रार्थना करते हैं कि हर घर में सुख-शांति बनी रहे और जीवन से अज्ञान, दुख व कष्टों का नाश हो।इस प्रकार, नवरात्रि केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि भक्ति, श्रद्धा और शक्ति की साधना का प्रतीक है। अष्टमी का दिन हमें यह सिखाता है कि माँ दुर्गा की कृपा पाने के लिए हमें कन्याओं और नारी शक्ति का सच्चे मन से सम्मान करना चाहिए।

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