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Sonbhadra News: वरासत नियमों का उल्लंघन, भतीजे को बेटा दिखाया, बेटियों के नाम गायब, पिता को उर्फ कर किया खेल, महिला की SP से गुहार
Sonbhadra News: मामले में पुलिस अधीक्षक (SP) को पत्र भेजकर कार्रवाई की गुहार लगाई गई है। यह मामला भी आदिवासी यानी चेरो समुदाय से जुड़ा हुआ है।
वरासत नियमों का उल्लंघन, भतीजे को बेटा दिखाकर SC-ST महिला की जमीन पर कब्जा करने का आरोप (photo: social media )
Sonbhadra News: सोनभद्र जिले में अनुसूचित जाति/जनजाति (SC-ST) की जमीनों को पिछड़ा वर्ग का बताकर नामांतरण का बड़ा खेल सामने आया है। ओबरा तहसील के चोपन अंचल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां तीन जीवित बेटियों के रहते हुए, एक भतीजे को बेटा बताते हुए, जमीन की वरासत (उत्तराधिकार) करा ली गई है। आरोप है कि यह सारा खेल पिता के नाम में 'उर्फ' लगाकर खेला गया है। इस मामले में तत्कालीन क्षेत्रीय लेखपाल (लेखपाल) की भूमिका खासी संदिग्ध बताई जा रही है। संबंधित लेखपाल के वर्षों से जिले और सदर तहसील क्षेत्र में तैनाती बने रहने और इस दौरान बनाए गए कथित ऊंचे रसूख के चलते पीड़िता की आवाज दबा दी जा रही है।
मामले में पुलिस अधीक्षक (SP) को पत्र भेजकर कार्रवाई की गुहार लगाई गई है। यह मामला भी आदिवासी यानी चेरो समुदाय से जुड़ा हुआ है। यह देखना बाकी है कि पीड़ित पक्ष को न्याय मिल पाता है या दूसरे मामलों की तरह, यह मसला भी ऊंची रसूख और पहुंच के चलते बीच में ही दब जाता है।
यह है पूरा मसला, जिसको लेकर लगाए जा रहे आरोप:
शिवकुमारी पत्नी देव कुमार, निवासी पड़रछ, ने पुलिस अधीक्षक को भेजे पत्र में बताया है कि उसका मायका चोपन थाना क्षेत्र के वर्दिया में है। उसके पिता विश्वनाथ को सिर्फ तीन ही पुत्रियां थीं: शिकायतकर्ता शिवकुमारी, कमली और सुखनी। पिता विश्वनाथ की मृत्यु के बाद, वरासत के रूप में पिता के नाम रही जमीन के कागजात में मां भगमनिया का नाम दर्ज हुआ। चूंकि पिता को कोई पुत्र नहीं था, इसलिए वरासत में सिर्फ मां का नाम दर्ज किया गया। मां की मृत्यु के बाद, जमीन को लेकर कोई विवाद/संशय की स्थिति न रहे, इसके लिए मां भगमनिया ने अपने जीवन काल में सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में तीनों बेटियों के नाम समस्त चल-अचल संपत्ति के लिए एक पंजीकृत वसीयतनामा (registered will) निष्पादित कराया। इस वसीयतनामे में यह बात स्पष्ट रूप से उल्लिखित की गई थी कि उनकी सिर्फ तीन बेटियां हैं। वर्दिया गांव के तीन लोगों ने भी तीन बेटियां होने की बात बतौर गवाह दर्ज कराई थी।
बहाना बनाकर टाली जाती रही वरासत, चोरी-छिपे भतीजे को करार दिया गया बेटा:
पीड़ित पक्ष के मुताबिक, 15 जुलाई 2014 को भगमनिया की मृत्यु हो गई। इसके बाद वरासत के लिए क्षेत्रीय लेखपाल से बीच-बीच में संपर्क किया जाता रहा, लेकिन कोई न कोई बहाना बनाकर मामले को टाला जाता रहा। आरोप है कि इस बीच जनवरी 2021 में क्षेत्रीय लेखपाल की तरफ से भतीजे को बेटा प्रमाणित करते हुए, क्षेत्रीय कानूनगो के सामने रिपोर्ट प्रस्तुत कर, सही तथ्य को छिपाते हुए उनसे, बेटे बने भतीजे के नाम वरासत का आदेश दर्ज करा लिया गया। इस कथित फर्जीवाड़े के लिए जिस कुटुंब रजिस्टर (family register) का इस्तेमाल किया गया, उसमें पिता के नाम में 'ललई उर्फ विश्वनाथ' नाम अंकित करते हुए हेरफेर की गई। जबकि 'ललई' के नाम वाले कुटुंब रजिस्टर में जहां बेटियों या भगमनिया का नाम अंकित नहीं है, वहीं उस कुटुंब रजिस्टर में, जिसमें परिवार के मुखिया विश्वनाथ हैं, किसी 'ललई' या कथित बेटा बने भतीजे 'रामचंदर' का कोई नाम अंकित नहीं है।
मामले की कराई जाए गहन जांच तो सामने आएंगे चौंकाने वाले सच:
पीड़िता पक्ष का दावा और आरोप है कि मामले में कथित क्षेत्रीय लेखपाल के रसूख के चलते कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। उनका मानना है कि अगर इस मामले की गहन जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए तो सारा सच तो सामने आएगा ही, साथ ही यह भी खुलासा हो सकता है कि वरासत और जमीनों के नामांतरण में कोई बड़ा रैकेट तो काम नहीं कर रहा है। बताते चलें कि बेटे के न होने पर बेटियों के नाम वरासत का नियम है।
जांच के परिणाम पर टिकी है लोगों की निगाहें:
अगर किसी दूसरे के नाम वरासत की जा रही है, तो इसके लिए गांव के प्रधान के लिखित प्रमाणपत्र सहित अन्य कागजातों और प्रक्रिया की जरूरत पड़ती है, लेकिन जैसा दावा किया जा रहा है, उसके मुताबिक जिस परिवार के मुखिया विश्वनाथ या भगमनिया हैं, उसके कुटुंब रजिस्टर तक को जांचने की जरूरत नहीं समझी गई। फिलहाल, लगाए जा रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है, इसकी जानकारी तो पुलिस या उच्चस्तरीय जांच के बाद ही सामने आएगी। प्रकरण को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं बनी हुई हैं।


