CM योगी की पहल से निखर रहा बेटियों का भविष्य, मिल रही शिक्षा और सुरक्षा

CM योगी की पहल से बेटियों को शिक्षा, सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और खेलों में मिल रही नई उड़ान, KGBV बना बदलाव की पहचान।

Shivam Shrivastava
Published on: 6 Sept 2025 4:44 PM IST
CM योगी की पहल से निखर रहा बेटियों का भविष्य, मिल रही शिक्षा और सुरक्षा
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Yogi Adityanath (Photo: Social Media)

UP News: शिक्षक दिवस के अवसर पर जब पूरे देश में गुरुओं के योगदान को याद किया जा रहा है, उसी क्रम में उत्तर प्रदेश में बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण की भी मिसाल देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) बेटियों के लिए शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन चुके हैं। यहां शिक्षा ही नहीं, बल्कि खेल, डिजिटल दक्षता, आत्मरक्षा और जीवन कौशल का समावेश करके बेटियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय आज उत्तर प्रदेश में बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण का मजबूत आधार बन गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि हर बेटी सुरक्षित माहौल में पढ़े, आगे बढ़े और अपनी मंजिल हासिल करे। शिक्षक दिवस के अवसर पर यह उपलब्धियां इस बात की गवाही हैं कि बेटियों की शिक्षा ही उज्ज्वल भविष्य का रास्ता है।

आवासीय शिक्षा से निखर रहा भविष्य

प्रदेश के शैक्षिक रूप से पिछड़े ब्लॉकों में स्थापित 746 केजीबीवी में 1.21 लाख बालिकाओं के लिए कक्षा 6 से 12 तक आवासीय शिक्षा की व्यवस्था है। इनमें 75 प्रतिशत सीटें एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्गों की बालिकाओं के लिए आरक्षित हैं, जबकि 25 प्रतिशत सीटों पर बीपीएल परिवारों की बेटियों को प्रवेश दिया जाता है। यह व्यवस्था उन बच्चियों के लिए जीवनरेखा साबित हुई है, जिन्हें पहले शिक्षा का अवसर मुश्किल से मिल पाता था।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में डिजिटल सहयोग

सभी विद्यालयों में आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लास स्थापित किए गए हैं। खान एकेडमी के सहयोग से ऑनलाइन अभ्यास की सुविधा उपलब्ध है, वहीं आईआईटी गांधीनगर की मदद से ‘क्यूरियॉसिटी प्रोग्राम’ चलाया जा रहा है। इसके अलावा ‘एक शब्द एक सूत्र’ पहल के जरिए प्रतिदिन बच्चियों को नया शैक्षिक कंटेंट मिलता है। हर बालिका का नियमित शैक्षिक मूल्यांकन और रेमेडियल क्लासेज भी आयोजित होते हैं।

खेलों में भी बेटियां साबित कर रहीं दम

केजीबीवी की बालिकाएं अब खेलों के मैदान में भी चमक बिखेर रही हैं। प्रदेश की 222 बालिकाओं ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में और 35 बालिकाओं ने राष्ट्रीय स्तर पर भाग लेकर अपनी प्रतिभा साबित की है। "एक केजीबीवी एक खेल" योजना के अंतर्गत बच्चियों को खेलों में विशेषज्ञता दिलाई जा रही है।

सुरक्षित माहौल और आत्मरक्षा प्रशिक्षण

सभी विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा गार्ड, ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली और सुरक्षित बाउंड्रीवॉल की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के साथ आत्मरक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया है। अब तक 9.55 लाख से अधिक बालिकाओं को रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण (जूडो-कराटे) दिया गया है। इसके अतिरिक्त 80,000 बालिकाओं को गरिमा कार्यक्रम के अंतर्गत MHM प्रशिक्षण, और 2.60 लाख से अधिक बच्चियों को अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया है।

जीवन कौशल और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

बेटियों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन कौशल, वित्तीय साक्षरता और डिजिटल दक्षता से भी लैस किया जा रहा है।

1.87 लाख बालिकाओं को वित्तीय साक्षरता प्रशिक्षण दिया गया।

2.28 लाख बालिकाओं को डिजिटल कुशलता प्रशिक्षण मिला।

1.03 लाख बालिकाओं को पावर एंजिल के रूप में प्रशिक्षित किया गया।

45 हजार से अधिक सुगमकर्ता और 38 हजार शिक्षिकाएं दीक्षा ऐप से जीवन कौशल प्रशिक्षण पा चुकी हैं।

प्रेरणादायी उपलब्धियां

केजीबीवी की बेटियों ने अपनी मेहनत और लगन से प्रदेश का नाम रोशन किया है।

उन्नाव की अर्चना निषाद अंडर-19 वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा बनीं।

अमरोहा की निधि एसडीएम के पद पर चयनित हुईं।

महोबा की निंदा खातून ने नीट परीक्षा पास कर एमबीबीएस में प्रवेश पाया।

प्रयागराज की संध्या सरोज और प्रतापगढ़ की रिया पटेल जापान भ्रमण पर गईं।

अवसंरचना विकास और नई सुविधाएं

सरकार ने इन विद्यालयों में कंप्यूटर लैब, अतिरिक्त डॉरमेट्री, टॉयलेट ब्लॉक, ओपन जिम, एस्ट्रोनॉमिकल लैब और म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट जैसी सुविधाएं मुहैया कराई हैं। साथ ही, माध्यमिक विद्यालयों में भी सीसीटीवी कैमरे, हेल्पलाइन पट्टिका, सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था की गई है।

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Shivam Shrivastava
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Shivam Shrivastava

शिवम उत्तर प्रदेश के एक युवा और उभरते पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 4 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। वे राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और हाइपरलोकल खबरों की गहरी समझ रखते हैं और समसामयिक मुद्दों पर सटीक व प्रभावशाली रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी विशेष रुचि डाटा-ड्रिवन पत्रकारिता और विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग में है, जिससे उनकी खबरें अधिक तथ्यात्मक और विश्वसनीय बनती हैं। वे जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप को भी समझते हैं। लेखन और रिसर्च में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक सक्षम और जिम्मेदार पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।

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