EV charging stations: उत्तर प्रदेश में EV चार्जिंग स्टेशनों को मिलेगी बड़ी सब्सिडी: अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर लागत भी अब दायरे में

EV charging stations: भारत में पहली बार, यूपी सरकार ने चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए नीति में किया अहम संशोधन; चार्ज पॉइंट ऑपरेटर्स को मिलेगी 10 लाख तक की पूंजी सब्सिडी

Newstrack Network
Published on: 30 Jun 2025 11:08 PM IST
EV charging stations: उत्तर प्रदेश में EV चार्जिंग स्टेशनों को मिलेगी बड़ी सब्सिडी: अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर लागत भी अब दायरे में
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उत्तर प्रदेश में EV चार्जिंग स्टेशनों को मिलेगी बड़ी सब्सिडी   (photo: social media )

EV charging stations: इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) इकोसिस्टम को मजबूत करने और सेवा प्रदाताओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार ने चार्जिंग स्टेशनों की अपस्ट्रीम अवस्थापना (इंफ्रास्ट्रक्चर) लागत को ईवी सब्सिडी ढांचे में शामिल करने को मंजूरी दे दी है। यह महत्वपूर्ण निर्णय मई 2025 में मुख्य सचिव, श्री मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय प्राधिकृत इलेक्ट्रिक वाहन समिति (HLEEVC) की बैठक में लिया गया। इस पहल से राज्य में ईवी अपनाने की गति को और बल मिलने की उम्मीद है।

भारत में पहली बार: अपस्ट्रीम लागत पर सब्सिडी

यह भारत में पहली बार है कि पात्र नियत पूंजी निवेश – जिसके आधार पर प्रति यूनिट ₹10 लाख तक पूंजी अनुदान (कैपिटल सब्सिडी) मिलती है – अब नीति अवधि के दौरान अपस्ट्रीम अवस्थापना (इंफ्रास्ट्रक्चर) लागत को भी कवर करेगा। यह सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों (PCS) की क्षमता और व्यावसायिक व्यवहार्यता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। प्रदेश में इस नीति के क्रियान्वयन के लिए इन्वेस्ट यूपी को नोडल एजेंसी बनाया गया है।

उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण एवं गतिशीलता नीति–2022 में किए गए इस संशोधन से चार्ज पॉइंट ऑपरेटर्स की एक प्रमुख समस्या का समाधान होगा। पहले, अपस्ट्रीम लागत को पात्र निवेश में शामिल नहीं किया जाता था, जिसके कारण ऑपरेटर न्यूनतम ₹25 लाख की निवेश सीमा पूरी नहीं कर पाते थे और सब्सिडी से वंचित रह जाते थे। इस बदलाव से अब अधिक से अधिक ऑपरेटर सब्सिडी का लाभ उठा सकेंगे।

आकर्षक प्रोत्साहन और राज्य का लक्ष्य

नीति के अंतर्गत राज्य में चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना करने वाले ऑपरेटरों को आकर्षक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। उन्हें एक बार (एकल) पूंजी अनुदान दिया जाता है। इसमें भवन निर्माण, सिविल वर्क्स, चार्जर, अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर (मीटर तक और मीटर के पीछे), बैटरी उपकरण, यूटिलिटीज, उपकरण और अन्य संबंधित परिसंपत्तियों (भूमि लागत को छोड़कर) पर हुए निवेश की 20% राशि, अधिकतम ₹10 लाख प्रति इकाई तक सब्सिडी के रूप में दी जाती है।

यह निर्णय उत्तर प्रदेश को भारत का अग्रणी ईवी विनिर्माण और गतिशीलता केंद्र बनाने के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है। वर्तमान में यह नीति सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन इकाइयों को 20% पूंजी सब्सिडी का समर्थन करती है, बशर्ते प्रत्येक यूनिट में ₹25 लाख या उससे अधिक का निवेश किया गया हो।

ईवी अपनाने में उत्तर प्रदेश की प्रगति

इस प्रगतिशील समावेश के साथ, उत्तर प्रदेश भारत का पहला राज्य बन गया है जिसने ईवी चार्जिंग स्टेशनों में अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सब्सिडी प्रदान करने का प्रावधान किया है, जिससे निवेश-हितैषी माहौल तैयार होगा और राज्य में ईवी अपनाने की गति को और बल मिलेगा।

भारत के तीसरे सबसे बड़े ऑटोमोबाइल बाजार, उत्तर प्रदेश में अब तक 12,72,206 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हो चुके हैं। विकास की इस गति को बनाए रखने के लिए, 450 से अधिक चार्जिंग स्टेशनों को GIS डैशबोर्ड पर जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा, 740+ ईवी बसें प्रमुख मार्गों पर तैनात की गई हैं और 15 शहरों में 116 ग्रीन रूट्स की पहचान की गई है, जिन पर अगले चरण में ईवी बसें चलाई जाएंगी। यह कदम राज्य के हरित परिवहन लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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