Varanasi News: छितौना गांव में जातीय हिंसा के बाद माहौल गर्म, क्षत्रिय संगठनों ने किया सड़क जाम

Varanasi News: वाराणसी के छितौना गांव में जातीय हिंसा के बाद तनाव गहराया। क्षत्रिय संगठनों ने सड़क जाम कर विरोध किया। प्रशासन अलर्ट पर, कार्रवाई का आश्वासन।

Ajit Kumar Pandey
Published on: 15 July 2025 4:51 PM IST
Atmosphere hot after ethnic violence in Chhitauna village
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छितौना गांव में जातीय हिंसा के बाद माहौल गर्म, क्षत्रिय संगठनों ने किया सड़क जाम (Photo- Newstrack)

Varanasi News: चौबेपुर थाना क्षेत्र के छितौना गांव में बीते दिनों हुई जातीय हिंसा के बाद हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। करणी सेना के खिलाफ सुभासपा के प्रदर्शन के बाद से इलाके में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

सड़क जाम कर किया विरोध, प्रशासन सतर्क

मंगलवार को करणी सेना और क्षत्रिय महासभा के सैकड़ों कार्यकर्ता छितौना के समीप संदहा पहुंचे। उन्होंने सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर और अन्य नेताओं के खिलाफ नारेबाजी की और अचानक गाजीपुर-वाराणसी मार्ग को जाम कर दिया। इससे घंटों यातायात प्रभावित रहा।

प्रशासन ने संभाली कमान, तैनात हुआ भारी पुलिस बल

पुलिस और प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए त्वरित कार्रवाई की। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की गई। क्षत्रिय महासभा के प्रदेश संरक्षक हरिशंकर सिंह ने कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की।

48 घंटे में कार्रवाई का दिया आश्वासन

प्रशासन और क्षत्रिय संगठनों की बैठक में यह तय हुआ कि समाज विशेष पर की गई कथित टिप्पणियों की जांच कर 48 घंटे के भीतर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, प्रदर्शन पूरी तरह शांत नहीं हुआ और कुछ देर तक विरोध जारी रहा।

इलाके में तैनात पुलिस छावनी, ड्रोन से निगरानी

स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए छितौना और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। दोपहर बाद फिर से कुछ कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे, लेकिन पुलिस की सूझबूझ से हालात बिगड़ने से रोक लिए गए।

प्रशासन की अपील: अफवाहों से बचें, शांति बनाए रखें

प्रशासन ने आम जनता से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया है।

राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों पर असर

यह घटना न केवल सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर रही है, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी चुनौती बनकर सामने आई है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन अपने वादों पर कितना खरा उतरता है।

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