स्क्रीन, स्ट्रेस और भागदौड़ भरी जिंदगी से सुकून पाने के लिए आज से ही अपनाएं ये 5 नाइट रूटीन, मिलेगी

Ayurvedic Sleep Tips: आयुर्वेद जो कि 5,000 साल पुराना प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान है ऐसे कुछ आसान और असरदार रात्रि नियम बताता है, जिन्हें अपनाकर आप नींद की गुणवत्ता को बेहतर बना सकते हैं।

Ragini Sinha
Published on: 5 Aug 2025 11:42 AM IST (Updated on: 5 Aug 2025 11:42 AM IST)
स्क्रीन, स्ट्रेस और भागदौड़ भरी जिंदगी से सुकून पाने के लिए आज से ही अपनाएं ये 5 नाइट रूटीन, मिलेगी
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Ayurvedic Sleep Tips: आज के समय में मोबाइल स्क्रीन, तनाव और बिगड़ी दिनचर्या की वजह से गहरी नींद लेना किसी लग्ज़री से कम नहीं है। लेकिन आयुर्वेद जो कि 5,000 साल पुराना प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान है ऐसे कुछ आसान और असरदार रात्रि नियम बताता है, जिन्हें अपनाकर आप नींद की गुणवत्ता को बेहतर बना सकते हैं। ये उपाय न केवल नींद लाते हैं, बल्कि आपके शरीर के तीनों दोषों को भी संतुलित करते हैं, जिससे शरीर खुद को ठीक करने और फिर से ऊर्जा प्राप्त करने में सक्षम होता है।

यहाँ जानिए 5 असरदार आयुर्वेदिक आदतें जो रात को बेहतर नींद लाने में आपकी मदद करेंगी


तेल मालिश करें

सोने से पहले हल्के हाथों से सिर, पैर, गर्दन और कंधों की गर्म तिल या बादाम तेल से मालिश करने को अभ्यंग कहा जाता है। इससे नसों को आराम मिलता है और चिंता कम होती है जो नींद न आने की बड़ी वजह है। खासतौर पर पैरों की मालिश करने से वात दोष शांत होता है, जिससे दिमाग शांत होता है और नींद जल्दी आती है।

गर्म हर्बल दूध या चाय पिएं

रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में थोड़ा जायफल, अश्वगंधा, हल्दी या केसर मिलाकर पीना बेहद फायदेमंद होता है। ये नर्वस सिस्टम को शांत करता है और शरीर में नेचुरल मेलाटोनिन बढ़ाता है। अगर आप दूध नहीं पीते, तो तुलसी, ब्राह्मी या कैमोमाइल जैसी हर्बल चाय भी ले सकते हैं।

नाक में तेल डालना

नस्य एक आयुर्वेदिक पद्धति है जिसमें रात को सोने से पहले नाक में 2-2 बूंद गाय का घी या अनु तेल डाला जाता है। इससे नाक की सूजन और ड्रायनेस कम होती है, मानसिक थकान दूर होती है और गहरी नींद आती है। यह माइग्रेन या सांस संबंधी दिक्कतों वालों के लिए बहुत फायदेमंद है।

माथे पर ठंडी पट्टी और ध्यान

अगर आप सिरदर्द या मानसिक अशांति से जूझते हैं, तो सिर पर ठंडी गीली पट्टी रखें और 10 मिनट गहरी सांस लें या ध्यान करें। इससे पित्त और वात दोनों दोष शांत होते हैं। धीमी धुन या मंत्रों का उपयोग करके यह ध्यान और प्रभावशाली बनाया जा सकता है।


डिजिटल डिटॉक्स करें

सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप या टीवी से दूरी बना लें। इनकी नीली रोशनी मेलाटोनिन को दबा देती है, जिससे नींद आने में परेशानी होती है। इसके बदले हल्की पीली रोशनी या मोमबत्ती का प्रयोग करें जिससे दिमाग को “अब सोने का समय है” यह संकेत मिले।

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Ragini Sinha is a Former News Publisher at Newstrack.com.

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