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क्या भाजपा का मायाजाल बनती जा रही है मायावती की बसपा?
दलित वोट छोड़ मुस्लिम-पिछड़ों पर बसपा का नया फोकस, भाजपा की बी टीम के आरोपों में घिरी मायावती, रैलियों से बढ़ी सियासी हलचल।
BJP BSP (Image from Social Media)
सत्ता से बसपा के वनवास के चौदह साल होने वाले हैं। क़रीब तीन दशक तक सियासत के नीले आसमान पर अपनी असरदार मौजूदगी की चमक बिखेरती रही बसपा के दुर्दिन के कारण बहुत से हैं- निष्क्रियता, जमीनी संघर्ष ना करना, सत्ता की नीतियों को लेकर आक्रामक तेवरों के बजाय सरकार के प्रति नर्म रवैया, सरकार के बजाय विपक्षी खेमों पर ही हमलावर होना, साथ छोड़ रहे अपने आधार दलित समाज की वापसी की कोशिश के बजाय केवल मुस्लिम समाज पर बार-बार डोरे डालना। चुनावी हार के बाद मुस्लिम समाज पर हार का ठीकरा तोड़ना,
इन तमाम कमजोरियों से जन्म लेने वाली एक तोहमत बसपा की नई नवेली सक्रियता पर भी पानी फेर सकती है।
इस घातक इल्जामों का शोर पार्टी के सर्वाइवल की सबसे बड़ी रुकावट बन रहा है। ये इल्ज़ाम है कि बसपा अब सिर्फ भाजपा हित को समर्पित हो गई है। खुद की जीत के लिए नहीं बल्कि सपा को हराने और भाजपा को जिताने के लिए सत्तारूढ़ दल की बी टीम की अप्रत्यक्ष भूमिका निभा रही है बसपा !
आरोपों के ऐसे चक्रव्यूह में फंसीं पार्टी सुप्रीमो मायावती की हालिया रैली की सफलता अकल्पनीय रही, ऐसे में विरोधियों की बेचेंगी ने बसपा पर तोहमतों की बारिश तेज़ कर दी। बी टीम जैसे जुमले का प्रमोशन कर कहा जाने लगा कि "भाजपा का मायाजाल है बसपा"।
"जब जब कमल कुम्हलाता है,
हाथी कीचड़-पानी लाता है"।
इंडिया गठबंधन के समर्थन में एकजुट मुस्लिम समाज और पिछड़ी जातियों के वोट कतरनें के लिए बसपा सक्रिय हुई है। ऐसे बयान दे रहे बसपा विरोधियों का कहना है कि भाजपा की घबराहट की दलील है बसपा की सक्रियता।
ये सच है कि अर्से बाद सफल रैली कर अपना शक्ति प्रदर्शन कर जहां मायावती ने अपनी ताकत और मौजूदगी का अहसास कराया वहीं बी टीम के हमलों को खुद गाढ़ा कर दिया। वो सत्ता पर कम और विपक्ष यानि सपा-कांग्रेस पर बहुत अधिक आक्रामक रहीं। बल्कि पार्क के रखरखाव के मामले में तो उन्होंने यूपी की योगी सरकार की खूब तारीफ की और आभार व्यक्त किया।
सफलतम रैली के बाद पार्टी सुप्रीमो मायावती अपनी सक्रियता जारी रखें हैं। वो अकलियत के मुद्दों पर मुखर कुछ ज्यादा ही हैं। बुल्डोजर कार्रवाई से लेकर मुस्लिम लड़कियों पर अपशब्द बोलने वाले भाजपा पूर्व विधायक के खिलाफ ताबड़तोड़ उन्होंने बयान दिए। मुस्लिम भाईचारा कमेटियों के बाद पिछड़ा वर्ग भाईचारा संगठन की बैठक भी की गई।
राजनीति पंडितों और मुश्किल बुद्धीजीवियो की मानें तो मुसलमान एकजुट होकर उस राजनीतिक शक्ति की ताकत बनता है जो भाजपा को टक्कर देने के लिए सबसे अधिक बलवान हो।जिस भाजपा विरोधी दल के पास गैर मुस्लिम वोटों का आधार हो मुस्लिम उसके साथ आकर एक और एक ग्यारह की ताकत बनना चाहता है। ऐसे में अकलियत का बसपा संग आना काफी मुश्किल है। इस दौरान अपने आधार दलित समाज की वापसी की कोशिशों के बजाय केवल अकलियत पर डोरे डालने से ये परसेप्शन बनने लगा है कि मुस्लिम वोट में बंटवारा कराने की साजिशों को अंजाम देने की कोशिशें हो रही हैं। भाजपा से ऊब चुका दलित बसपा की मुस्लिम परस्ती देखकर घर वापसी करने में झिझकेगा। यूपी की आबादी में बीस फीसद की तादाद वाला मुस्लिम समाज पिछले लोकसभा चुनाव से उत्साहित हैं। यहां इंडिया गठबंधन (सपा और कांग्रेस) ने 43 लोकसभा सीटें जीतकर इतिहास रच ताकतवर भाजपा को धराशाई कर दिया था। और इंडिया गठबंधन ने 43.52 फीसद वोट हासिल किए था।
इधर बसपा ने निरंतर हारने और हाशिए पर आ जाने के बाद भी भाजपा से दलित वापसी के सार्थक प्रयास नहीं किए। अपने पारंपरिक दलित वोटबैंक को मजबूत कर मुस्लिम, पिछड़े और ब्राह्मण को जोड़ने का सामाजिक समीकरण बनाया जाता तो बेहतर था।
अपने आधार वोट बैंक दलित समाज से जुड़ी अन्यायपूर्ण घटनाओं के खिलाफ शिद्दत से जमीन पर आवाज ना उठाकर मुस्लिम और पिछड़ों की राजनीति में मुखर होती बसपा की रणनीति सपा को कमजोर करने की कोशिश प्रतीत हो रही है। राजनीति की आम समझ रखने वाला यूपी का आम आदमी भी ये जानता है कि यदि मायावती अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक की सौ फीसद वापसी का संघर्ष करने के लिए दलितों के मुद्दो को लेकर जमीनी संघर्ष करें तो सफलता मिलना मुश्किल नहीं, जबकि पिछड़ी जातियों और मुसलमानों का कुछ वोट अपनी ओर लाने से बसपा को लाभ की उम्मीद कम पर मुस्लिम वोट बिखराव से भाजपा को फायदे की संभावना अधिक है। सरकार के प्रति ज्यादा आक्रमक ना होकर सपा-कांग्रेस को घेरना और दलितों के मुद्दों को रफ्तार ना देना उस वर्ग को नाखुश कर रहा है जो सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। खासकर यूपी का मुस्लिम समाज जो पिछले लोकसभा चुनाव में इंडियन गठबंधन के साथ एकजुट था उसे लगने लगा है कि भाजपा अपना माया जाल बिछाकर बसपा के जरिए इंडिया गठबंधन को समर्पित एकजुट मुस्लिम वोट बैंक के बिखराव की साज़िश कर रही है।


