Chandauli News: बीस साल चला मुकदमा, सजा मिली अदालत उठने तक की, जानिए क्या था पूरा मामला

Chandauli News: इसका प्रमाण चंदौली जिले से सामने आया एक 20 साल पुराना मामला है, जिसमें न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाते हुए अदालत उठने तक की सजा और ₹2000 का जुर्माना सुनाया है।

Sunil Kumar
Published on: 4 Aug 2025 8:24 PM IST
Chandauli News: बीस साल चला मुकदमा, सजा मिली अदालत उठने तक की, जानिए क्या था पूरा मामला
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बीस साल चला मुकदमा   (photo: social media )

Chandauli News: उत्तर प्रदेश पुलिस के 'ऑपरेशन कन्विक्शन' के तहत न्याय प्रणाली में तेजी लाने की मुहिम रंग ला रही है। इसका प्रमाण चंदौली जिले से सामने आया एक 20 साल पुराना मामला है, जिसमें न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाते हुए अदालत उठने तक की सजा और ₹2000 का जुर्माना सुनाया है। यह मामला यह दर्शाता है कि चाहे मामला कितना भी पुराना हो, कानून से बचना संभव नहीं है।

क्या था मामला?

यह मामला 27 जून 2005 का है। चंदौली जिले के सैयदराजा थाने में संतोष प्रसाद नामक व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 293 (अश्लील वस्तुएं बेचना आदि) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। यह मामला वर्षों तक लंबित रहा और न्याय प्रक्रिया धीमी गति से चलती रही। लेकिन हाल ही में उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक के निर्देशों पर इस पुराने केस को फिर से सक्रिय किया गया।

वैज्ञानिक विवेचना और प्रभावी पैरवी ने दिलाई सजा

इस मुकदमे में निर्णायक भूमिका चंदौली पुलिस की विवेचना टीम और अभियोजन पक्ष ने निभाई। मॉनिटरिंग सेल प्रभारी निरीक्षक मुकेश तिवारी, सहायक अभियोजन अधिकारी विजय कुमार पांडेय, तथा सैयदराजा थाने के पैरोकार सिपाही राजीव प्रजापति की मेहनत रंग लाई। उन्होंने न्यायालय में सभी साक्ष्य प्रमाणित रूप से प्रस्तुत किए, जिससे आरोपी की दोषसिद्धि संभव हो सकी।

क्या सजा मिली?

4 अगस्त 2025 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट इशरत परवीन फारुकी की अदालत ने आरोपी को "न्यायालय उठने तक की सजा" सुनाई। इसके अतिरिक्त ₹2000 का जुर्माना लगाया गया। न्यायालय ने यह भी कहा कि जुर्माना न भरने की स्थिति में आरोपी को 4 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

क्या है 'ऑपरेशन कन्विक्शन'?

उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा चलाया जा रहा 'ऑपरेशन कन्विक्शन' अभियान उन पुराने और लंबित मामलों में तेज कार्रवाई और दोषियों को सजा दिलाने की दिशा में एक प्रभावी कदम है। यह न केवल पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में सहायक है, बल्कि समाज में अपराधियों के लिए सख्त संदेश भी देता है कि कानून की पकड़ से कोई नहीं बच सकता।

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