Chandauli News: शिक्षा के अधिकार के लिए जंगः नौगढ़ के पड़रिया में ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना

Chandauli News: ग्रामीणों का कहना है कि यह मर्जर बच्चों की सुरक्षा और उनकी पढ़ाई के लिए बड़ा खतरा है।

Sunil Kumar
Published on: 17 Aug 2025 2:09 PM IST
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Chandauli News: चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील का पड़रिया गांव आजकल एक अनोखी जंग का गवाह बन रहा है। यह जंग किसी राजनीतिक सत्ता के लिए नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा के अधिकार के लिए है। गांव के लोग अपने प्राथमिक विद्यालय को पास के धनकुवारी प्राथमिक विद्यालय में मर्ज किए जाने के सरकारी फैसले के खिलाफ एक जुट होकर खड़े हो गए हैं। इस फैसले से नाराज़ गांव के युवा, बुजुर्ग और नन्हे-मुन्ने बच्चों ने मिलकर एक अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यह धरना तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार अपना आदेश वापस नहीं ले लेती।

क्यों हो रहा है विरोध?

ग्रामीणों का कहना है कि यह मर्जर बच्चों की सुरक्षा और उनकी पढ़ाई के लिए बड़ा खतरा है। पड़रिया प्राथमिक विद्यालय और धनकुवारी प्राथमिक विद्यालय के बीच की दूरी लगभग 2 से 3 किलोमीटर है। इसके अलावा, रास्ते में नदी और जंगल भी पड़ते हैं, जिससे छोटे बच्चों का अकेले जाना बहुत जोखिम भरा है। खासकर बारिश के मौसम में, यह रास्ता बच्चों के लिए लगभग अगम्य हो जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि इस कदम से बच्चों की शिक्षा बीच में ही छूट सकती है, क्योंकि गरीब परिवारों के लिए हर दिन बच्चों को दूर छोड़ने जाना संभव नहीं होगा।

एक साथ आया पूरा गांव

इस विरोध प्रदर्शन में गांव के हर वर्ग के लोग शामिल हैं। समाजसेवी अनिल सिंह यदुवंशी और सुमित्रानंदन यादव के नेतृत्व में, भीम आर्मी पार्टी और समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी भी इस मुहिम में शामिल हो गए हैं, जो इस आंदोलन को एक मजबूत राजनीतिक समर्थन भी दे रहे हैं। ग्रामीणों का यह दृढ़ निश्चय सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील कर रहा है।

महेश कुमार, राम लखन, गोविंद, गणेश, संदीप, राम केश, कृष्णानंदन, नागेश्वर, राम जन्म, दीपक, मुलायम, आनंद, मेवा लाल मौर्य, चंद्रावती, सुमित्रा, मालती जैसे दर्जनों लोग दिन-रात इस धरने में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। उनका मानना है कि शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है और सरकार को इसे सुरक्षित रखने का प्रयास करना चाहिए, न कि इसे बाधित करना। यह आंदोलन केवल एक गांव की लड़ाई नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की एक महत्वपूर्ण मिसाल बन रही है।

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