Chandauli Savan Special: चंदौली के पहाड़ों में स्थित जागेश्वर महादेव मंदिर की अनूठी विशेषताएं और याज्ञवल्क्य ऋषि की मान्यता

Chandauli Savan Special: चंदौली के पहाड़ों में स्थित जागेश्वर महादेव मंदिर की अनोखी मान्यताएं: याज्ञवल्क्य ऋषि आज भी करते हैं पूजा, शिवलिंग में होती है वृद्धि; जानें और क्या है खास

Ashvini Mishra
Published on: 13 July 2025 9:42 PM IST
X

Chandauli Savan Special: सावन के पवित्र महीने में शिव भक्तों की भीड़ मंदिरों में उमड़ रही है। इसी क्रम में चंदौली जनपद के चकिया के पहाड़ों के बीच स्थित बाबा जागेश्वर नाथ मंदिर अपनी कई अनूठी विशेषताओं और मान्यताओं के कारण विशेष महत्व रखता है। लोकमान्यता है कि इस मंदिर में महर्षि याज्ञवल्क्य आज भी पूजा करने आते हैं, जो इसे आध्यात्मिक रूप से और भी पवित्र बनाता है।

इस स्वयंभू बाबा जागेश्वर नाथ की एक और अद्भुत विशेषता यह है कि उनका शिवलिंग प्रति वर्ष एक तिल के बराबर बढ़ता है। मंदिर के पुजारी के अनुसार, अब तक सात बार शिवलिंग का अर्घा (जलहरी) टूट चुका है, जिससे शिवलिंग के आकार में वृद्धि की पुष्टि होती है। भक्तों का मानना है कि जो सच्चे भाव से इनकी पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

चंद्रप्रभा नदी के किनारे स्थित इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। काशीखंड के शिवलिंगों में भी जागेश्वर महादेव का बखान मिलता है। बताया जाता है कि यह स्थान महर्षि याज्ञवल्क्य की तपोभूमि रहा है। उनके तप से प्रभावित होकर भगवान शंकर ने उनको दर्शन दिए थे, जिसके बाद इस शिवलिंग का नाम योगेश्वर महादेव पड़ा। समय के साथ नाम का अपभ्रंश हुआ और लोग इसे जागेश्वर महादेव के नाम से जानने लगे।

मंदिर से जुड़ी एक और प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार महाराजा काशी नरेश का महावत अपने हाथी को लेकर शिवलिंग के पास पहुंचा। पीपल की टहनियां काटते समय उसकी कुल्हाड़ी फिसल गई और शिवलिंग पर गिरी। कहते हैं कि इससे शिवलिंग से खून की धार निकल गई थी, जिसे देखकर हाथी और महावत दोनों ही पागल हो गए थे।

एक और चमत्कारी विशेषता यह है कि भगवान शिव के अर्घा से अविरल पानी की धारा निकलती है, जो एक कुंड का रूप ले लेती है। यह कुंड पूरे 12 महीने पानी से भरा रहता है और बगल में बह रही चंद्रप्रभा नदी में जाकर मिलता है। इस कुंड से निकलने वाला पानी इतना शुद्ध माना जाता है कि हर कोई दर्शनार्थी इसे पीता है। बहुत से लोग यहाँ भोजन प्रसाद के रूप में बनाकर खाते भी हैं।

सावन के महीने में यहाँ एक बड़ा मेला लगता है। चंदौली और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग यहाँ पहुंचकर दर्शन-पूजन करते हैं और पुण्य लाभ कमाते हैं। यह मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के कारण भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बना हुआ है।

1 / 8
Your Score0/ 8
Ashvini Mishra
ABOUT THE AUTHOR

Ashvini Mishra

मैं 2006 से पत्रकारिता कर रहा हूं, शुरुआत समाचार ज्योति दैनिक पेपर से की,फिर 2010 से इलेक्ट्रानिक मीडिया के क्षेत्र में A2Z न्यूज चैनल ज्वाइन किया, फिर K news में रहा, इसके बाद कैमूर टाइम्स और चंदौली समाचार से होते हुए वर्तमान में न्यूज ट्रैक के लिए काम कर रहा हूं।

Next Story