Kushinagar News: यूरिया की किल्लत से बेहाल किसान, 500 रूपये प्रति बोरा तक बिक रही है यूरिया

Kushinagar News: निजी दुकानों पर यह खाद 400 से 500 रुपये प्रति बोरा की दर से ब्लैक में बिक रही है।

Mohan Suryavanshi
Published on: 23 Jun 2025 3:54 PM IST
Urea selling for Rs 500 per sack in Kushinagar, Farmers upset
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कुशीनगर में 500 रूपये प्रति बोरा बिक रही है यूरिया, किसान परेशान (Photo- Newstrack)

Kushinagar News: कुशीनगर। जनपद कुशीनगर में यूरिया की भारी किल्लत के बीच कालाबाजारी और जबरन टैगिंग की शिकायतें सामने आने लगी हैं। किसान समितियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन यूरिया नदारद है। वहीं, निजी दुकानों पर यह खाद 400 से 500 रुपये प्रति बोरा की दर से ब्लैक में बिक रही है। हालांकि खड्डा क्षेत्र में एक किसान की शिकायत पर सूबे के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए। शिकायत की पुष्टि होने पर खड्डा कस्बे में संचालित चौरसिया उर्वरक केंद्र की दुकान को सील कर उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है।

टैगिंग कर जबरन थमाए गए अन्य उत्पाद

किसान दुर्गेश कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया था कि उनसे छह बोरी यूरिया के साथ-साथ जबरन छह अन्य उत्पाद भी दिलवाए गए। इस पर जिला कृषि अधिकारी डॉ. मेनका ने खड्डा के सहायक विकास अधिकारी एजी दिवाकर मणि, वरिष्ठ सहायक लक्की तिवारी के साथ संयुक्त रूप से खाद केंद्र की जांच की। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर दुकान सील कर दी गई और लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया। डॉ. मेनका ने बताया कि शासन का स्पष्ट निर्देश है कि किसानों को उचित मूल्य पर केवल वही खाद दी जाए जिसकी आवश्यकता हो। किसी भी तरह की टैगिंग या ओवररेटिंग पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जिले में कई समितियों पर यूरिया नदारद

जनपद के रामकोला, हाटा, कसया, तमकुहीराज, नेबुआ नौरंगिया समेत कई क्षेत्रों की समितियों में यूरिया नहीं पहुंच रहा है। इससे किसान खासे परेशान हैं। धान व गन्ना की फसल की रोपाई शुरू हो चुकी है, लेकिन खाद के बिना उत्पादन पर संकट मंडरा रहा है।

नैनो यूरिया बना नहीं विकल्प

सरकार द्वारा प्रचारित नैनो लिक्विड यूरिया किसानों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है। किसान परंपरागत बोरे वाले यूरिया को ही प्रभावी बता रहे हैं।किसान संगठनों ने मांग की है कि खाद वितरण की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो ताकि जरूरतमंद किसानों को समय से खाद उपलब्ध हो सके।जनपद में खाद संकट को लेकर किसान अब सरकार से ठोस पहल की अपेक्षा कर रहे हैं, ताकि खेती-किसानी पटरी पर लौट सके।

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