प्रोस्टेट कैंसर मरीजों के लिए राहत की खबर! न्यूक्लीयर थेरेपी बनेगी संजीवनी

Lucknow News: जब कैंसर की दूसरी दवाएं होंगी फेल तो फेल न्यूक्लीयर थेरेपी करेगा रास्ता आसान

Shubham Pratap Singh
Published on: 7 Sept 2025 3:40 PM IST
प्रोस्टेट कैंसर मरीजों के लिए राहत की खबर! न्यूक्लीयर थेरेपी बनेगी संजीवनी
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Lucknow News: प्रोस्टेट कैंसर की समस्या से परेशान मरीजों को राहत देने वाली खबर केजीएमयू से आ गयी है। जो मरीज प्रोस्टेट कैंसर की बीमारी से जूझ रहे हैं,अगर वो दवा से ठीक नही हुए तो उन्हें न्यूक्लीयर थेरेपी संजीवनी के उपयोग से ठीक किया जाएगा। इस थेरेपी की दो से तीन डोज से कैंसर हारने लगता है। यह जानकारी केजीएमयू न्यूक्लीयर मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रकाश सिंह ने दी।

न्यूक्लीयर मेडिसिन विभाग द्वारा मिली जानकारी शताब्दी-2 के न्यूक्लीयर मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रकाश सिंह ने बताया कि प्रोस्टेट कैंसर में मरीज को हड्डियों में भी भीषण दर्द होता है। बीमारी तेजी से फैलती है। कई मरीजों में कीमोथेरेपी समेत दूसरी दवाएं बेअसर साबित होती हैं। ऐसे मरीजों के लिए न्यूक्लीयर थेरेपी आशा की किरण है।

अबतक कई मरीजों को मिला जीवनदान

डॉ.सिंह ने बताया कि विभाग में न्यूक्लीयर थेरेपी से कई प्रोस्टेट मरीजों को नया जीवन मिला है। इससे उन्होंने कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को हराने में सफलता हासिल किया है। इसमें पेट स्कैन के बाद मरीज को न्यूक्लीयर थेरेपी दी जाती है। खास बात यह है कि दवा स्वस्थ्य कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचाती है। सिर्फ कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती है। दो महीने में एक डोज देने की जरूरत पड़ती है। कुल तीन से चार डोज में मरीज को काफी राहत मिल जाती है। कई मरीजों में तो बीमारी पूरी तरह से ठीक भी हो जाती है।

अबतक 4 हज़ार से ज़्यादा की कराई गई स्कैनिंग

विभाग की अध्यक्ष डॉ. कीर्ति श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक 4000 से अधिक पीईटी सीटी स्कैन और दो हजार ज्यादा स्पेक्ट केस किए हैं। इसके अलावा विभाग में विशेष थेरेपी वार्ड भी चल रहा है। शरीर में कैंसर कितना फैला है उसका पता लगाने में पीईटी जांच अहम है।

न्यूक्लियर मेडिसिन खोल रही नया रास्ता

कमांड हॉस्पिटल के न्यूक्लीयर मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनुराग जैन ने बताया कि कैंसर के इलाज में न्यूक्लियर मेडिसिन की तकनीक व्यक्तिगत व सटीक इलाज का नया रास्ता खोल रही है। पीईटी स्कैन शारीरिक क्रियाओं का अध्ययन करता है। यह कई कैंसरों का पता लगा सकता है। इलाज के बाद उसकी वापसी का पता लगाने और ट्यूमर के घातक होने या न होने का आकलन करने में मदद करता है।

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Shubham Pratap Singh is a Former Reporter at Newstrack.com.

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