Mathura News: राधा रानी के चरणों में 'पूर्ण समर्पण' से ही संभव है श्रीकृष्ण भक्ति- चंचलापति दास

Mathura News: मंदिर परिसर को विविध प्रकार के पुष्पों का चयन कर बडे़ ही मनोहारी रूप से सुसज्जित किया

Amit Sharma
Published on: 31 Aug 2025 9:07 PM IST (Updated on: 31 Aug 2025 11:20 PM IST)
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Mathura News: वृन्दावन। भक्ति वेदांत स्वामी मार्ग स्थित वृन्दावन चंद्रोदय मंदिर में ब्रज की अधिष्ठात्री देवी एवं भगवान श्रीकृष्ण की आल्हादिनी शक्ति श्रीमती राधा रानी का प्राकट्योत्सव ‘राधाष्टमी’ भक्तिमय वातावरण में उल्लासपूर्वक मनाया गया। मंदिर परिसर को विविध प्रकार के पुष्पों का चयन कर बडे़ ही मनोहारी रूप से सुसज्जित किया गया। इस अवसर पर श्रीश्री राधा वृन्दावन चंद्र का धूप आरती, नवीन परिधान धारण, पुष्प बंगला, झूलन उत्सव, छप्पन भोग, महाभिषेक, पालकी उत्सव एवं भजन संध्या का दिव्य आयोजन किया गया।

भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाए जाने वाले इस पर्व पर राधा रानी एवं वृन्दावन चंद्र का महाभिषेक वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न हुआ। पंचामृत दूध, दही, घी, शहद, बूरा विभिन्न फलों के रस, जड़ी-बूटियों एवं पुष्पों से महाभिषेक की प्रक्रिया को संपन्न कराया गया। इस अवसर पर ठाकुरजी को नीले एवं श्वेत वर्ण के रेशमी परिधानों के साथ रजत कढ़ाई युक्त वस्त्रों से अलंकृत किया गया।

राधा रानी भवसागर से पार लगाकर श्रीकृष्ण भक्ति प्रदान करती हैं

वृन्दावन चंद्रोदय मंदिर के अध्यक्ष श्री चंचलापति दास ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमती राधा रानी का एक नाम ‘भव व्याधि विनाशिनी’ है। जो भक्त उनके चरणों में पूर्ण समर्पण करता है, उन्हें राधा रानी भवसागर से पार लगाकर श्रीकृष्ण भक्ति प्रदान करती हैं एवं अपने निज धाम में आश्रय देती हैं।


उन्होंने आगे कहा कि जीव प्रकृति के तीनों गुणों के वश होकर जन्मदृमृत्यु के चक्र में फंसा रहता है, किन्तु राधा रानी अपने आश्रित भक्तों की माता की भांति रक्षा एवं पोषण करती हैं तथा उन्हें भक्ति मार्ग पर अग्रसर करती हैं।

हरिनाम संकीर्तन में भक्त हुए भाव विभोर

इस पावन अवसर पर हमें राधा रानी से निरंतर प्रार्थना करनी चाहिए कि वे हमें अपने चरणों की सेवा का अवसर प्रदान करें राधाष्टमी महोत्सव के दौरान हरिनाम संकीर्तन में भक्तों ने भावविभोर होकर सहभागिता की। मथुरा, आगरा, लखनऊ, जयपुर, दिल्ली, भरतपुर सहित विभिन्न नगरों से आए श्रद्धालुओं ने उत्सव में भाग लिया और दिव्य आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।

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