Sonbhadra News: राजस्वकर्मियों के पत्नी-परिजनों के नाम जमीन बैनामे का खेल, होगी जांच तो सामने आएंगे हैरान करने वाले कारनामे

Sonbhadra News: लोगों की ओर से किए जाने वाले जुबानी दावों पर यकीन करें दुद्धी और ओबरा तहसील में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दलितों-आदिवासियां की जमीन हथियाने का खेल तो खेला ही गया है, जिला मुख्यालय क्षेत्र के लोढ़ी, रौप और मुसही ग्राम पंचायत में भी इस तरह के खासे मामले बताए जा रहे हैं।

Kaushlendra Pandey
Published on: 20 July 2025 5:52 PM IST
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Sonbhadra News: सोनभद्र में जमीनों की लूट का खेल नया नहीं है। पन्नूगंज थाना क्षेत्र से जुड़े ताजा मामले में, एएसपी के निर्देश पर, पन्नूगंज पुलिस केस दर्ज कर प्रकरण की जांच में जुट गई है लेकिन जिले के दूसरे हिस्सों की छोड़ दें, महज जिला मुख्यालय क्षेत्र में ही, कई भूखंड ऐसे हैं, जिनको हथियाने के लिए कुछ राजस्वकर्मियों ने ऐसे हथकंडे अपनाए कि नटवरलाल भी जमीन हथियाने के खेल का सच जानकर शरमा जाएं। सामान्य-पिछड़ा वर्ग के जमीनों को कम कीमत पर हासिल करने का तो खेल खेला ही गया, अनुसूचित जाति की कौन कहे, अनुसूचित जनजाति की जमीनें, पिछड़े वर्ग के नाम पर हथिया ली गईं।

आरोप है कि आदिवासियों के अशिक्षा और भोलेपन का फायदा उठाकर, उन्हें कुछ रूपये थमा दिए गए या फिर उन्हें धमकाकर चुप करा दिया गया। लोगों की तरफ से किए जा रहे दावे और चर्चाओं पर यकीन करें तो दलितों-आदिवासियों यानी अनुसूचित जाति-जनजाति की जमीनों को बेहद ही कम कीमत पर हथियाने का काफी बड़ा खेल खेला गया है। कुछ ऐसे राजस्वकर्मी बताए जा रहे हैं जिन्होंने अपने विभागीय रसूख और अपनी विभागीय रिपोर्ट का फायदा उठाकर, दूसरों के नाम अनुसूचित जाति-जनजाति की जमीनें, बगैर सक्षम प्राधिकारी के दाखिल खारिज तो करवाया ही, स्वयं की पत्नी और परिवार वालों के नाम भी अच्छी-खासी जमीन खड़ी कर ली।

यहां की जमीनों के खरीद-फरोख्त में उड़ाई गई हैं नियमों की धज्जियां

लोगों की ओर से किए जाने वाले जुबानी दावों पर यकीन करें दुद्धी और ओबरा तहसील में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दलितों-आदिवासियां की जमीन हथियाने का खेल तो खेला ही गया है, जिला मुख्यालय क्षेत्र के लोढ़ी, रौप और मुसही ग्राम पंचायत में भी इस तरह के खासे मामले बताए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति की जमीनों को बगैर सक्षम प्राधिकारी के बैनामा तो कराया ही गया, 100 रूपये के स्टांप पर भी जमीन के खरीद फरोख्त का खेल खेलते हुए, हाइवे किनारे तक की जमीन हथिया ली गई।

लोगों की ओर से दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि पिछले 20 से 25 सालों के भीतर, इस क्षेत्र में तैनाती पाने वाले कुछ राजस्वकर्मी ऐसे भी रहे, जिन्हें पत्नी-परिवारीजनों के बीच अच्छी-खासी जमीन-संपत्ति खड़ी कर ली। कुछ को तो अभी भी राबटर्सगंज तहसील में ही तैनात बताया जा रहा है। यहीं कारण है कि, कई प्रकरणों की शिकायत के बाद भी, कोई कार्रवाई सामने नहीं आ सकी है।

आरोप-जनजाति को पिछड़ा वर्ग दर्शाकर हथियाई गई कई जमीनें!

बताते चलें कि अनुसूचित जाति की जमीन का बैनामा कराने के लिए डीएम के यहां से अनुमति की जरूरत होती है। जबकि अनुसूचित जनजाति की जमीन सिर्फ अनुसूचित जनजाति का ही व्यक्ति ले सकता है लेकिन लोगों का दावा है कि पिछले 20 साल में ऐसे कई बैनामे हुए हैं, जिनमें अनुसूचित जाति के व्यक्ति को पिछड़ा दिखा गया दिया गया और संबंधित लेखपाल-राजस्वकर्मी ने भी उसी तरह से रिपोर्ट लगा दी और आसानी से जमीन दाखिल खारिज करा ली गई। कई मामलों में जमीन विक्रेता स्वर्गवासी हो चुके हैं तो कई विक्रेताओं को यही नहीं पता कि जमीन बिक्री के वक्त उनकी जाति क्या दशाई गई।

सीएम ने दिए थे कार्रवाई के निर्देश, डीएम ने तलब की थी रिपोर्ट

अनुसूचित जाति-जनजाति की जमीनों को हड़पने-हथियाने के खेल की शिकायत भाजपा के जिलाध्यक्ष की तरफ से मुख्यमंत्री से की गई, जिस पर प्रकरणों का परीक्षण कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। वहीं, तत्कालीन डीएम चंद्रविजय सिंह की तरफ से ऐसे सभी प्रकरणों को लेकर रिपोर्ट तलब की गई लेकिन उनके तबादले के साथ ही, जहां संबंधितों ने इस मसले पर चुप्पी साध ली। वहीं, कहा जा रहा है कि 20 वर्ष पूर्व तक जितनी भी अनुसूचित जनजाति की जमीनें थी, उनके बैनामा-नामांतरण की जांच करा दी जाए तो एक नहीं कई बड़े चेहरे बेनकाब होते नजर आ सकते हैं।

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