Sonbhadra News: जमीनी विवाद में मारपीट, पुलिस ने 'हत्या का प्रयास' बताया, कोर्ट ने 'जमानत के पर्याप्त आधार' मानकर अर्जी मंजूर की

Sonbhadra News: पुलिस ने अपनी चार्जशीट में इसे 'हत्या के प्रयास' का मामला बताया था, लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों और साक्ष्यों के आधार पर इसे 'जमीनी विवाद' से उत्पन्न घटना मानते हुए जमानत के पर्याप्त आधार पाए।

Kaushlendra Pandey
Published on: 18 July 2025 7:11 PM IST
Sonbhadra News: जमीनी विवाद में मारपीट, पुलिस ने हत्या का प्रयास बताया, कोर्ट ने जमानत के पर्याप्त आधार मानकर अर्जी मंजूर की
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जमीनी विवाद में मारपीट, पुलिस ने 'हत्या का प्रयास' बताया  (photo: social media )

Sonbhadra News: चोपन थाना क्षेत्र के पइका गांव से जुड़े मारपीट के एक चर्चित प्रकरण में, न्यायालय ने तीन आरोपियों की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में इसे 'हत्या के प्रयास' का मामला बताया था, लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों और साक्ष्यों के आधार पर इसे 'जमीनी विवाद' से उत्पन्न घटना मानते हुए जमानत के पर्याप्त आधार पाए।

मामले में विजय कुमार की ओर से थाना चोपन में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि 10 जून 2025 की दोपहर लगभग 1 बजे, जब वह अपने घर के दरवाजे पर बैठा था, तभी हरिगोविंद उर्फ लल्लू, देवीराम मिश्र, प्रदीप मिश्र, और सूर्य प्रकाश उर्फ नागा मिश्र आए और जमीनी विवाद को लेकर उसे, उसके पिता श्यामलाल, सरिता देवी, और सोनाली को लाठी-डंडों से मारा-पीटा, जिससे सभी को चोटें आईं। शिकायत में यह भी कहा गया था कि गाली-गलौज करते हुए जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई।

विवेचना में पुलिस का दावा 'हत्या का प्रयास', बचाव पक्ष का तर्क 'जमीनी विवाद'

विवेचना के दौरान पुलिस की तरफ से दावा किया गया कि यह सिर्फ मारपीट नहीं, बल्कि 'हत्या का प्रयास' था, और आरोपी पक्ष का क्षेत्र में काफी दबदबा है।

वहीं, बचाव पक्ष का कहना था कि कथित घटना के दिन और समय पर, वादी विजय कुमार, श्यामलाल, सरिता देवी, और सोनाली आरोपी पक्ष के घर से सटी उस भूमि पर चढ़ आए थे, जिस पर आरोपी पक्ष का बाप-दादा के जमाने से लगातार कब्जा था। बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि वादी पक्ष ने एससी/एसटी एक्ट के मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी देते हुए जमीन कब्जाने की कोशिश की।

लेखपाल-कानूनगो की मौजूदगी में पथराव, पुलिस ने नहीं लिया संज्ञान

बचाव पक्ष का यह भी कहना था कि संबंधित जमीन की नापी के लिए चकबंदी लेखपाल और कानूनगो मौके पर आए हुए थे। जैसे ही नापी शुरू हुई, वादी पक्ष आक्रामक हो गया और सड़क पर आकर ईंट-पत्थर फेंककर मारना शुरू कर दिया, जिसके चलते आरोपी बनाए गए लोगों को भी चोटें आईं। बचाव पक्ष ने दावा किया कि उन्होंने पुलिस से गुहार लगाई और कार्रवाई के लिए प्रार्थना पत्र भी दिया था, लेकिन उसका कोई संज्ञान नहीं लिया गया। न ही घटना के संबंध में संबंधित लेखपाल और कानूनगो का बयान दर्ज किया गया। गवाह भी सिर्फ वादी पक्ष से जुड़े लोग थे, और सिर्फ उनके बयान को आधार बनाकर, वादी की तहरीर के इतर 'हत्या के प्रयास' का मामला बना दिया गया।

न्यायालय ने पाया 'जमीनी विवाद' और 'पर्याप्त आधार'

दोनों पक्षों की तरफ से पेश किए गए तर्कों और पत्रावली के अवलोकन से न्यायालय ने पाया कि प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 115(2), 352, 351(3), 109, 324(2) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1) द, ध एवं धारा-3(2)5 के तहत आरोप पत्र प्रेषित किया गया है। पत्रावली पर वादी विजय कुमार और श्याम लाल की एक्सरे रिपोर्ट संलग्न है, जिसमें कोई अस्थिभंग (फ्रैक्चर) नहीं पाया गया है। केवल सरिता देवी के बाएं कंधे की हड्डी टूटी मिली है।

पत्रावली के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि दोनों पक्षों के मध्य पहले से ही जमीनी विवाद चला आ रहा था। मामले के तथ्यों, परिस्थितियों, और आवेदकों की जेल में निरुद्धता आदि को दृष्टिगत रखते हुए, न्यायालय ने जमानत पर रिहा किए जाने का पर्याप्त आधार पाया। प्रकरण में तीनों आरोपियों की जमानत अर्जी मंजूर की गई है, और प्रत्येक के लिए 50-50 हजार रुपये का स्वबंध पत्र तथा समान धनराशि की दो-दो विश्वसनीय जमानतें दाखिल करने के लिए कहा गया है।

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