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BHU Art Exhibition: काशी हिंदू विश्वविद्यालय में मिट्टी के तवे और प्लेटों पर कलाकृतियों से विश्व बंधुत्व व पर्यावरण संरक्षण का संदेश
BHU Art Exhibition: वाराणसी की कला और विज्ञान में वैश्विक चमक: बीएचयू में अनूठी प्रदर्शनी, प्रो. आर.पी. मौर्य को अमेरिका में मिलेगा बड़ा सम्मान
Varanasi News (Social Media image)
Varanasi News: धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी आज कला और विज्ञान दोनों ही क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। जहां काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता से विश्व बंधुत्व और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश दिया है, वहीं क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आर.पी. मौर्य को अमेरिका में उनकी नेत्र कैंसर पर बनी वीडियो फिल्म के लिए प्रतिष्ठित 'बेस्ट वीडियो फिल्म अवार्ड' से सम्मानित किया जाएगा।
बीएचयू में कला के ज़रिए विश्व बंधुत्व और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय स्थित अहिवासी कला दीर्घा में लगभग 50 कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए विश्व बंधुत्व और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संदेश दिया है। इन कलाकारों ने मिट्टी के तवे, सिरेमिक और डिस्पोजेबल कागज़ की प्लेटों जैसे अप्रत्याशित माध्यमों पर अपनी निजी शैली में चित्रांकन किया। इन कलाकृतियों को बाद में विश्वनाथ मंदिर के द्वार पर प्रदर्शित किया गया, जहां से गुजरने वाले लोग इन रचनात्मक कार्यों को देखकर आश्चर्यचकित रह गए।
यह कलात्मक जागरूकता कार्यक्रम 16वें अंतर्राष्ट्रीय रंग मल्हार के अंतर्गत संपन्न हुआ। कार्यक्रम के स्थानीय संयोजक और चित्रकार डॉ. सुरेश जांगिड़ ने बताया कि इस नवाचार की शुरुआत 2010 में जयपुर के प्रसिद्ध कलाकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने की थी। तब से हर साल जुलाई महीने के रविवार को दुनिया के कई हिस्सों में 'रंग मल्हार' का आयोजन किया जाता है, जिसमें हर बार एक नए चित्र तल पर कला का प्रदर्शन किया जाता है। पिछले वर्षों में छाता, टी-शर्ट, हेलमेट, मास्क, साइकिल, कार, लालटेन, पंखी, कैरी बैग, ग्लोब, ध्वज, चाय की केतली और एप्रन जैसे आधारों पर भी चित्रांकन किया जा चुका है।
इस बार तवे और प्लेटों का चुनाव इसलिए किया गया क्योंकि ये वस्तुएं मनुष्य की उदरपूर्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस पहल का उद्देश्य कला के माध्यम से पूरी दुनिया को जोड़ना है। यह संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा निर्धारित 17 सतत विकास लक्ष्यों में से दूसरे क्रमांक 'सभी के लिए भोजन' के प्रावधान पर केंद्रित है, जो पूरी पृथ्वी को एक परिवार मानते हुए भोजन को आपस में बांटकर सभी को उपलब्ध करवाने के संकल्प को दर्शाता है। यह भारतीय संस्कृति की 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की अवधारणा से भी जुड़ता है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जन सामान्य को इन लक्ष्यों के प्रति जागरूक करना और उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का पुनः स्मरण करवाना है।
इस कलात्मक पहल में वाराणसी के कई कलाकारों ने योगदान दिया, जिनमें विजय सिंह, अजय उपासनी, प्रोफेसर जसमिंदर कौर, सोनिका शर्मा, गरिमा यादव, श्वेता विश्वकर्मा, गौतम देव, शालिनी प्रजापति, साधना गौंड, सुभाष चंद्र, जसवंत राव, अंजलि मौर्य, प्रियांशी जायसवाल, प्रीति कुमारी, रिंकी मंडल, गोविंद कुमार, प्रियांशु, स्वाति भगत, कार्तिकेय पालीवाल, पूजा गुप्ता और रूत्वी जांगिड़ शामिल हैं।
प्रोफेसर आर.पी. मौर्य को अमेरिका में मिलेगा 'बेस्ट वीडियो फिल्म अवार्ड'
वहीं, वाराणसी के लिए एक और गौरव का क्षण सामने आया है, जहां क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के विभागाध्यक्ष और एशिया पैसिफिक सोसाइटी ऑफ ऑक्यूलर ऑन्कोलॉजी एंड पैथोलॉजी के उपाध्यक्ष डॉ. आर.पी. मौर्य को अमेरिका में 'बेस्ट वीडियो फिल्म अवार्ड' से सम्मानित किया जाएगा।
अमेरिका के फ्लोरिडा प्रांत के ऑरलैंडो शहर में 18 से 20 अक्टूबर 2025 तक आयोजित होने वाले विश्व के सबसे बड़े नेत्र सम्मेलन (अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी कांग्रेस-2025) में डॉ. मौर्य द्वारा नेत्र कैंसर पर निर्मित एक वीडियो फिल्म (विषय: "डांसिंग मैगट्स इन द ऑर्बिट ऑफ नाइनटीन पेशेंट्स विद आइलिड कार्सिनोमा") का चयन एकेडमी की जूरी द्वारा "कैंसर श्रेणी" में "सर्वश्रेष्ठ वीडियो प्रदर्शन पुरस्कार" (वीडियो फिल्म शो अवार्ड) के लिए किया गया है।
यह उत्तर प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि यह पहली बार होगा जब राज्य के किसी नेत्र सर्जन को इस तरह का अमेरिकन एकेडमी अवार्ड मिलेगा। डॉ. आर.पी. मौर्य इस सम्मेलन में अपनी वीडियो फिल्म प्रदर्शित करने के साथ-साथ दो अन्य शोध पत्र भी प्रस्तुत करेंगे। पहला शोध पत्र "ऑप्थल्मिक सिस्टिसरकोसिस इन इंडियन-एशियन पेशेंट्स: ए टीचिंग हॉस्पिटल सर्वे" और दूसरा "स्टडी ऑफ सीरम सुपरऑक्साइड डिसम्यूटेज एंड मालोनडाइहाइड बिफोर एंड आफ्टर सिस्टेमिक कीमोथेरेपी इन पेशेंट्स ऑफ सिबेसियस ग्लैंड कार्सिनोमा ऑफ आइ-लिड" विषय पर होगा।
यह उपलब्धि वाराणसी और उत्तर प्रदेश के चिकित्सा और अकादमिक क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सम्मान है, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय प्रतिभा को उजागर करती है।


