Moradabad: न्यूज़ ट्रैक की खबर का बड़ा असर: मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के अधिशाषी अभियंता अमित कादियान को आखिरकार हटाया गया

Moradabad News: मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के अधिशाषी अभियंता अमित कादियान को तत्काल प्रभाव से हटाया गया। 8 वर्षों से जमी कुर्सी आखिर हिली।

Sudhir Goyal
Published on: 24 July 2025 10:59 PM IST
Moradabad: न्यूज़ ट्रैक की खबर का बड़ा असर: मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के अधिशाषी अभियंता अमित कादियान को आखिरकार हटाया गया
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मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के अधिशाषी अभियंता अमित कादियान को आखिरकार हटाया गया  (photo: social media )

Moradabad News: न्यूज़ट्रैक पर प्रकाशित खबर के बाद मुरादाबाद विकास प्राधिकरण में वर्षों से जमी कुर्सी आखिर हिली। विगत 8 वर्षों से प्राधिकरण में पदस्थ अधिशाषी अभियंता अमित कादियान को अंततः तत्काल प्रभाव से रिलीव कर दिया गया है।

बुधवार को जहां सुबह तक कार्यालय में चर्चाओं का दौर था, वहीं दोपहर होते-होते प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने आदेश जारी कर कादियान को कार्यमुक्त कर दिया। यही नहीं, दोपहर बाद एक संक्षिप्त विदाई समारोह का भी आयोजन किया गया, जिसमें उन्हें औपचारिक विदाई दे दी गई।

इस पूरी कार्रवाई की तेजी और गोपनीयता ने सबको चौंका दिया। समारोह भी इस तरह से हुआ जैसे इसकी स्क्रिप्ट रात में ही तैयार कर ली गई हो। मीडिया को भी इससे दूर रखा गया। जो गिने-चुने पत्रकार पहुंचे, उन्हें भीतर जाने की अनुमति नहीं दी गई।

पूरा मामला क्या है?

मामला 13 जून 2025 को शासन द्वारा जारी एक स्थानांतरण आदेश से जुड़ा है, जिसमें अधिशाषी अभियंता अमित कादियान को हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण में स्थानांतरित किया गया था। आदेश में स्पष्ट निर्देश थे कि वे तत्काल प्रभाव से नवीन कार्यस्थल पर कार्यभार ग्रहण करें और मुरादाबाद के पद से पदमुक्त किए जाएं।लेकिन, आदेश के एक महीने बाद भी अमित कादियान मुरादाबाद में ही जमे रहे। यह पहली बार नहीं है, जब उन्होंने शासन के आदेश को नजरअंदाज किया हो। पिछले 8 वर्षों में उनका तबादला कई बार हुआ, पर हर बार वे तबादला रुकवाने में सफल रहे।

सूत्रों का दावा है कि कादियान के पास टाउन प्लानर का भी अतिरिक्त प्रभार था, जो उन्हें और अधिक शक्ति देता था।

मुरादाबाद विकास प्राधिकरण में अमित कादियान का 8 साल का कार्यकाल अब चर्चा और सवालों का केंद्र बन चुका है। अब जबकि उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया है, यह सवाल उठता है कि क्या शासन की सख्ती ने वाकई असर दिखाया या फिर यह सिर्फ अस्थायी कार्रवाई है? क्या वे वाकई हापुड़-पिलखुवा कार्यभार ग्रहण करेंगे या फिर फिर से पर्दे के पीछे कुछ चल रहा है?

सवाल अब भी बाकी है कि। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण में ऐसी क्या खास बात है, जो कोई इसे छोड़ना नहीं चाहता?।जो भी हो, इतना तय है कि यह मामला यहीं नहीं थमेगा। आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।

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