Sonbhadra News: आंगनबाड़ी भर्ती में भ्रष्टाचार की होगी ’विजिलेंस’ जांच, दो ऑडियो हुए थे वायरल, हाईकोर्ट ने दिया आदेश

Sonbhadra News: आंगनबाड़ी भर्ती चयन को लेकर हुई काउंसलिंग के दौरान भी यह मसला जोर-शोर से उठा था। वायरल ऑडियो की जांच कराए जाने की बात भी कही गई थी ।

Kaushlendra Pandey
Published on: 24 July 2025 7:45 PM IST
Sonbhadra News: आंगनबाड़ी भर्ती में भ्रष्टाचार की  होगी ’विजिलेंस’ जांच, दो ऑडियो हुए थे वायरल, हाईकोर्ट ने दिया आदेश
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आंगनबाड़ी भर्ती में भ्रष्टाचार की होगी ’विजिलेंस’ जांच  (photo: social media )

Sonbhadra News: हाईकोर्ट की तरफ से सोनभद्र में हुई आंगनबाड़ी भर्ती में कथित गड़बड़ी, रिश्वत मांगे जाने और इसको लेकर दो ऑडियो वायरल होने के मामले की जांच ’विजिलेंस इंक्वायरी’ के जरिए कराए जाने के आदेश दिए हैं। इस मामले में याचिकाकर्ता को शिकायत के निवारण के लिए अन्य उपयुक्त मंच का भी सहारा लिए जाने की छूट दी गई है। आंगनबाड़ी भर्ती चयन को लेकर हुई काउंसलिंग के दौरान भी यह मसला जोर-शोर से उठा था। वायरल ऑडियो की जांच कराए जाने की बात भी कही गई थी । वहीं, सत्ता पक्ष के ही राज्यमंत्री पद का दर्जा रखने वाले एक वरिष्ठ नेता ने, वायरल ऑडियो को, विपक्षी दलों की तरफ से सरकार को बदनाम करने की कोशिश बताकर प्रकरण को नया मोड़ दे दिया। उसके बाद से यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ था। अब इस मामले में हाईकोर्ट की तरफ से सतर्कता जांच के आदेश दिए गए हैं तो एक बार फिर से यह मसला गरम हो उठा है।

पिछले सप्ताह हाईकोर्ट की बेंच ने की मामले की सुनवाई:

मारकुंडी ग्राम पंचायत से आंगनबाड़ी की अभ्यर्थी रही रेनू यादव ने हाईकोर्ट ने प्रकरण को लेकर याचिका दाखिल की थी। मांग की थी कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ती के पद पर चयन के लिए रिश्वत की मांग के मामले में उसके द्वारा की गई शिकायतों की जांच की जाए। न्यायमूर्ति अजीत कुमार की बेंच ने प्रकरण की सुनवाई की। पाया कि याचिकाकर्ता चाहती है कि भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की जाए। निर्णय पारित किया गया कि इसके लिए याचिकाकर्ती सतर्कता जांच के लिए 12 सितंबर 1995 के सरकारी आदेश केक तहत उपलब्ध उपाय को अपना सकती है या वह अपनी शिकायत के निवारण के लिए उपयुक्त मंच का सहारा ले सकती है। बेंच ने कहा कि, जांच की उपरोक्त स्वतंत्रता के अधीन प्रकरण के लिए जांच/सुनवाई के लिए भेजा जाता है।

जानिए क्या था पूरा मामला:

गत अप्रैल माह में आंगनबाड़ी भर्ती को लेकर दो ऑडियो वायरल हुए थे। वायरल ऑडियो को लेकर दावा किया गया था कि एक पक्ष से बात करने वाले एडवोकेटे दया यादव हैं और दूसरी तरफ से राबटर्सगंज के तत्कालीन सीडीपीओ हैं। यह भी दावा किया गया था कि वायरल ऑडियो में हो रही बातचीत सदर ब्लाक के मारकुंडी ग्राम पंचायत में आंगनबाड़ी कार्यकर्ती के चयन से जुड़ी हुई है। आरोप लगाया गया था कि मांगी गई रकम अदा न किए जाने पर, रेनू यादव को पात्रता की सूची से हटाकर, कथित ..गिरि अभ्यर्थी को प्रथम स्थान पर चयनित कर लिया गया।

वायरल ऑडियो में डेढ़ लाख की मांग ने बटोरी था खासी सुर्खीः

वायरल हुए पहले ऑडियो में जहां मसला टेक्निकल होने, किसी तरह जुगाड़ कर कार्यकर्ती के पद पर चयनित सूची में नाम दिलाने, इसके लिए कथित डेढ़ लाख की मांग करने, इस मामले में कथित डीपीओ के कड़क होने की बात कही गई थी। वहीं, दूसरे ऑडियो में जो बात हुई है उसका अरेजमेंट कर लीजिए। उसी के लिए रोके हैं। ... मेन काम की व्यवस्था कर लीजिए, कल रेडी कर लीजिए, देखिए.. व्यवस्था कर लीजिए.. नहीं तो फिर लटका रह जाएगा.. जैसे शब्दों ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सीधे सवाल उठा दिए थे।

ऑडियो में कहा गया था - कर लिजिए व्यवस्था, वरना दूसरा तैयार..?

इसी ऑडियो में कॉल करने वाला पूछता है कि मांगी जा रही रकम कम नहीं होगी, डेढ़ यानी डेढ़ लाख ही देना होगा.. इस पर कॉल रिसीव करने वाले व्यक्ति कहता है कि फोन पर यह नहीं पूछा जाता.., व्यवस्था कर लीजिए.. मेन उसी के लिए दिक्कत है। मैं कैसे-कैसे इसको करा रहा हूं.. नहीं तो मुझे गिरि.. यानी दूसरे अभ्यर्थी से जुड़े कंडीडेट का फोन आया था। दिलचस्प मसला यह है कि जिस अभ्यर्थी का चयन हुआ, उसकी टाइटल गिरि है। बावजूद इस प्रकरण की जांच दूर, शुरू से ही प्रक्रिया वैध होने का राग अलापा जाता है। अब जब हाईकोर्ट ने इसकी सतर्कता या अन्य उपयुक्त जांच के लिए कहा है तो इसका क्या परिणाम आता है, इस पर लोगों की निगाहें बनी हुई हैं।

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