Varanasi News: जीआरपी और आरपीएफ की मिलीभगत से रेलवे नियमों का उल्लंघन, करोड़ों का हो रहा नुकसान

Varanasi News: स्टेशन डायरेक्टर (सीएमआई) को वसूली की सारी जानकारियां हैं, कि कहां, कैसे और क्या खेल चल रहा है, लेकिन सभी इसमें शामिल हैं।

Ajit Kumar Pandey
Published on: 13 July 2025 12:55 PM IST
Varanasi News: जीआरपी और आरपीएफ की मिलीभगत से रेलवे नियमों का उल्लंघन, करोड़ों का हो रहा नुकसान
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Varanasi News: रेलवे अधिकारी, आरपीएफ और जीआरपी की आपसी मिलीभगत से केंट स्टेशन पर कार, ऑटो व अन्य वाहनों से अवैध वसूली होती है। सभी के आपसी गठबंधन से यह करोड़ों का खेल वर्षों से चल रहा है। टेंडर न निकालने के कारण रेलवे राजस्व को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्टेशन डायरेक्टर (सीएमआई) को वसूली की सारी जानकारियां हैं, कि कहां, कैसे और क्या खेल चल रहा है, लेकिन सभी इसमें शामिल हैं। कार्यवाही के नाम पर जीरो। जीआरपी और आरपीएफ पुलिस वहां से वसूली होते हुए भी देखती रहती है।

प्राइवेट लोगों द्वारा पैसे किसको दिये जाते हैं, यह जांच का विषय है। वर्षों से टेंडर न होना और वसूली जारी रहना किसकी संलिप्तता है, सूत्र बताते हैं कि रोजाना ₹40,000 से ₹50,000 की वसूली होती है। इतनी बड़ी रकम और वर्षों से हो रही वसूली आखिर किसकी जेब में जा रही है? चर्चा यहां तक है कि सभी मिलकर पैसे आपस में बांट लेते हैं। जहां से वसूली होती है, वह सिगरा थाना क्षेत्र में आता है, लेकिन सिगरा पुलिस को इस भ्रष्ट गठजोड़ की जानकारी नहीं है कि पैसे कौन ले रहा है। वाणिज्य कर अधिकारी और स्टेशन डायरेक्टर को मामला संज्ञान में होने के बाद भी किसी तरह के दिशा-निर्देश नहीं मिले और कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिर किसके बल पर वसूली अभियान चल रहा है?

जीआरपी की व्यवस्था अलग है और आरपीएफ की अलग, सूत्र बताते हैं कि प्राइवेट कई लोग मिलकर वसूली करते हैं और सभी को सिस्टम द्वारा पहुंचाया जाता है। चार पहिया वाहन से ₹60, टेंपो से ₹20 वसूला जाता है। यदि एक टेंपो को 10 चक्कर लगाने पड़ते हैं तो उसे ₹200 देने पड़ते हैं। बाइक स्टैंड पर एक-दो घंटे के लिए ₹5 की दर है, लेकिन उनसे 15-20 रुपये वसूले जाते हैं। यह लंबा खेल वर्षों से चल रहा है। महीने की वसूली 10 लाख से अधिक बताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में सीओ जीआरपी का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल पर कई बार कॉल किया गया, लेकिन मोबाइल स्विच ऑफ था। जीआरपी इंस्पेक्टर ने दो बार पूरी घंटी बजाने के बाद भी फोन रिसीव नहीं किया। सरकार चाहे जितनी भी कोशिश कर ले भ्रष्टाचार खत्म करने की, लेकिन उनके कर्मचारी ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं। ऊपर से लेकर नीचे तक वर्षों से अवैध वसूली हो रही है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो रहा।वैसे चौकी इंचार्ज रोडवेज क्षेत्र आते हैं और सिगरा थाना को भी वसूली पर सवाल उठाना चाहिए। आखिर रोजाना इतनी बड़ी वसूली किसकी जेब में जा रही है?

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